खेल-खेल में निगल लिए 16 चुम्बक… 48 घंटे में दो सर्जरी, डॉक्टर भी रह गए हैरान

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हाइलाइट्स

  • चुंबकीय खिलौनों का खतरा: फरीदाबाद में 3 और 4 साल के मासूम भाई-बहन की जान चुंबकीय खिलौनों से खतरे में पड़ी।
  • दोनों बच्चों ने खेल-खेल में निगल लिए कई छोटे-छोटे चुम्बक, हालत गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती।
  • 48 घंटे में डॉक्टरों ने की दो बड़ी सर्जरी, बच्चों की जान बचाई।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर बोले- चुम्बक ‘साइलेंट किलर’, माता-पिता रहें सतर्क।
  • घटना के बाद परिवार और डॉक्टरों ने खिलौनों की सुरक्षा पर उठाए सवाल।

फरीदाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां 3 और 4 साल के भाई-बहन की जान उस वक्त खतरे में पड़ गई जब उन्होंने खेल-खेल में चुंबकीय खिलौनों का खतरा अनदेखा करते हुए कई छोटे-छोटे चुम्बक निगल लिए। शुरुआत में किसी को भी इसका अंदाजा नहीं था, लेकिन बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद यह मामला उजागर हुआ। डॉक्टरों ने 48 घंटे के भीतर दोनों की कठिन सर्जरी कर जान बचाई।

कैसे हुआ हादसा: खेल-खेल में निगले चुम्बक

जानकारी के अनुसार, 3 वर्षीय प्रज्ञान और 4 वर्षीय हितांशी घर पर खेल रहे थे। उन्होंने खिलौनों के रूप में मिलने वाले छोटे-छोटे चुम्बक निगल लिए। यह घटना परिवार के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं रही। माता-पिता को इस बारे में तब पता चला जब प्रज्ञान की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसे पेट में तेज दर्द और लगातार उल्टी होने लगी।

बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां स्कैन में सामने आया कि उसकी आंतों में कई चुम्बक फंसे हुए हैं। इस सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन बड़ी बहन हितांशी को भी समान लक्षणों के कारण अस्पताल लाना पड़ा।

डॉक्टरों ने किया खुलासा: चुम्बकों ने बना दिए आंतों में छेद

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल के वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. नितिन जैन ने बताया कि प्रज्ञान के पेट में दस चुम्बक फंसे हुए थे, जिन्होंने अंदर ही अंदर आठ अलग-अलग जगहों पर आंत में छेद कर दिए थे। यही नहीं, आंत का सबसे छोटा हिस्सा डुओडेनम (Duodenum) भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

हितांशी की हालत भी गंभीर थी। उसके पेट में छह चुम्बक फंसे हुए थे, जिससे उसके पेट की गुहा में छेद हो गए और कई टिश्यूज नष्ट हो गए। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति इतनी खतरनाक थी कि तुरंत सर्जरी करना जरूरी था।

48 घंटे में हुईं दो बड़ी सर्जरी

डॉ. जैन के अनुसार, यह बाल चिकित्सा सर्जरी के सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक था। उन्होंने बताया कि बच्चों के पाचन तंत्र और डुओडेनम का पुनर्निर्माण करना पड़ा। इसके बाद उन्हें करीब दो सप्ताह तक आईसीयू में रखा गया। डॉक्टरों ने माता-पिता को आगाह किया कि चुंबकीय खिलौनों का खतरा किसी भी अन्य वस्तु की तुलना में कई गुना अधिक है।

चुंबक क्यों हैं इतने खतरनाक?

डॉक्टरों का कहना है कि एक चुम्बक अक्सर बिना किसी नुकसान के शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब कई चुम्बक निगल लिए जाते हैं, तो वे आंतों की दीवारों पर अलग-अलग जगह चिपक जाते हैं। इससे आंतों के बीच फंसी ऊतक पर रक्त की आपूर्ति रुक जाती है, जो जल्द ही गलने लगती है और आंतों में छेद हो जाते हैं। यह स्थिति सेप्सिस और जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकती है।

डॉ. जैन ने कहा, “आमतौर पर बच्चे सिक्के या बटन निगल लेते हैं, जो केवल रुकावट पैदा करते हैं। लेकिन चुम्बक अंदर ही अंदर ‘साइलेंट किलर’ की तरह नुकसान पहुंचाते हैं।”

माता-पिता ने बताई घटना की पूरी कहानी

बच्चों के माता-पिता ने बताया कि उन्होंने इन चुम्बकों वाले खिलौनों को एक बड़े ऑनलाइन ब्रांड से खरीदा था। उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि ये खिलौने इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा, “पहले हमारे छोटे बेटे की हालत बिगड़ी, हमें लगा कि यह आम पेट दर्द या कीड़ों की वजह से है। लेकिन स्कैन रिपोर्ट ने हमारी सोच बदल दी। अगले ही दिन हमारी बेटी भी बीमार पड़ गई। यह हमारे जीवन का सबसे कठिन समय था।”

अस्पताल की चेतावनी: चुंबकीय खिलौनों का इस्तेमाल बंद करें

घटना के बाद अमृता अस्पताल ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस तरह के खिलौने बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा हैं। डॉक्टरों ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों को ऐसे खिलौनों से दूर रखें और अगर बच्चा अचानक तेज पेट दर्द या उल्टी की शिकायत करे, तो तुरंत मेडिकल जांच कराएं।

विशेषज्ञों की राय

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि चुंबकीय खिलौनों का खतरा समझने की जरूरत है। इन खिलौनों में लगे छोटे-छोटे चुम्बक बच्चों के लिए किसी भी अन्य चीज से ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। दुनिया भर में कई देशों ने ऐसे खिलौनों पर पाबंदी लगा दी है, जबकि भारत में अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बनी है।

समाज के लिए सबक

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सबक है। माता-पिता को सजग रहना होगा और बच्चों के खिलौने खरीदने से पहले उनकी सुरक्षा जांचनी होगी। बच्चों की सुरक्षा केवल घरेलू सतर्कता से ही नहीं, बल्कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण से भी सुनिश्चित की जा सकती है।

फरीदाबाद की यह घटना चेतावनी है कि चुंबकीय खिलौनों का खतरा किसी भी परिवार को असहाय स्थिति में डाल सकता है। डॉक्टरों की मेहनत और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से दोनों मासूमों की जान बच गई, लेकिन हर माता-पिता को अब यह सोचने की जरूरत है कि बच्चों की जिज्ञासा और खेल के पीछे कितने खतरे छिपे हो सकते हैं।

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