ट्रंप के 50% टैरिफ फैसले से तिलमिलाया पाकिस्तान, सीजफायर की गुहार के बाद इशाक डार का नया दावा- ‘हमारे हथियारों ने…’

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हाइलाइट्स

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50% टैरिफ फैसले से भारत-अमेरिका के बीच नए आर्थिक समीकरण बन रहे हैं।
  • पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत से बातचीत की गुजारिश की, लेकिन भारत आतंकवाद पर सख्त रुख पर कायम।
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और उसके सहयोगियों के हथियारों की पोल खोली।
  • ट्रंप की सीजफायर मध्यस्थता की दावों को पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बयान ने खारिज किया।
  • पाकिस्तान की डगमगाती विदेश नीति के चलते दुनिया में उसकी साख और कमजोर हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसले से वैश्विक राजनीति में हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर 50% टैरिफ लगाने का निर्णय न केवल आर्थिक मोर्चे पर बल्कि वैश्विक राजनीति के मंच पर भी बड़ा बदलाव लेकर आया है। यह फैसला अमेरिकी व्यापारिक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसके असर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों के रिश्तों में नए गठजोड़ की शुरुआत हो चुकी है।
भारत-अमेरिका संबंध जहां पहले से ही सामरिक और तकनीकी साझेदारी पर मजबूती की ओर बढ़ रहे थे, वहीं यह टैरिफ विवाद नए व्यापारिक समीकरणों को जन्म दे रहा है।

पाकिस्तान पर गहराता वैश्विक अविश्वास

पाकिस्तान, जो लंबे समय से आतंकवादियों का पनाहगार माना जाता रहा है, इस नए वैश्विक समीकरण में कहीं भी फिट नहीं हो पा रहा। भारत की ओर से आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और बढ़ गया है।

हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों की ओर से इस्तेमाल किए गए हथियारों और संसाधनों की पोल पूरी दुनिया के सामने खोल दी थी। इस खुलासे ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा किया।

पाकिस्तान की बदलती बयानबाजी

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के हालिया बयानों से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान की विदेश नीति किस कदर अस्थिर है। कभी भारत पर युद्ध का आरोप लगाने वाला पाकिस्तान आज सम्मानजनक संवाद की मांग कर रहा है।
डार ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ ‘कंपोजिट डायलॉग’ शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन यह बयान उनके पुराने बयानों से पूरी तरह विपरीत है। इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक मजबूरी और विश्व मंच पर उसकी कमजोर स्थिति का पता चलता है।

ट्रंप की मध्यस्थता पर सवाल

पाकिस्तान के विदेश मंत्री का यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई।
डार ने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद ने कभी भी किसी तीसरे पक्ष, यहां तक कि अमेरिका से भी, सीजफायर कराने का अनुरोध नहीं किया। यह बयान ट्रंप की मध्यस्थता की कहानी को चुनौती देता है और यह बताता है कि पाकिस्तान खुद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने के लिए बयानबाजी का सहारा ले रहा है।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत ने इस पूरे विवाद में अपना रुख साफ रखा है। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत तभी संभव है जब वह आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करे और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर स्पष्ट कदम उठाए।
भारत की इस नीति ने न केवल पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दिया है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदला खेल

भारतीय सेना द्वारा हाल ही में किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की हकीकत को उजागर कर दिया। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तानी सेना के कई ठिकानों को निशाना बनाया और उनके हथियारों का स्रोत भी दुनिया को दिखाया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत के इस कदम का समर्थन किया, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति और कमजोर हो गई।
ट्रंप प्रशासन का भारत पर टैरिफ लगाने का कदम भले ही आर्थिक दबाव के लिए था, लेकिन पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख स्पष्ट रूप से सख्त होता जा रहा है।

पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख पर असर

पाकिस्तान के विदेश मंत्री के उलझे हुए बयानों ने यह साबित कर दिया है कि देश कूटनीतिक स्तर पर कितनी मुश्किल स्थिति में है। अमेरिका के साथ उसके रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं और भारत से खुला टकराव पाकिस्तान को और अलग-थलग कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम पाकिस्तान के लिए भी एक चेतावनी है कि दुनिया अब उसकी आतंकवाद पर दोहरी नीति को बर्दाश्त नहीं करेगी।

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह निर्णय भारत-अमेरिका संबंधों में अस्थायी तनाव पैदा कर सकता है, लेकिन यह व्यापारिक विवाद लंबी अवधि में दोनों देशों को मजबूती से जोड़ भी सकता है।
भारत का तेजी से बढ़ता हुआ बाजार अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। दूसरी ओर, पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख स्पष्ट रूप से नकारात्मक हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 50% टैरिफ का फैसला केवल व्यापारिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान की अस्थिर विदेश नीति और उसकी बदलती बयानबाजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख लगातार गिर रही है।
भारत अपनी रणनीतिक और आर्थिक ताकत के दम पर न केवल अमेरिका बल्कि अन्य शक्तिशाली देशों के लिए भी एक अहम साझेदार बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि ट्रंप का यह निर्णय वैश्विक राजनीति को कैसे नई दिशा देता है

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