तीन महिलाएं विधानसभा के सामने खुद को आग लगाने आईं, पर पुलिस ने ठीक वक्त पर रोक लिया – बाराबंकी से जुड़ा है पूरा राज़!

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हाइलाइट्स 

  • Lucknow Suicide Attempt की कोशिश कर रहीं तीन महिलाओं को पुलिस ने मौके पर पकड़ा
  • बाराबंकी से आई थीं तीनों महिलाएं, गंभीर आरोपों के साथ करने जा रही थीं आत्मदाह
  • विधानसभा मार्ग पर आग लगाने के लिए लाई गई थीं ज्वलनशील वस्तुएं
  • हजरतगंज पुलिस कर रही है पूछताछ, वजहों पर सस्पेंस बरकरार
  • महिला आयोग और उच्च प्रशासन ने भी लिया संज्ञान, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

तीनों महिलाओं का आत्मदाह प्रयास: राजधानी में मचा हड़कंप

लखनऊ में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब विधानसभा मार्ग पर Lucknow Suicide Attempt की एक बड़ी घटना होते-होते टल गई। बाराबंकी जिले से आईं तीन महिलाएं राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाके में आत्मदाह करने के इरादे से पहुंचीं। ज्वलनशील तरल पदार्थ से भरी बोतलें, माचिस, और उनकी चीखें पुलिस की नजर में आ गईं, जिसके बाद घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत हरकत में आकर उन्हें रोक लिया।

घटना का समय और स्थान

यह Lucknow Suicide Attempt सोमवार सुबह लगभग 11:30 बजे हुआ, जब विधानभवन के ठीक सामने तीन महिलाएं अचानक भीड़ के बीच अपने कपड़ों में आग लगाने की तैयारी करने लगीं। मौके पर मौजूद कुछ मीडिया कर्मी और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हरकत में आकर उन्हें रोका।

विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास करना केवल आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि यह एक प्रकार का प्रतीकात्मक विरोध भी माना जा रहा है।

कौन हैं ये महिलाएं और क्यों उठाया ये कदम?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये तीनों महिलाएं बाराबंकी जिले के जैदपुर थाना क्षेत्र की निवासी हैं। इनमें से एक महिला ने बताया कि उनके गांव में दबंगों द्वारा उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया गया है और प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।

इन महिलाओं ने बताया कि उन्होंने जिला अधिकारी, थानाध्यक्ष, और तहसील प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में वे लखनऊ पहुंचीं ताकि सरकार का ध्यान उनकी समस्या की ओर दिलाया जा सके।

पुलिस की मुस्तैदी से बची जान

हजरतगंज कोतवाली के पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए इन महिलाओं को आत्मदाह से पहले ही रोक लिया। पुलिस ने तुरंत तीनों को हिरासत में लेकर हजरतगंज थाने में पूछताछ शुरू कर दी है। मौके से ज्वलनशील पदार्थ, माचिस, और कुछ लिखित शिकायत पत्र भी बरामद किए गए हैं।

एसएचओ हजरतगंज ने मीडिया को बताया कि, “हम पूरी संवेदनशीलता के साथ इस मामले की जांच कर रहे हैं। महिला आयोग को भी सूचना दे दी गई है। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग भी कराई जाएगी।”

क्या यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है?

इस Lucknow Suicide Attempt की घटना ने एक बार फिर से प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि महिलाओं की बात सत्य है और वास्तव में उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का मामला बनता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब जनता की आवाज़ सरकारी दफ्तरों में दबा दी जाती है, तो ऐसे कदम उठाना ही उनकी आखिरी उम्मीद बन जाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

विधानसभा भवन के पास आत्मदाह की कोशिश के बाद भी किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल या विधायक ने इस मुद्दे पर बयान नहीं दिया है। यह चुप्पी खुद एक सवाल बन गई है। क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव के दौरान ही सक्रिय रहना है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Lucknow Suicide Attempt जैसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं, क्योंकि जनता यदि न्याय की उम्मीद में खुद को आग के हवाले करने को मजबूर हो जाए, तो यह न केवल संवेदनशीलता की कमी है, बल्कि शासन की असफलता भी है।

महिला आयोग और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की चेयरपर्सन विमला बाथम ने घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि, “हमें जानकारी मिली है और हम इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। यदि महिलाओं की बात सही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मानवाधिकार संगठन People’s Justice Front ने इस Lucknow Suicide Attempt को ‘State Ignorance Crisis’ करार दिया है।

मामले में आगे की कार्रवाई

हजरतगंज पुलिस इन महिलाओं के दावों की सत्यता की जांच में जुटी है। जिलाधिकारी बाराबंकी से संपर्क कर केस संबंधित फाइलें मंगवाई गई हैं। वहीं, पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं यह मामला किसी राजनीतिक या सामाजिक संगठन द्वारा प्रेरित तो नहीं था।

अभी तक किसी महिला के खिलाफ कोई कानूनी केस दर्ज नहीं हुआ है। प्राथमिक जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।

Lucknow Suicide Attempt की यह घटना उस व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है, जिसमें पीड़ित नागरिक को अपनी पीड़ा जताने के लिए खुद को आग लगाने जैसे खतरनाक कदम उठाने पड़ते हैं। ये महिलाएं बच गईं, लेकिन सवाल बचा है – क्या अब सरकार उनकी सुनेगी?

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