VIDEO: भारत ने पाकिस्तान की मांग में भर दिया सिंदूर, अब तो पत्नी बन गया… बेनीवाल के तंज पर ठहाकों से गूंजा संसद

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हाइलाइट्स

  • ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा के दौरान हनुमान बेनीवाल के बयान ने माहौल को बना दिया मज़ेदार
  • विपक्ष ने सरकार से ऑपरेशन सिंदूर की टाइमिंग और रणनीति पर उठाए सवाल
  • बेनीवाल बोले – भारत ने पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भर दिया, अब तो सिर्फ विदाई बाकी है
  • पूरे सदन में सांसदों की हंसी रोकना हुआ मुश्किल, मेघवाल और चंद्रशेखर भी हंसी नहीं रोक सके
  • बेनीवाल ने कहा – सेना के सम्मान में रात 12 बजे तक भी बैठेंगे, जवानों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर गरमागरम बहस, बीच में छाया ठहाकों का सन्नाटा

संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का माहौल बना हुआ है। सोमवार रात ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जब लोकसभा में बहस छिड़ी तो मुद्दा गंभीर था, लेकिन नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल की शैली ने पूरे सदन को ठहाकों से भर दिया।

ऑपरेशन सिंदूर, जिसे पाकिस्तान पर किए गए विशेष कार्रवाई के रूप में देखा गया, उस पर बेनीवाल ने ऐसा व्यंग्य किया कि सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के सांसद हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।

क्या है ऑपरेशन सिंदूर और क्यों उठा सवाल?

22 अप्रैल को भारतीय सीमा पर एक गंभीर आतंकी घटना हुई थी। इसके जवाब में भारत ने 8 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। यह ऑपरेशन दो दिन तक चला और मीडिया में यह दावा किया गया कि पाकिस्तान “घुटनों पर” आ गया है।

लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस ऑपरेशन की घोषणा में देर क्यों हुई और इसके परिणाम कितने ठोस रहे, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जहां सरकार इसे बड़ी कूटनीतिक और सैन्य सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे एक “नाटकीय स्टंट” कहकर कटघरे में खड़ा कर रहा है।

“भारत ने पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भर दिया” – बेनीवाल का तंज

हनुमान बेनीवाल ने जब अपने चुटीले अंदाज़ में ऑपरेशन सिंदूर पर तंज कसना शुरू किया, तो उनकी बात ने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। उन्होंने कहा—

“सरकार कह रही है कि पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भर दिया, तो अब तो पाकिस्तान भारत की पत्नी हो गया। अब सिर्फ विदाई बाकी है।”

उनकी यह बात सुनते ही सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही पक्षों के सांसद अपनी हंसी रोक नहीं सके। अर्जुन मेघवाल और चंद्रशेखर तक हंसी में शामिल हो गए।

धार्मिक प्रतीकों का दिलचस्प इस्तेमाल

बेनीवाल यहीं नहीं रुके, उन्होंने हिंदू धर्म में सिंदूर के महत्व की व्याख्या करते हुए कहा—

“हमारे धर्म में सिंदूर का मतलब होता है पति की लंबी उम्र की कामना। जब भारत ने पाकिस्तान के अंदर ऑपरेशन किया और उसका नाम सिंदूर रखा, तो यह सीधा संकेत है कि भारत अब उसका पति हो गया। फिर तो विदाई भी करनी पड़ेगी।”

उनका यह बयान भले ही व्यंग्य था, लेकिन इसमें सांस्कृतिक संकेतों और युद्धनीति का अनोखा मिश्रण था।

रात 12 बजे तक सेना के सम्मान में बैठेंगे

जब बेनीवाल का भाषण तय समय से ज्यादा होने लगा तो स्पीकर की ओर से संकेत मिला कि उनका समय समाप्त हो गया है। इस पर उन्होंने कहा—

“आप 10.30 बजे बुला रहे हो, जबकि खबर अखबार में छपनी नहीं है। अब तो सोशल मीडिया से ही काम निकालना पड़ेगा। अगर हम यहां बैठे हैं, तो इसका मतलब है कि हम मजबूत लोग हैं और सेना के सम्मान में रात 12 बजे तक भी बैठ सकते हैं।”

ऑपरेशन सिंदूर पर उनका यह बयान भी चर्चाओं में आ गया कि सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए संसद को हर समय सजग रहना चाहिए।

गंभीर मुद्दों के बीच हंसी का हल्का स्पर्श

सदन में गंभीर बहसों के दौरान जब कभी कोई सांसद अपनी बात को व्यंग्य के साथ रखता है, तो वह चर्चा का केंद्र बन जाता है। बेनीवाल की बातों से जहां हंसी का माहौल बना, वहीं इससे एक गंभीर संदेश भी निकला—सरकार को हर सैन्य कार्रवाई की पारदर्शिता और टाइमिंग पर जवाब देना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि रणनीतिक संवाद का हिस्सा है। उसे तर्क और जवाबदेही के दायरे में लाना जरूरी है।

विपक्ष के सवाल और सरकार की चुप्पी

विपक्ष ने सरकार से पूछा कि—

  • ऑपरेशन सिंदूर की योजना किस स्तर पर बनाई गई थी?
  • इसमें सेना की भूमिका क्या थी और क्या यह सेना की पहल थी या सरकार की?
  • क्या इस ऑपरेशन के बाद कोई रणनीतिक लाभ हुआ?

सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक बयान बहुत सीमित रहा है, जिससे विपक्ष को हमले का मौका मिल गया है।

 क्या ऑपरेशन सिंदूर एक प्रतीकात्मक युद्ध है?

हनुमान बेनीवाल का बयान चाहे जितना चुटीला और व्यंग्यपूर्ण रहा हो, लेकिन उसमें ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीति और उसकी राजनीतिक प्रस्तुति को उजागर कर दिया है।

जहां एक तरफ सरकार इसे बड़ी सफलता मानती है, वहीं विपक्ष इसे “पब्लिक रिलेशन ऑपरेशन” करार दे रहा है।

अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले दिनों में सरकार इसके और पहलुओं पर रोशनी डालेगी या यह केवल लोकसभा में ठहाकों तक सीमित रह जाएगा।

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