हाइलाइट्स
- रामपुर में Child Abuse in India का दिल दहला देने वाला मामला, जहां बाप ने 8 महीने के बच्चे को उल्टा लटकाया
- 2 लाख रुपये और कार की मांग को लेकर पत्नी पर बनाया जा रहा था दबाव
- दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से टूट चुकी थी पत्नी
- गर्मी में मासूम को धूप में गांव-भर घुमाकर दिखाया गया बर्बर चेहरा
- पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर शुरू की जांच, बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान
रामपुर में दिल दहला देने वाला मामला: जब बाप बन गया हैवान
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यह मामला Child Abuse in India की भयावह तस्वीर को सामने लाता है, जहां एक सगे बाप ने अपने 8 महीने के मासूम बेटे को उल्टा लटका कर गांव भर में घुमाया, वो भी केवल इस वजह से कि उसकी पत्नी ने दहेज देने से इनकार कर दिया।
यह घटना समाज में फैले Child Abuse in India की गंभीरता को उजागर करती है, जहां मासूमों की तकलीफें दबा दी जाती हैं और अपराधी खुलेआम घूमते हैं।
क्या है पूरा मामला: दहेज, प्रताड़ना और हैवानियत की दास्तान
दहेज की मांग बना वजह
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, संजू कुमार नामक युवक ने अपनी पत्नी से शादी के कुछ महीनों बाद ही 2 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग शुरू कर दी थी। जब पत्नी ने अपने मायके से यह रकम और कार मंगाने से मना कर दिया, तो संजू ने उसकी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी।
मासूम को बनाया गुस्से का शिकार
घटना वाले दिन संजू कुमार का पत्नी से एक बार फिर झगड़ा हुआ। इसके बाद संजू ने 8 महीने के मासूम बच्चे को टांगों से पकड़ कर उल्टा लटका दिया और पूरे गांव में चिलचिलाती धूप में उसे लेकर घूमता रहा। यह घटना Child Abuse in India के क्रूरतम उदाहरणों में एक मानी जा सकती है।
गांव वालों में मचा हड़कंप
जब संजू ने मासूम को इस तरह से लटकाकर गांव में घुमाना शुरू किया, तो लोग पहले इसे कोई मजाक समझ बैठे। लेकिन जब बच्चे के रोने की आवाज और उसके चेहरे की हालत देखी, तब लोगों को सच्चाई समझ में आई। कई ग्रामीणों ने तुरंत इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे यह मामला तेजी से वायरल हो गया।
पुलिस की कार्रवाई और बाल संरक्षण आयोग की दखलअंदाजी
आरोपी गिरफ्तार
वीडियो वायरल होने के बाद रामपुर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए संजू कुमार को तत्काल गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, 323, 506 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित रूप से मां को सौंप दिया है।
बाल आयोग का हस्तक्षेप
Child Abuse in India की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है और जिला प्रशासन से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
मनोवैज्ञानिकों की राय: यह सिर्फ हिंसा नहीं, एक चेतावनी है
बच्चे पर असर
मनोचिकित्सक डॉ. अनुराग त्रिपाठी का कहना है कि “बच्चे पर इस घटना का गहरा मानसिक प्रभाव पड़ सकता है। इतनी छोटी उम्र में इस तरह की हिंसा उसके मानसिक विकास को बाधित कर सकती है।”
समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता
विशेषज्ञों का मानना है कि Child Abuse in India केवल एक आपराधिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक असंवेदनशीलता का भी प्रमाण है। जब एक पिता ही अपने बच्चे को प्रताड़ित करने लगे, तो यह पारिवारिक संरचना पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
दहेज और बाल हिंसा: दोहरी मार
भारत में दहेज प्रथा अभी भी कई घरों को तबाह कर रही है। Child Abuse in India की घटनाओं में अक्सर देखा गया है कि बच्चे माता-पिता के झगड़ों का सबसे बड़ा शिकार बनते हैं। इस मामले में भी पिता ने अपने क्रोध और लालच का निशाना उस मासूम को बनाया, जो न तो बोल सकता है, न भाग सकता है।
सरकार से क्या है अपेक्षा?
- सख्त कानून का पालन:
यह ज़रूरी है कि Child Abuse in India से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय और कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। - जनजागरूकता अभियान:
ग्रामीण क्षेत्रों में दहेज प्रथा और बाल हिंसा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाएं। - बाल कल्याण समितियों की सक्रियता:
हर जिले में बाल सुरक्षा समितियां बनाए जाएं जो ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लें।
क्या अब भी खामोश रहेंगे हम?
रामपुर की यह घटना एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई एक सभ्य समाज में रहते हैं? Child Abuse in India अब एक गुप्त समस्या नहीं, बल्कि एक खुला जख्म बन चुकी है जिसे नजरअंदाज करना आत्मघाती है।
बच्चा चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, उसकी सुरक्षा और मानसिक शांति का अधिकार सबसे ऊपर है। अगर हम आज नहीं बोले, तो कल शायद और भी कई संजू मासूमों को उल्टा लटकाकर सड़कों पर घुमाते रहेंगे — और हम केवल कैमरे से वीडियो बनाते रहेंगे।