हाइलाइट्स
- • Ambedkar Statue तोड़कर नाले में फेंकने से कोड़ापुर गांव में तनाव, भारी पुलिस बल तैनात
- • ग्रामीणों ने मो. इश्तियाक, मोहर्रम अली व मो. आलम पर Ambedkar Statue विरोध और तोड़फोड़ का लगाया आरोप
- • प्रशासन ने दूसरी Ambedkar Statue शाम तक लगाने का दिया भरोसा; शांति समिति सक्रिय
- • डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत—Ambedkar Statue विवाद “पर सख़्त कानूनी कार्रवाई होगी”, प्राथमिकी दर्ज
- • सोशल मीडिया पर Ambedkar Statue प्रकरण की गूंज; दलित संगठनों ने प्रदेश‑व्यापी प्रदर्शन की चेतावनी
घटना का संक्षिप्त विवरण
प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र के कोड़ापुर गांव में रविवार‑सोमवार की दरमियानी रात कुछ अराजक तत्वों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की Ambedkar Statue को चबूतरे से उखाड़कर नाले में फेंक दिया। सुबह पहली किरण के साथ प्रतिमा का सिर विखंडित अवस्था में दिखा तो गांव में कोहराम मच गया। देखते‑देखते दलित समाज के लोग, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि और महिलाएँ सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा हो गए और “पहले गिरफ़्तारी, फिर प्रतिमा‑स्थापना” के नारे लगाते हुए मुख्य सड़क जाम कर दी। (Amar Ujala)
Ambedkar Statue विवाद की पृष्ठभूमि
कोड़ापुर में यह Ambedkar Statue गत वर्ष अक्टूबर में दलित युवाओं ने चंदा इकट्ठा कर लगाई थी। तभी से कुछ लोगों ने “सरकारी अनुमति नहीं” का हवाला देते हुए इसे हटाने की माँग की थी। पंचायत बैठकों में बहस हुई, पर समाधान नहीं निकला। बीती रात हुई तोड़फोड़ उसी विवाद की भयावह परिणति मानी जा रही है। दलित नेताओं का कहना है कि Ambedkar Statue किसी भी बहाने से हटाना बहुजन सम्मान का हनन है; इसलिए वे प्रतीकात्मक नहीं, “स्थायी न्याय” चाहते हैं।
घटनाक्रम: Ambedkar Statue तोड़कर नाले में फेंकने की पूरी कहानी
ग्राम प्रहरी की ड्यूटी पर तैनात रामऔतार ने पुलिस को बताया कि रात लगभग 2:30 बजे ट्रैक्टर की आवाज़ सुनाई दी। संदेह पर बाहर निकले तो दो‑तीन लोग अँधेरे में खेत की ओर भागते दिखे। Ambedkar Statue को पहले हथौड़े से तोड़ा गया और ट्रॉली में लादकर नाले पर फेंका गया। सुबह 6 बजे जब महिलाएँ पानी भरने निकलीं तो टूटी प्रतिमा देखकर मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच व प्राथमिकी
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि Ambedkar Statue प्रकरण में धारा 295‑A, 153‑A व 427 के तहत केस दर्ज हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल से ठोस हथौड़ा, एक रस्सी और मिट्टी में फँसे ट्रैक्टर टायर के निशान जुटाए हैं। फ़ॉरेंसिक टीम ने नाले से प्रतिमा के टुकड़े निकाले, जिन्हें सबूत के तौर पर सील किया गया।
#प्रयागराज में फूलपुर थाने के कोड़ापुर गांव में अंबेडकर प्रतिमा तोड़ कर नाले में फेंकी गयी
ग्रामीणों ने गांव के मो.इश्तियाक, मोहर्रम अली, मो. आलम पर प्रतिमा तोड़ने का लगाया आरोप, पुलिस में दी तहरीर
ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी गांव में आंबेडकर प्रतिमा लगाने का कर रहे थे विरोध… pic.twitter.com/j7h1j2PXbP
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) July 21, 2025
