VIDEO: एक बोरी खाद के लिए लाइन में लगे थे किसान, मिली सिर्फ लाठी और लानतें — वीडियो देख उबल जाएगा खून

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Table of Contents

हाइलाइट्स

  • Fertilizer Shortage को लेकर किसानों का आक्रोश, लाइन में लगने के बावजूद नहीं मिला खाद
  • लखीमपुर के शंकरपुर समिति में एक बोरी खाद के लिए किसानों ने सड़क पर दिया धरना
  • पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए किया लाठीचार्ज, कई किसान घायल
  • प्रशासन का दावा—जिले में Fertilizer Shortage नहीं, भरपूर मात्रा में उपलब्ध
  • मंत्री के बयान और ज़मीनी हकीकत में साफ दिखा फर्क, वीडियो हुआ वायरल

माँगी थी खाद, मिल गई लाठियां! लखीमपुर में ‘Fertilizer Shortage’ पर किसानों पर टूटा कहर

 किसानों के सब्र का इम्तहान बना ‘Fertilizer Shortage’

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के शंकरपुर कृषि समिति पर बुधवार सुबह का नज़ारा बेहद चिंताजनक था। सैकड़ों किसान एक बोरी Fertilizer के लिए तड़के से ही लाइन में लगे हुए थे। धूप में तपते किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें आज जरूरी खाद मिल जाएगा। लेकिन जब घंटों इंतजार के बाद भी Fertilizer Shortage के चलते सप्लाई नहीं मिली, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।

किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू किया। जब प्रशासन ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो बात नहीं बनी और पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना ने प्रदेशभर में खलबली मचा दी है।

खेतों की नहीं, अब पीठों की दरकार!

खाद नहीं, लाठियां पड़ीं

Fertilizer Shortage का यह मामला उस वक्त और तूल पकड़ गया जब किसानों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह बुजुर्ग किसानों को भी नहीं बख्शा गया। कुछ किसान लाठी लगने से ज़मीन पर गिर पड़े, कईयों को चोटें आईं।

किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद के लिए एक दिन पहले से टोकन कटवा रखा था। फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस Fertilizer Shortage के लिए वे सीधे तौर पर प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं।

कहां गई खाद? सवालों में उलझा प्रशासन

मंत्री ने किया था पर्याप्त आपूर्ति का दावा

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही कृषि मंत्री ने मीडिया को बयान दिया था कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा था कि सभी समितियों को पर्याप्त मात्रा में Fertilizer भेज दी गई है।

लेकिन शंकरपुर समिति के हालात इस बयान को पूरी तरह झुठला रहे हैं। वहां किसानों को Fertilizer Shortage के कारण घंटों खड़ा रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। यह मामला अब सरकार की कार्यशैली और जमीनी सच्चाई के बीच के फर्क को उजागर कर रहा है।

वायरल वीडियो ने खोली पोल

किसानों की लाचारी बनी तमाशा

लाठीचार्ज की घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किसान शांतिपूर्वक सड़क पर धरने पर बैठे थे। महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। अचानक पुलिस आई और डंडे बरसाने लगी।

Fertilizer Shortage के खिलाफ यह प्रदर्शन अब एक मानवाधिकार के सवाल में बदलता जा रहा है। किसान संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की सफाई: “गलतफहमी का नतीजा”

अधिकारी बोले—खाद का ट्रक रास्ते में था

प्रशासन की ओर से दी गई सफाई में कहा गया है कि Fertilizer Shortage की खबरें भ्रामक हैं। जिस समय किसान धरने पर बैठे थे, उसी वक्त खाद से भरा ट्रक समिति के लिए रवाना हो चुका था।

पुलिस के लाठीचार्ज पर प्रशासन ने कहा कि किसानों को सड़क से हटाने के लिए “मामूली बल प्रयोग” किया गया था, लेकिन वीडियो में जो दृश्य सामने आए हैं, वह सरकार की “मामूली” की परिभाषा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।

किसानों की पीड़ा: “अब तो सरकार भी पीठ दिखा रही है”

चुनाव से पहले ही बढ़ा असंतोष

उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटना राजनीतिक रूप से भी काफी अहम हो जाती है। Fertilizer Shortage से परेशान किसान सरकार से नाराज़ हैं।

प्रभावित किसानों का कहना है कि अगर उन्हें खेती के सबसे बुनियादी संसाधन—खाद—ही नहीं मिल रही, तो फसल कैसे होगी? और जब पेट में अनाज नहीं होगा, तो लोकतंत्र में वोट किस बात का?

खाद वितरण प्रणाली में खामियां

पोर्टल, टोकन और ब्लैक मार्केटिंग

किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि खाद वितरण के पोर्टल पर टोकन की व्यवस्था सिर्फ दिखावे की है। बहुत सारे किसान तो बिना टोकन लिए ही खाद ले जाते हैं—क्योंकि कर्मचारी मनमानी करते हैं। Fertilizer Shortage के पीछे काला बाजारी का भी अंदेशा जताया जा रहा है।

स्थानीय दुकानदारों पर आरोप है कि वे सरकारी समितियों से खाद खरीदकर महंगे दामों पर काले बाजार में बेच देते हैं। यह स्थिति तभी सुधरेगी जब सरकार ज़मीनी स्तर पर पारदर्शी निगरानी प्रणाली लागू करे।

विपक्ष का हमला: “भाजपा सरकार ने किसानों को ठगा”

राजनीति हुई तेज़

घटना पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और रालोद नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि Fertilizer Shortage पर किसानों की पिटाई “कृषि विरोधी मानसिकता” की परिचायक है।

उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभी किसानों को मुफ्त में खाद दी जाए।

समाधान नहीं, सिर्फ बयानबाज़ी

Fertilizer Shortage को लेकर यह कोई पहली घटना नहीं है। लेकिन हर बार यही होता है—पहले वादा, फिर इनकार, और अंत में बयानबाज़ी।

किसान आज भी इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब खाद का नहीं—इंसाफ का।

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