हाइलाइट्स
- केरल बस अश्लीलता मामला: महिला यात्री के साथ कोल्लम जिले में सार्वजनिक परिवहन में की गई शर्मनाक हरकत।
- आरोपी ने महिला की चेतावनी के बावजूद उतारे कपड़े, बस में ही करने लगा आपत्तिजनक क्रिया।
- महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए पूरी घटना का वीडियो बनाकर पुलिस को सौंपा।
- पुलिस ने 43 वर्षीय आरोपी सुनील कुमार को गिरफ्तार कर दर्ज किया गंभीर मामला।
- इस घटना ने फिर से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर खड़े किए सवाल।
सार्वजनिक परिवहन में फिर उभरा ‘सुरक्षा संकट’ का मुद्दा
कोल्लम की घटना से फिर हिला देश
केरल बस अश्लीलता की यह घटना न सिर्फ मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाएं आज भी कितनी असुरक्षित हैं। यह मामला तब सामने आया जब कोट्टियम से कोल्लम जा रही एक महिला यात्री ने बस में अपने पास बैठे व्यक्ति द्वारा की गई अश्लील हरकतों की शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित महिला का बयान हैरान कर देने वाला है। उसके अनुसार, आरोपी ने पहले उसे बार-बार घूरा, फिर धीरे-धीरे उसकी सीट के बेहद करीब आकर बैठ गया। जब महिला ने असहज महसूस करते हुए चेतावनी दी, तो आरोपी ने सारी सीमाएं पार करते हुए अपने कपड़े उतारकर बस में ही हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया।
महिला की सूझबूझ से पुलिस तक पहुंची सच्चाई
कैमरे में कैद हुआ अपराध
पीड़िता ने घबराने की बजाय अपने फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। कोल्लम ईस्ट पुलिस स्टेशन में पहुंचकर महिला ने यह वीडियो सबूत के तौर पर सौंपा। पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी में कोई देर नहीं की।
43 वर्षीय आरोपी सुनील कुमार, म्यलक्कड़ का निवासी है। उसे सोमवार को इथिक्कारा पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “वीडियो प्रमाण के आधार पर मामला बेहद गंभीर है और आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है।”
बस में मौजूद अन्य महिलाओं की भी प्रतिक्रिया
एकजुटता में दिखा आक्रोश
इस शर्मनाक घटना के समय बस में मौजूद तीन अन्य महिलाओं ने भी आरोपी के व्यवहार पर नाराजगी जताई और पीड़िता के पक्ष में पुलिस को अपने बयान दिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों में इस तरह की अश्लील हरकतें महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं और प्रशासन को ऐसी घटनाओं के खिलाफ कठोर रुख अपनाना चाहिए।
पुलिस ने जारी किया लुकआउट नोटिस
आरोपी की गिरफ्तारी में नहीं की कोई देरी
महिला की शिकायत के बाद कोल्लम ईस्ट पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया और उसे 24 घंटे के भीतर पकड़ लिया गया। इस मामले को लेकर पुलिस विभाग ने भी स्पष्ट किया कि कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता।
पुलिस ने IPC की धारा 354A, 354D और 509 के तहत मामला दर्ज किया है जो यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़ी धाराएं हैं।
केरल बस अश्लीलता ने खड़े किए बड़े सवाल
क्या महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित हैं?
यह पहली बार नहीं है जब सार्वजनिक परिवहन में केरल बस अश्लीलता जैसी घटना सामने आई हो। इससे पहले भी राज्य में कई बार इस तरह की शर्मनाक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिसमें महिलाएं शिकार बनीं।
बड़ा सवाल यह है कि इतनी तकनीकी और सामाजिक जागरूकता के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आज भी क्यों इतना लापरवाह रवैया है?
विशेषज्ञों का मानना है कि CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाने, महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और त्वरित कार्रवाई से ही ऐसे मामलों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
महिला सुरक्षा पर फिर गरमाई बहस
सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। कई महिला संगठनों ने पुलिस प्रशासन से इस घटना की तेजी से जांच और न्याय की मांग की है।
साथ ही, राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि हर सार्वजनिक परिवहन में CCTV अनिवार्य किया जाए और महिला यात्रियों के लिए विशेष हेल्पलाइन की सुविधा दी जाए।
क्या कहती है पीड़ित महिला?
‘मेरे वीडियो के बिना शायद कोई भरोसा नहीं करता’
पीड़िता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “केरल बस अश्लीलता की यह घटना मेरे लिए डरावनी थी, लेकिन मैंने तय किया कि चुप नहीं बैठूंगी। अगर मैं वीडियो रिकॉर्ड नहीं करती, तो शायद कोई मेरी बात पर विश्वास भी नहीं करता।”
उनकी यह बात इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने के लिए अक्सर सबूत की जरूरत क्यों होती है?
अब चुप रहना नहीं विकल्प है
महिला जागरूकता, प्रशासनिक कठोरता जरूरी
केरल बस अश्लीलता जैसे मामले केवल किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की चुनौती हैं। हर महिला को यह हक है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करे। ऐसे में यह प्रशासन, समाज और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि महिलाओं की गरिमा को संरक्षित रखा जाए।
सरकार को चाहिए कि वह कानून को और सख्त बनाए, त्वरित न्याय प्रणाली लागू करे और पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखते हुए उन्हें मदद दे।