हाइलाइट्स
- बेबी स्टोन: महिला के पेट से 35 साल पुराना भ्रूण मिला, जो पत्थर में बदल गया था।
- अल्जीरिया की 73 वर्षीय महिला को लंबे समय से पेट दर्द की समस्या थी।
- कई वर्षों तक डॉक्टर्स भी दर्द की असली वजह नहीं जान पाए।
- जांच में सामने आया कि भ्रूण पेट में रहकर धीरे-धीरे पत्थर का रूप ले चुका है।
- चिकित्सकों ने इस दुर्लभ स्थिति को लिथोपेडियन कहा, जो बेहद कम मामलों में देखने को मिलती है।
बेबी स्टोन का चौंकाने वाला मामला: अल्जीरिया की बुजुर्ग महिला की कहानी
गर्भावस्था महिलाओं के जीवन का एक बेहद खास और भावुक अनुभव होता है। सामान्य परिस्थितियों में गर्भधारण के शुरुआती दिनों से ही महिला को इसकी जानकारी हो जाती है। लेकिन अल्जीरिया में सामने आया यह मामला विज्ञान और चिकित्सा की दुनिया के लिए भी किसी चमत्कार से कम नहीं। यहां एक 73 वर्षीय महिला के पेट में करीब 35 साल से भ्रूण पल रहा था। इतना ही नहीं, यह भ्रूण धीरे-धीरे पत्थर में बदल चुका था, जिसे चिकित्सा भाषा में बेबी स्टोन कहा जाता है।
जब तेज दर्द ने खोला राज
अल्जीरिया के छोटे से कस्बे में रहने वाली इस महिला को कई वर्षों से पेट दर्द की शिकायत थी। शुरुआती दौर में जब उसने डॉक्टरों को दिखाया तो किसी ने भी इस दर्द की असली वजह का पता नहीं लगाया। समय बीतता गया और महिला भी दर्द को सामान्य समझकर जीवन जीती रही। हालांकि, हाल ही में पेट में अचानक तेज दर्द होने पर वह अस्पताल पहुंची। विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसके पेट में एक 7 महीने का भ्रूण है, जो लगभग 35 साल पुराना है।
भ्रूण का पत्थर में बदलना: एक मेडिकल मिस्ट्री
डॉक्टरों के अनुसार महिला के पेट में मौजूद भ्रूण अब पूरी तरह से पत्थर जैसा हो चुका था। यह स्थिति इतनी दुर्लभ है कि इसे चिकित्सा जगत में ‘लिथोपेडियन’ कहा जाता है। आम भाषा में इसे बेबी स्टोन भी कहते हैं। यह तब होता है जब भ्रूण गर्भाशय के बजाय पेट के हिस्से में विकसित होना शुरू कर देता है। पर्याप्त खून की आपूर्ति न होने से भ्रूण की वृद्धि रुक जाती है। समय के साथ महिला के शरीर में यह भ्रूण ‘स्टोन’ में बदल जाता है, जिससे यह लंबे समय तक बिना किसी बड़े खतरे के शरीर में बना रहता है।
35 साल पुराना बेबी स्टोन: वजन और आकार
रिपोर्ट्स के अनुसार इस महिला के पेट में मौजूद भ्रूण का वजन लगभग 4.5 पाउंड (करीब 2 किलो) था। इसे डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक महिला के शरीर से बाहर निकाला। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बेहद दुर्लभ है और दुनिया भर में अब तक ऐसे केवल कुछ ही मामले दर्ज हुए हैं। बेबी स्टोन का इतना लंबा समय तक महिला के शरीर में सुरक्षित रहना एक अनोखी चिकित्सा घटना है।
लिथोपेडियन क्या है?
चिकित्सकीय भाषा में ‘लिथोपेडियन’ उस स्थिति को कहते हैं, जब गर्भावस्था के दौरान भ्रूण पेट के अंदर विकसित होता है, लेकिन खून की आपूर्ति न मिलने के कारण वह जीवित नहीं रह पाता। धीरे-धीरे शरीर उस मृत भ्रूण को कैल्शियम की परतों से ढक देता है, जिससे वह कठोर होकर पत्थर जैसा बन जाता है। यह स्थिति बेहद दुर्लभ होती है और इसे समझाने के लिए डॉक्टर अक्सर बेबी स्टोन शब्द का इस्तेमाल करते हैं।
महिला की मानसिक स्थिति और परिवार की प्रतिक्रिया
इस घटना से महिला और उसका परिवार पूरी तरह हैरान रह गया। महिला को यह जानकर गहरा धक्का लगा कि उसके पेट में पिछले 35 वर्षों से मृत भ्रूण मौजूद था। परिवार के सदस्यों के लिए भी यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। हालांकि, डॉक्टरों ने बताया कि इस बेबी स्टोन ने महिला को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाया था, लेकिन समय पर सर्जरी न होने पर यह खतरनाक साबित हो सकता था।
दुनिया भर में ऐसे कितने मामले सामने आए हैं?
इतिहास में दर्ज चिकित्सा मामलों के अनुसार, लिथोपेडियन या बेबी स्टोन के मामले बेहद कम हैं। दुनिया में अब तक केवल कुछ दर्जनों ऐसे केस मिले हैं, जहां मृत भ्रूण महिला के शरीर में पत्थर में बदल गया। सबसे पुराने केस की बात करें, तो एक महिला के पेट में 50 साल तक भ्रूण मौजूद रहा था। इस तरह के मामलों को चिकित्सा विज्ञान के लिए अध्ययन का विषय माना जाता है।
इस केस से चिकित्सा जगत ने क्या सीखा?
यह मामला चिकित्सकों के लिए भी एक बड़ा सबक है। यह इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय तक चलने वाले किसी भी पेट दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आधुनिक तकनीक और स्कैनिंग से आज ऐसे मामलों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। बेबी स्टोन का यह मामला महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने का भी काम करेगा कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना कितना जरूरी है।
महिला का सफल ऑपरेशन
डॉक्टरों की एक टीम ने महिला की सर्जरी कर इस दुर्लभ भ्रूण को बाहर निकाला। सर्जरी के बाद महिला की स्थिति स्थिर है। चिकित्सकों का कहना है कि महिला अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसका जीवन सामान्य रहेगा। इस ऑपरेशन को चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बेबी स्टोन: एक डरावनी लेकिन दुर्लभ हकीकत
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि मानव शरीर की संरचना और उसकी चिकित्सा जटिलताओं को पूरी तरह समझना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। बेबी स्टोन जैसे मामले न केवल मेडिकल साइंस के लिए अध्ययन का विषय हैं, बल्कि आम जनता के लिए यह स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश भी देते हैं।
अल्जीरिया में सामने आया यह मामला इस बात का सबूत है कि समय पर स्वास्थ्य जांच और आधुनिक तकनीक के उपयोग से ऐसे दुर्लभ मामलों का पता लगाया जा सकता है। महिला की कहानी एक चेतावनी है कि अपने शरीर के किसी भी संकेत को हल्के में न लें। बेबी स्टोन जैसी घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के लिए यह महत्वपूर्ण शोध का विषय हैं।