हाइलाइट्स
- कांवड़ियों की मौत से बाबा नगरी देवघर में पसरा मातम
- मोहनपुर के जमुनिया मोड़ पर बस और ट्रक में जबरदस्त टक्कर
- 20 से अधिक घायल, कुछ की हालत बेहद गंभीर
- श्रावण मास में दर्शन को आए श्रद्धालुओं की अधूरी रह गई आस्था
- पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद, जांच के आदेश जारी
देवघर हादसा: आस्था की राह पर 18 कांवड़ियों की मौत
झारखंड के देवघर जिले में मंगलवार की सुबह जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ 18 परिवारों को उजाड़ दिया बल्कि पूरे देश में कांवड़ियों की मौत को लेकर गहरी चिंता और पीड़ा पैदा कर दी। बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक की पवित्र मुराद लेकर आए ये श्रद्धालु इस दुनिया से विदा हो गए।
हादसा कैसे हुआ?
हादसा सुबह करीब 4:30 बजे मोहनपुर थाना क्षेत्र के जमुनिया मोड़ पर हुआ। 32 सीटों वाली बस में सवार सभी कांवड़िए बिहार से बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे थे। सामने से आ रहा एक ट्रक, जो गैस सिलेंडरों से भरा था, अनियंत्रित होकर बस से टकरा गया।
टक्कर इतनी भयानक थी कि बस के परखच्चे उड़ गए। कांवड़ियों की मौत मौके पर ही हो गई और चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत मोहनपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया।
घायलों की हालत गंभीर, अस्पतालों में अफरा-तफरी
इस दर्दनाक हादसे में 20 से अधिक कांवड़िए घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों की एक टीम मोहनपुर सीएचसी और देवघर सदर अस्पताल में लगातार निगरानी में जुटी है। कांवड़ियों की मौत के बाद घायलों के परिवार भी सदमे में हैं।
देवघर जिला प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची भेजने की तैयारी की जा रही है।
झारखंड के देवघर में एक बस और ट्रक की टक्कर ने 18 कांवड़ियों की ज़िंदगी छीन ली। ये सभी श्रद्धालु बिहार से बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल चढ़ाने आए थे।
📍 हादसा कैसे हुआ?
मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे मोहनपुर थाना क्षेत्र के जमुनिया मोड़ पर यह भीषण दुर्घटना हुई। 32 सीटों वाली बस,… pic.twitter.com/uXakqlMwHC— TRUE STORY (@TrueStoryUP) July 29, 2025
श्रद्धा पर भारी पड़ी मौत की साज़िश?
श्रावण मास में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन का महत्व बहुत बड़ा है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने आते हैं। लेकिन इस बार कांवड़ियों की मौत ने इस पावन यात्रा को सवालों के घेरे में डाल दिया है। क्या यह हादसा सिर्फ संयोग था, या लापरवाही और नियमों की अनदेखी इसकी वजह बनी?
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हादसे के बाद प्रशासन पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
- क्या मोहनपुर थाना क्षेत्र में सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं थी?
- गैस सिलेंडरों से भरा ट्रक इतनी रफ्तार में कैसे चल रहा था?
- क्या बस चालक की भी कोई गलती थी?
कांवड़ियों की मौत के बाद अब इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। देवघर एसपी ने मौके पर पहुंचकर जांच के आदेश दिए हैं।
चश्मदीद बोले – “एक पल में सब खत्म हो गया”
घटना के प्रत्यक्षदर्शी सुरेश यादव बताते हैं –
“हम लोग गा रहे थे, जयकारे लगा रहे थे, तभी एक तेज़ रफ्तार ट्रक सामने से आया और बस में घुस गया। एक पल में चारों तरफ खून और चीखें थीं। कांवड़ियों की मौत ऐसे होगी, कोई सोच भी नहीं सकता।”
जिन्दगी का आखिरी सफर बन गई बाबा की यात्रा
श्रद्धालु जिन रास्तों से हर साल सुरक्षित बाबा के दर्शन कर लौटते हैं, वही राह इस बार कांवड़ियों की मौत की गवाह बन गई। कई मृतकों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वे पहली बार बाबा की नगरी आए थे।
सावधानी के अभाव में टूटती जानें
हर साल श्रावण मास में बढ़ती भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए प्रशासन विशेष इंतजाम करता है, लेकिन इस बार कांवड़ियों की मौत यह साबित करती है कि कहीं न कहीं लापरवाही जरूर रही।
ट्रैफिक कंट्रोल, फिक्स रूट, और बसों की चेकिंग जैसे इंतजामों में कमी ने इस हादसे को जन्म दिया।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांवड़ियों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा:
“देवघर में हुए सड़क हादसे से बेहद आहत हूं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।”
सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।
शवों की पहचान और अंतिम संस्कार की तैयारी
18 मृतकों की शिनाख्त कर ली गई है, जिनमें से 12 बिहार के और 6 झारखंड के रहने वाले हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके परिवारों से संपर्क किया जा रहा है।
बाबा बैद्यनाथ के नाम से निकले कांवड़ियों की मौत अब एक पीड़ा बनकर रह गई है।
हादसे से सबक: नियमों की सख्ती ज़रूरी
यह हादसा केवल कांवड़ियों की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही की मौत भी है। यदि समय रहते ट्रक ड्राइवर की स्पीड, बस की स्थिति, और रूट मैप पर प्रशासन की सतर्कता होती, तो शायद ये 18 जानें बचाई जा सकती थीं।
श्रद्धा के नाम पर लापरवाही कब तक?
श्रद्धा में शक्ति होती है, लेकिन व्यवस्था के अभाव में वही श्रद्धा मौत का कारण बन जाती है। देवघर हादसे में कांवड़ियों की मौत हम सबके लिए एक चेतावनी है—कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा अब नारे नहीं, ठोस एक्शन से तय होनी चाहिए।