आरोपी कौन? – ग्रामीणों के आरोप
गांव के रामकरन पासवान का कहना है कि मो. इश्तियाक, मोहर्रम अली और मो. आलम ने पहले ही पंचायत में Ambedkar Statue लगाने का विरोध किया था। तीनों के विरुद्ध तहरीर दी गई, लेकिन अभी गिरफ़्तारी नहीं हुई है। पुलिस का तर्क है—“सबूत पुख़्ता किए बिना गिरफ़्तारी गांव का माहौल और बिगाड़ सकती है।”
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: दूसरी Ambedkar Statue लगाने का आश्वासन
जिलाधिकारी संजय खरे ने दोपहर बाद कोड़ापुर पहुँचकर कहा, “शाम छह बजे तक नई Ambedkar Statue स्थापित हो जाएगी। दोषियों के खिलाफ संदेश जाएगा कि संविधान निर्माता का अपमान बर्दाश्त नहीं।” उन्होंने सामुदायिक भवन में 14 फीट ऊँचा पक्का चबूतरा बनवाने और सीसीटीवी लगाने की घोषणा भी की।
कानून‑व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती
घटना के बाद कोड़ापुर में पाँच थानों की फोर्स, पीएसी की दो कंपनियाँ और दंगा‑नियंत्रण वाहन तैनात किए गए। संवेदनशील गलियों में पैरामेडिक्स और फ़ायर ब्रिगेड की टीम भी मौजूद रही। प्रशासन ने गाँव और आसपास के 12 किमी क्षेत्र में धारा 144 लागू करते हुए पाँच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
Ambedkar Statue विवाद पर बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स (पूर्व ट्वीटर) पर लिखा—“दलित सम्मान का प्रतीक Ambedkar Statue गिराना सभ्य समाज पर धब्बा है; यूपी सरकार तुरन्त गिरफ्तारी करे।” समाजवादी पार्टी ने इसे “कानून‑व्यवस्था की विफलता” बताया, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा के प्रवक्ता ने “षड्यंत्र” कहकर जल्दी निष्कर्ष न निकालने की सलाह दी।
दलित संगठनों की चेतावनी
भीम आर्मी के राज्य संयोजक कमलेश आनंद ने चेताया कि यदि 48 घंटे में दोषी नहीं पकड़े गए तो पूरे प्रयागराज में Ambedkar Statue के नीचे क्रमिक अनशन किया जाएगा। संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं से “शांतिपूर्ण, लेकिन मुखर” विरोध का आह्वान किया है।
सोशल मीडिया पर Ambedkar Statue विवाद की गूंज
कुछ ही घंटों में #AmbedkarStatueJustice हैशटैग पर 1.2 लाख से ज़्यादा पोस्ट हो गए। वायरल वीडियो में युवा “जय भीम” के नारे लगाते दिखे, जबकि कुछ यूज़र्स ने 10 जून 2025 को मिर्ज़ापुर में हुई समान घटना का लिंक साझा कर कड़ी कार्रवाई की माँग दोहराई।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में Ambedkar Statue के इर्द‑गिर्द होने वाली तोड़फोड़ की घटनाएँ केवल क़ानून‑व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि समाज में निहित जातीय तनाव का सूचक हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा‑वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक तनवर कहते हैं, “Ambedkar Statue पर हमला संविधान पर हमला है; इसे विस्तृत सामाजिक संवाद से ही रोका जा सकता है।”
कोड़ापुर कांड ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि Ambedkar Statue सिर्फ़ धातु या पॉलि‑रेज़ीन का पिंड नहीं, करोड़ों लोगों के स्वाभिमान का प्रतीक है। जब तक प्रशासन दोषियों को जेल नहीं भेजता और सामाजिक समरसता की ठोस पहलकदमी नहीं होती, तब तक कोई भी नई Ambedkar Statue मनों बोझ लिए खड़ी रहेगी।