मुसलमान की मौत भी तब तक मुकम्मल नहीं जब तक चार औरतें विधवा न हों – मौलाना का शर्मनाक तर्क

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हाइलाइट्स

  • “viral video” में मौलाना ने कहा—मरने से पहले चार महिलाओं को विधवा बनाना है।
  • सोशल मीडिया पर लोगों ने मौलाना को जमकर ट्रोल किया, हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने की आलोचना।
  • वीडियो में मौलाना ने 72 हूरों की ख्वाहिश को लेकर भी दिया विवादित बयान।
  • कई यूजर्स ने मौलाना को “मदरसे का बेकार प्रोडक्ट” तक कह डाला।
  • यह “viral video” पाकिस्तान के समा टीवी चैनल के एक शो का हिस्सा है, जिसमें मुफ्ती तारिक मसूद ने यह बयान दिया।

 “viral video” कैसे बना चर्चा का केंद्र?

पाकिस्तान के एक टीवी शो में मौलाना मुफ्ती तारिक मसूद ने ऐसा बयान दिया जिसने इंटरनेट पर आग लगा दी। इस “viral video” में मौलाना कहते हैं:

“मैं जब मरूंगा तो चार को विधवा बनाकर जाऊंगा। अगर चार औरतें विधवा नहीं हुईं तो यह मेरी बेइज्जती है।”

इस बयान ने न केवल पाकिस्तान बल्कि भारत में भी लोगों को हैरान कर दिया। वीडियो को इंस्टाग्राम पर @deepika_kajal_f3 नामक अकाउंट से शेयर किया गया है और लाखों बार देखा जा चुका है।

 मौलाना का पूरा बयान: मजाक या मानसिकता?

 72 हूरों की ख्वाहिश

वीडियो में एंकर ने मौलाना से पूछा—“क्या आपको जन्नत में 72 हूरों की चाहत है या आपकी चार बीवियां ही काफी हैं?”
मौलाना ने जवाब दिया:

“अगर कहूं कि हूरें चाहिए तो घरवाले कहेंगे चार बीवियां काफी नहीं थीं? और अगर कहूं कि नहीं चाहिए तो ऊपर अल्लाह कहेगा—तूने तो दुनिया में ही कह दिया था कि चार ही काफी हैं।”

इस गोलमोल जवाब के बाद मौलाना ने कहा कि वह इस सवाल का जवाब नहीं देंगे क्योंकि वह दुनिया और जन्नत दोनों जगह फंस सकते हैं।

 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

 यूजर्स की नाराज़गी

इस “viral video” पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ प्रमुख टिप्पणियां:

  • “चार बीवियों के बाद भी 72 हूरें चाहिए? कोई सीमा नहीं इनकी इच्छाओं की।”
  • “काम ऐसा करो कि हर धर्म के लोग मिलकर गाली दें।”
  • “मदरसे का बेकार प्रोडक्ट है ये।”

 मीम्स और ट्रोलिंग

वीडियो पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। कुछ यूजर्स ने मौलाना को “रंगीला बाबा” कहा, तो कुछ ने लिखा—“बेशर्मी की हद है।”

 क्या कहती है समाजशास्त्रीय दृष्टि?

धार्मिक व्याख्या बनाम व्यक्तिगत सोच

धार्मिक ग्रंथों में बहुविवाह की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई है, लेकिन मौलाना का बयान इसे हास्यास्पद बना देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के “viral video” धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं।

 मानसिकता का सवाल

मौलाना का बयान केवल मजाक नहीं, बल्कि एक सोच को दर्शाता है—जहां महिलाओं को केवल संख्या के रूप में देखा जाता है। यह “viral video” इस मानसिकता को उजागर करता है जो समाज में असमानता को बढ़ावा देती है।

 मीडिया की भूमिका

टीवी शो की जिम्मेदारी

यह “viral video” पाकिस्तान के समा टीवी चैनल के एक शो का हिस्सा है। सवाल उठता है कि क्या ऐसे बयान को प्रसारित करना सही था? क्या मीडिया को ऐसे कंटेंट को रोकना चाहिए जो सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है?

“viral video” से क्या सीख?

यह “viral video” केवल एक मजाकिया बयान नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करता है। मौलाना का बयान महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण, धार्मिक व्याख्या और मीडिया की जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने से पहले हमें यह सोचने की ज़रूरत है कि क्या हम ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं जो समाज को बांटता है या जोड़ता है।

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