किसने की मां से बेवफाई? रामनगरी में रात के अंधेरे में बुजुर्ग को यूं छोड़कर गायब हुए परिजन!

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हाइलाइट्स

  •  Abandoned Elderly Woman की खबर ने अयोध्या समेत पूरे देश को किया स्तब्ध
  • ई-रिक्शा से लाई गई महिला को किशन दासपुर के पास सुनसान सड़क पर छोड़कर भागे परिजन
  • पूरी घटना CCTV में कैद, दो लोग महिला को छोड़ते दिखे
  • स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस कर रही है महिला की शिनाख्त
  • संवेदनहीनता की हदें पार, मानवता पर फिर उठे सवाल

अयोध्या, जिसे लोग मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी के नाम से जानते हैं, वहां एक Abandoned Elderly Woman की दर्दनाक कहानी ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक बुजुर्ग महिला को उसके ही परिजन देर रात सुनसान सड़क पर किशन दासपुर इलाके में छोड़कर फरार हो गए। पूरी घटना एक पास लगे CCTV कैमरे में कैद हुई है, जिसे देखकर किसी का भी दिल कांप उठे।

कब और कहां हुई यह घटना?

यह घटना सोमवार देर रात की है, जब स्थानीय लोगों ने किशन दासपुर के पास एक बुजुर्ग महिला को बेसहारा हालत में बैठे देखा। महिला न तो सही से बोल पा रही थी, न ही अपनी पहचान बता पा रही थी। आसपास लगे CCTV कैमरे की फुटेज खंगालने पर सामने आया कि दो युवक एक ई-रिक्शा से महिला को लाए और सड़क किनारे छोड़कर भाग गए।

CCTV Footage से सामने आई क्रूरता की सच्चाई

❝ई-रिक्शा से लाए, उतारा और चले गए❞

CCTV फुटेज में साफ दिखाई देता है कि एक ई-रिक्शा महिला को लेकर आता है। दो लोग महिला को सहारा देकर नीचे उतारते हैं और कुछ पल रुकने के बाद उसे वहीं छोड़कर चले जाते हैं। यह दृश्य Abandoned Elderly Woman की बेबसी और अपनों की बेरुखी का सबसे कड़वा सबूत है।

पुलिस का बयान और कार्रवाई

कोतवाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों की शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कोतवाल अजय यादव ने बताया,
“महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही है। उन्होंने अपना नाम या पता नहीं बताया है। फुटेज से दो युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।”

पुलिस ने महिला को अस्थायी रूप से स्थानीय वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया है और चिकित्सकीय जांच भी कराई गई है।

रिश्तों की टूटती डोर और समाज की उदासीनता

Abandoned Elderly Woman की यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं है, यह उस बढ़ती हुई संवेदनहीनता का उदाहरण है जो आजकल रिश्तों को भी बोझ मानने लगी है।

बुजुर्गों को छोड़ने की घटनाएं अब नई नहीं रहीं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल हजारों बुजुर्ग देशभर में परिजनों द्वारा त्याग दिए जाते हैं। इनमें से ज्यादातर को मानसिक या शारीरिक असमर्थता के कारण बोझ समझा जाता है।

स्थानीय लोगों की भूमिका: मानवता अभी बाकी है

जब महिला को वहां बैठे देखा गया तो कुछ राहगीरों ने न सिर्फ पुलिस को सूचना दी बल्कि उसे पानी और खाना भी दिया।

स्थानीय निवासी रामबाबू शुक्ला ने बताया,
“यह दृश्य देख आंखें भर आईं। हमने तुरंत 112 नंबर पर कॉल किया और पुलिस आई।”

इस घटना में Abandoned Elderly Woman की मदद करने वाले लोगों ने यह साबित किया कि समाज में अभी भी कुछ लोग मानवता के मूल्यों को समझते हैं।

सरकारी तंत्र और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल

जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं तो प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और एनजीओ की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

क्या हमारे पास कोई ऐसी प्रणाली नहीं है जहां बुजुर्गों को आश्रय और सम्मानजनक जीवन मिल सके? क्या समाज केवल त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में ही बुजुर्गों की पूजा करता है और बाकी समय उन्हें अकेला छोड़ देता है?

अध्यात्म की धरती पर रिश्तों का पतन

अयोध्या जैसे धार्मिक शहर में जहां श्रवण कुमार की कथा लोगों को भावविभोर करती है, वहां एक Abandoned Elderly Woman की कहानी सबसे बड़ा विरोधाभास बन जाती है। यह केवल एक महिला की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन की गवाही है।

हमारा कर्तव्य: बुजुर्गों को न छोड़ें

यह जरूरी है कि समाज में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता लाई जाए।

  • परिवारों को बच्चों को सिखाना होगा कि मां-बाप को बोझ नहीं बल्कि आशीर्वाद समझा जाए।
  • प्रशासन को बुजुर्गों के लिए सुरक्षित आश्रय और काउंसलिंग सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • मीडिया को इन घटनाओं को उजागर कर समाज को जागरूक करना चाहिए।

 यह केवल खबर नहीं, चेतावनी है

Abandoned Elderly Woman की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। यह खबर केवल रिपोर्ट नहीं, समाज को आइना दिखाने वाली चेतावनी है।

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