हाइलाइट्स
- पिंक गैंग ठगी का बड़ा खुलासा, कॉल सेंटर से गिरफ्तार 16 लड़कियां और दो मास्टरमाइंड
- बेरोजगार युवाओं को फर्जी नौकरी का लालच देकर ठगे जाते थे हजारों रुपये
- पुणे और महाराष्ट्र के युवा मुख्य निशाने पर, हर महीने 30-40 हजार कॉल
- पुलिस ने मौके से मोबाइल, लैपटॉप, सिम कार्ड और दस्तावेज जब्त किए
- गिरोह के बैंक अकाउंट फ्रीज, ठगी की रकम की बरामदगी की तैयारी
पिंक गैंग ठगी: मुजफ्फरनगर पुलिस की बड़ी सफलता
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने एक चौंकाने वाली ठगी का खुलासा किया है। यह गिरोह खुद को ‘पिंक गैंग’ कहता था और बेरोजगार युवाओं को फर्जी नौकरी का लालच देकर ठगता था। पुलिस ने शहर के एक कॉल सेंटर पर छापा मारकर इस ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। मौके से 16 लड़कियों के साथ गिरोह के दो मास्टरमाइंड – आहद और जुबैद – को गिरफ्तार किया गया है।
यह गिरोह बड़ी चालाकी से काम करता था। मास्टरमाइंड युवतियों को कम वेतन पर नौकरी देता था और उन्हें प्रशिक्षित करता था कि कैसे बेरोजगार युवाओं को भावनात्मक तरीके से फंसाना है।
ठगी का तरीका: मीठी बातों का जाल
युवाओं को कैसे फंसाते थे पिंक गैंग के सदस्य
पिंक गैंग ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। लड़कियां युवाओं को फोन करके आकर्षक सैलरी वाली नौकरियों का ऑफर देती थीं। पीड़ितों से ‘सिक्योरिटी मनी’ या एडवांस फीस के नाम पर ₹2,500 से ₹5,000 तक की राशि मांगी जाती थी। जैसे ही पैसे मिलते, कॉल करने वाली युवतियां नंबर ब्लॉक कर देतीं।
इस गिरोह की विशेषता थी कि यह भावनात्मक जुड़ाव का इस्तेमाल करता था। कॉल करने वाली लड़कियां बेहद शालीन भाषा में बात करतीं, जिससे बेरोजगार युवा इन पर विश्वास कर लेते।
पिंक गैंग का नेटवर्क और टारगेट
पुणे और महाराष्ट्र के युवाओं को बना रहे थे निशाना
प्रारंभिक जांच से पता चला कि पिंक गैंग ठगी का शिकार बनने वाले अधिकतर लोग पुणे और महाराष्ट्र के अन्य शहरी इलाकों से थे। कॉल सेंटर से हर महीने 30,000 से 40,000 कॉल की जाती थीं। इसका मतलब है कि ठगी का यह नेटवर्क बेहद संगठित और बड़े पैमाने पर काम कर रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
कॉल सेंटर से क्या-क्या मिला?
मुजफ्फरनगर पुलिस की साइबर सेल ने ठगी की शिकायत को गंभीरता से लिया। इमरजेंसी नंबर 1930 पर मिली शिकायत के बाद विशेष टीम का गठन हुआ। छापेमारी के दौरान पुलिस ने:
- तीन लैपटॉप
- 20 मोबाइल फोन
- लगभग 30 सिम कार्ड
- रजिस्टर और दस्तावेज, जिनमें पीड़ितों की पूरी जानकारी दर्ज थी
इसके अलावा पुलिस ने गिरोह के तीन बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली है। इन खातों को तुरंत फ्रीज कर दिया गया है ताकि ठगी की रकम को सुरक्षित किया जा सके।
पिंक गैंग ठगी के पीछे की कहानी
कम सैलरी पर रखी जाती थीं युवतियां
गिरोह के मास्टरमाइंड आहद और जुबैद का पूरा नेटवर्क बेहद संगठित था। वे युवतियों को कम वेतन देकर कॉल करने के लिए रखते थे। उन्हें यह सिखाया जाता था कि कैसे फोन पर भरोसा जीतकर पीड़ितों से पैसा निकलवाया जाए।
इस तरह का कॉल सेंटर पूरी तरह ठगी के लिए डिज़ाइन किया गया था।
साइबर अपराध की नई चाल
पुलिस का मानना है कि यह केस भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड का एक और बड़ा उदाहरण है। पिंक गैंग ठगी जैसे गिरोह तकनीक का इस्तेमाल कर बेरोजगारी जैसी समस्या का फायदा उठा रहे हैं। कई पीड़ित अपनी नौकरी की तलाश में ठगी का शिकार हो जाते हैं।
पुलिस का आगे का कदम
मुजफ्फरनगर पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गैंग के तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। पुलिस ठगी से इकट्ठा की गई रकम को बरामद करने के लिए बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर रही है।
बेरोजगार युवाओं के लिए चेतावनी
ठगी से बचने के लिए क्या करें?
- किसी भी नौकरी के लिए सिक्योरिटी मनी या एडवांस मांगने वाली कंपनी पर भरोसा न करें।
- नौकरी के ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी कंपनी का बैकग्राउंड जरूर जांचें।
- साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें।
- सोशल मीडिया और कॉल पर निजी जानकारी साझा करने से बचें।
समाज के लिए सबक
यह केस इस बात का सबूत है कि कैसे बेरोजगारी का फायदा उठाकर अपराधी युवाओं को ठग रहे हैं। पिंक गैंग ठगी जैसी घटनाएं न केवल युवाओं की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी तोड़ती हैं। पुलिस का यह कदम युवाओं को साइबर अपराध से सतर्क रहने का संदेश देता है।
मुजफ्फरनगर पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस बड़े ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। पिंक गैंग ठगी का खुलासा यह बताता है कि साइबर अपराध किस तरह तेजी से विकसित हो रहा है और क्यों लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। फिलहाल पुलिस गिरोह की बाकी कड़ियों को तलाशने में जुटी है।