रात को चैन से सोए थे… सुबह उठे ही नहीं: आखिर नींद में कैसे हो जाती है मौत? वजह जानकर कांप उठेगा दिल

Health

हाइलाइट्स

  • क्रॉनिक हार्ट फेलियर एक जानलेवा बीमारी है, जो अक्सर बिना किसी चेतावनी के शरीर को चुपचाप जकड़ लेती है
  • रात को सोते वक्त अचानक मौत का एक बड़ा कारण बन चुका है क्रॉनिक हार्ट फेलियर
  • शुरुआती लक्षणों में थकान, सूजन और सांस लेने में तकलीफ जैसे संकेत शामिल हैं
  • पुरुषों और महिलाओं दोनों में यह बीमारी एक उम्र के बाद बराबरी से देखने को मिलती है
  • समय रहते जांच, दवा और जीवनशैली में सुधार से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है

क्या है क्रॉनिक हार्ट फेलियर?

क्रॉनिक हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल अपनी सामान्य पंपिंग क्षमता खोने लगता है और शरीर को उतनी मात्रा में खून नहीं पहुंचा पाता जितनी जरूरत होती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है, और जब तक लक्षण साफ नजर आते हैं, तब तक यह शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित कर चुकी होती है। यही कारण है कि अचानक नींद में मौत की घटनाओं के पीछे यह एक बड़ा और अक्सर अनदेखा कारण बन चुका है।

कैसे काम करता है हमारा दिल, और कब होता है फेल?

दिल का मुख्य काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त खून की आपूर्ति करना है। जब क्रॉनिक हार्ट फेलियर की स्थिति उत्पन्न होती है, तो दिल की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और वह शरीर के विभिन्न हिस्सों तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंचा पातीं। इस स्थिति में शरीर में कई लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य थकावट या उम्र से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं।

शुरुआती लक्षण: अनदेखा करना पड़ सकता है भारी

क्रॉनिक हार्ट फेलियर की शुरुआती अवस्था में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • जल्दी थकान महसूस होना
  • पैरों, टखनों और पंजों में सूजन
  • रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या
  • सांस लेने में कठिनाई या सीने में भारीपन
  • अनियमित या तेज़ धड़कनें

इन लक्षणों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। इन संकेतों पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि समय रहते इलाज मिलने से इस स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सकता है।

पुरुष या महिला: किसे ज्यादा खतरा?

एक आम भ्रांति है कि क्रॉनिक हार्ट फेलियर केवल पुरुषों में ज्यादा होता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार 45 साल की उम्र तक इसका खतरा पुरुषों में अधिक होता है, जबकि 45 के बाद पुरुष और महिलाएं बराबर खतरे में होते हैं। यानी इस बीमारी से कोई भी सुरक्षित नहीं है।

क्रॉनिक हार्ट फेलियर की चार स्टेज: जानिए कौन सी सबसे खतरनाक

टाइप 1:

शुरुआत की स्टेज जिसमें केवल दवाओं और जीवनशैली के बदलाव से रोग को काबू किया जा सकता है।

टाइप 2 और 3:

इस स्टेज में दिल की कार्यक्षमता घटने लगती है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। इस स्थिति में कभी-कभी सर्जरी की आवश्यकता होती है।

टाइप 4:

यह सबसे गंभीर स्टेज होती है, जहां दिल की ताकत लगभग 85-90% तक खत्म हो जाती है। ऐसे मरीजों को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।

अगर किसी मरीज का दिल 50% तक भी कमजोर हो गया हो, तब भी समय पर इलाज और दवा से वह सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन 65% से अधिक नुकसान होने पर स्थिति बेहद जटिल हो जाती है।

क्रॉनिक हार्ट फेलियर से बचाव के उपाय

1. ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें

उच्च रक्तचाप दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे क्रॉनिक हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

2. तरल पदार्थ का सीमित सेवन

दिनभर में दो लीटर से ज्यादा लिक्विड लेने से बचें, ताकि शरीर में ब्लड वॉल्यूम ज्यादा न हो और दिल पर दबाव न पड़े।

3. नमक की मात्रा सीमित करें

अत्यधिक नमक सेवन से पानी शरीर में जमा होता है, जिससे सूजन और हृदय पर दबाव बढ़ता है।

4. धूम्रपान और शराब से दूरी

सिगरेट और अल्कोहल दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे दिल की पंपिंग क्षमता घटती है।

5. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

40 की उम्र के बाद साल में एक बार ईसीजी, ईको और ब्लड टेस्ट जरूर कराएं ताकि किसी भी प्रारंभिक समस्या का समय रहते पता चल सके।

क्यों बढ़ रही हैं नींद में मौतें?

आजकल यह देखने को मिल रहा है कि पूरी तरह फिट व्यक्ति रात को सोता है और सुबह उठता ही नहीं। जांच के बाद सामने आता है कि क्रॉनिक हार्ट फेलियर के कारण दिल ने अचानक काम करना बंद कर दिया। यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इसमें कई बार कोई चेतावनी नहीं मिलती। ऐसे मामलों में परिवार वालों को लगता है कि व्यक्ति स्वस्थ था, लेकिन हकीकत में दिल की मांसपेशियां कमजोर हो चुकी थीं और शरीर ने धीरे-धीरे जवाब देना शुरू कर दिया था।

विशेषज्ञों की राय

दिल के रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गोयल कहते हैं, “लोग थकान और सांस की दिक्कत को सामान्य समझते हैं। लेकिन जब ये लक्षण बार-बार हों, तो यह क्रॉनिक हार्ट फेलियर का इशारा हो सकता है। जितना जल्दी इसकी पहचान होगी, उतनी ही जल्दी इलाज संभव है।”

क्रॉनिक हार्ट फेलियर एक धीमा लेकिन बेहद घातक रोग है, जो व्यक्ति को बिना किसी बड़ी चेतावनी के अपनी चपेट में ले सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित जीवनशैली और सही जानकारी के माध्यम से इस बीमारी को रोका जा सकता है। जो लोग अपनी थकान, सूजन या सांस की तकलीफ को नजरअंदाज करते हैं, वे अनजाने में खुद को गंभीर खतरे में डालते हैं।

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