हाइलाइट्स
- असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर मौलाना अरशद मदनी ने ज़ी मीडिया को चौंकाने वाले खुलासे किए।
- मदनी का कहना है कि हिमंता कांग्रेस के वजीर थे, लेकिन उनका दिमाग आरएसएस का रहा।
- उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में हिमंता के टिकट न देने की सिफारिश की थी।
- मदनी के अनुसार, असम में 50,000 मुसलमानों को बेघर किया गया और उनका वोटिंग अधिकार भी छीना गया।
- बीजेपी ने मदनी के बयान पर कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाया कि क्या पार्टी मौलाना की सलाह के अनुसार टिकट देती है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने हाल ही में ज़ी मीडिया से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मौलाना ने हिमंता की सियासी हैसियत और उनके कार्यों के पीछे की सच्चाई से पर्दा उठाया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
मौलाना मदनी ने कहा कि हिमंता ने कांग्रेस पार्टी में रहते हुए अपनी पूरी जिंदगी कांग्रेस की रोटियां तोड़ी, लेकिन उनका मस्तिष्क हमेशा आरएसएस के प्रभाव में रहा। यह बयान उनके पुराने अनुभवों और राजनीतिक नजदीकियों का नतीजा बताया जा रहा है।
हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस का पुराना संबंध
मौलाना ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस पार्टी के वजीर थे, लेकिन उनके अंदर हमेशा आस्तीन का सांप होने की प्रवृत्ति रही। उन्होंने कहा:
“जब आखिरी इलेक्शन हुआ था, मैंने कहा था कि यह आपके वजीर जरूर है, लेकिन यह मुसलमानों के लिए खतरनाक साबित होगा।”
मौलाना ने यह भी साझा किया कि उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर हिमंता को टिकट न देने की सलाह दी थी। उनका तर्क था कि हिमंता का व्यवहार और नीतियाँ मुसलमान समुदाय के खिलाफ जा सकती हैं।
50,000 मुसलमानों को बेघर करने का आरोप
मौलाना ने असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके शासन में लगभग 50,000 मुसलमानों को बेघर कर दिया गया। इसके साथ ही यह भी बताया कि जिनके पास घर नहीं है, उन्हें वोट देने का अधिकार भी नहीं मिलेगा।
मौलाना ने कहा:
“इसका मतलब है कि वह देश के कानून और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ काम कर रहे हैं। यह असम में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सीधा हमला है।”
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मौलाना मदनी के बयानों के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस पार्टी मौलाना की सलाह के आधार पर चुनाव में टिकट बांटती है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और रणनीति की असफलता के रूप में पेश किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौलाना मदनी के खुलासों ने न केवल कांग्रेस को अंदर से चुनौती दी है बल्कि असम में बीजेपी की पकड़ को भी मजबूत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमंता बिस्वा सरमा की छवि और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मामलों पर यह बयान सियासी बहस को तेज कर सकता है।
असम की सियासत में भविष्य की चुनौतियाँ
मौलाना मदनी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि असम की सियासत में आगामी चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय का वोट और उनकी सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा। यदि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों पर स्पष्ट रणनीति नहीं बनाती है, तो यह उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
मौलाना अरशद मदनी के खुलासों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सियासी छवि पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए यह बयान चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अल्पसंख्यक समुदाय, राजनीतिक दल और प्रशासन इस मामले में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।