कक्षा में मासूम को मेज के नीचे दबाकर पीटता रहा टीचर… वीडियो देख सिहर उठे लोग, सिवनी कांड ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

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हाइलाइट्स

  • शिक्षक की बर्बरता का वीडियो मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के कुरई ब्लॉक से हुआ वायरल।
  • छह साल के मासूम को क्लासरूम में मेज के नीचे दबाकर पीटा गया।
  • सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूटा।
  • शिक्षक महेश चौधरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग।
  • घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।

शिक्षक की बर्बरता: मासूम पर क्रूर प्रहार, वायरल वीडियो से मचा हंगामा

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के कुरई ब्लॉक के ग्राम अर्जुनी के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की बर्बरता की घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कक्षा दो में पढ़ने वाले छह साल के राहुल भलावी को शिक्षक महेश चौधरी ने अनुशासन के नाम पर ऐसी क्रूर सजा दी, जिसने सभी का दिल दहला दिया।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शिक्षक ने मासूम को मेज के नीचे दबा कर पीठ पर लकड़ी से कई वार किए। बच्चा दर्द से चीख रहा था, जबकि पूरी कक्षा इस खौफनाक दृश्य को देख रही थी। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद अभिभावकों और आम लोगों में गुस्सा फैल गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दर्दनाक वीडियो

शिक्षक की बर्बरता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही हजारों लोगों ने शेयर किया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शिक्षक का व्यवहार न केवल अमानवीय बल्कि खतरनाक भी था। मासूम राहुल डर और दर्द से चीख रहा था, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया।

वीडियो देखने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस तरह का व्यवहार किसी शिक्षक से कैसे हो सकता है। कई लोगों ने कहा कि किसी भी अनुशासन के नाम पर बच्चे को इस हद तक पीटना पूरी तरह अपराध है। यह घटना सिर्फ एक बच्चा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर

बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, शिक्षक की बर्बरता जैसी घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। इस तरह के प्रहार से बच्चे के आत्मविश्वास में कमी आती है और वे स्कूल जाने से डरने लगते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि शारीरिक चोटों से अधिक मानसिक चोटें बच्चे को जीवनभर सताती हैं। एक मनोवैज्ञानिक ने कहा,
“शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते हैं। जब वही हिंसा करते हैं, तो बच्चे के भीतर डर और असुरक्षा का भाव बैठ जाता है।”

स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया

घटना के वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक महेश चौधरी को तत्काल निलंबित किया गया है। साथ ही पुलिस ने भी बच्चे के माता-पिता की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जिला कलेक्टर ने कहा कि शिक्षक की बर्बरता जैसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर कोई भी शारीरिक हिंसा न की जाए।

अभिभावकों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन

इस घटना के बाद अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग की। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है, न कि उन पर हिंसा करने की।

एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि वे पढ़-लिख सकें, लेकिन इस घटना ने हमारे विश्वास को तोड़ दिया है। ऐसे शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक शिक्षक की गलती नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई की कमी के कारण ऐसे मामले रुक नहीं पाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए सकारात्मक तरीके अपनाने चाहिए। मारपीट से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास टूटता है, बल्कि उनका भविष्य भी प्रभावित होता है।

शिक्षा जगत में आक्रोश और सुधार की मांग

शिक्षक की बर्बरता के इस मामले के बाद शिक्षा जगत के लोगों ने भी विरोध जताया है। कई शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसे शिक्षकों को तुरंत बर्खास्त कर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

स्कूलों में निगरानी बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और शिक्षकों को संवेदनशीलता का प्रशिक्षण देने की मांग उठाई जा रही है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शिक्षा क्षेत्र में कड़े सुधारों की आवश्यकता है।

 सख्त कानून और जागरूकता से ही रुकेगी हिंसा

मध्य प्रदेश सिवनी जिले की यह घटना पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों के साथ हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। शिक्षक की बर्बरता जैसी घटनाएं तभी रुकेंगी जब कानून सख्त होंगे और समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।

अब जरूरत है कि अभिभावक, शिक्षक और प्रशासन मिलकर बच्चों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार करें।

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