हाइलाइट्स
- ADM Santosh Bahadur Singh ने सांसद इकरा हसन को कार्यालय से निकाला
- छुटमलपुर नगर पंचायत की अध्यक्षा शमा परवीन भी थीं मौजूद
- ADM ने पहले विपक्षी और मुस्लिम पहचान के आधार पर रौब दिखाया
- मीडिया के सवालों पर ADM Santosh Bahadur Singh ने पलट दी पूरी कहानी
- वायरल वीडियो के बाद मामले ने पकड़ा तूल, राजनीतिक हलकों में हलचल
ADM Santosh Bahadur Singh बनाम सांसद इकरा हसन: एक प्रशासनिक तानाशाही की तस्वीर?
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ADM Santosh Bahadur Singh और सपा सांसद इकरा हसन के बीच तीखी बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि ADM साहब ने खुद को “स्वतंत्र” घोषित करते हुए सांसद को कार्यालय से बाहर निकाल दिया। पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और अब यह मामला न सिर्फ राजनीतिक, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
घटनाक्रम: “यह कार्यालय मेरा है, आप बाहर जाइए”
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सांसद इकरा हसन और छुटमलपुर नगर पंचायत की अध्यक्षा शमा परवीन किसी प्रशासनिक समस्या के समाधान हेतु ADM Santosh Bahadur Singh से मिलने पहुँचीं।
लेकिन बातचीत के दौरान ADM का रवैया बेहद असहयोगात्मक और अपमानजनक रहा।
उन्होंने सीधे शब्दों में कहा— “यह कार्यालय मेरा है… मैं स्वतंत्र हूं… मेरे मन में जो आएगा, मैं वो करूंगा… आप बाहर जाइए।”
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ADM Santosh Bahadur Singh visibly गुस्से में सांसद को निर्देश दे रहे हैं कि वह कार्यालय छोड़ दें।
क्या मुस्लिम पहचान बनी ADM के व्यवहार की वजह?
सांसद इकरा हसन और उनके समर्थकों का आरोप है कि ADM Santosh Bahadur Singh ने उनकी मुस्लिम और विपक्षी पहचान के आधार पर यह व्यवहार किया।
सांसद का कहना है कि वह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और जनता की समस्याएं लेकर प्रशासन के पास पहुँचना उनका संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने सवाल उठाया कि—
“अगर एक सांसद के साथ ऐसा सलूक हो सकता है, तो आम जनता को कौन सुनता होगा?”
वायरल वीडियो ने प्रशासन की कलई खोल दी
ADM Santosh Bahadur Singh का यह बयान कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में ADM सांसद को कड़े लहजे में डांटते, और उनकी बातों को अनसुना करते नजर आते हैं।
विपक्ष ने इस घटना को ‘प्रशासनिक तानाशाही’ करार देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
यहां से बाहर निकलिए… कार्यालय मेरा है…मेरे मन में जो आएगा मैं वो करने के लिए स्वतंत्र हूं,
इन शब्दों के साथ ADM सन्तोष बहादुर सिंह ने सांसद इकरा हसन को कार्यालय से बाहर निकाल दिया,
इकरा हसन के साथ छुटमलपुर नगर पंचायत की अध्यक्षा शमा परवीन भी थी,
पहले तो ADM साहब ने मुस्लिम… pic.twitter.com/ku91nu89hA
— Saba Khan (@sabakhan21051) July 16, 2025
ADM Santosh Bahadur Singh का यू-टर्न
जब मीडिया ने ADM Santosh Bahadur Singh से इस मामले में सवाल किया तो उन्होंने खुद को बचाते हुए कहा कि—
“मैंने किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया। सांसद जी को कोई असुविधा नहीं हुई।”
उन्होंने वायरल वीडियो को “संदर्भ से काटा गया” बताया और कहा कि पूरे दृश्य को गलत तरीके से पेश किया गया है।
कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया:
सपा प्रवक्ताओं ने इस घटना को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि—
“यह केवल इकरा हसन की नहीं, पूरे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेइज्जती है।”
कानूनी जानकारों की राय:
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ADM Santosh Bahadur Singh द्वारा सांसद को कार्यालय से बाहर निकालना संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के विरुद्ध है, जो जनप्रतिनिधियों को विशेषाधिकार देता है।
इस घटना के गहरे सामाजिक संकेत
यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी और सांसद के बीच का टकराव नहीं है।
बल्कि यह उस मानसिकता को उजागर करता है जो आज भी जाति, धर्म और राजनीतिक पक्षपात के आधार पर प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित करती है।
जहाँ एक ओर ADM Santosh Bahadur Singh जैसे अधिकारी खुद को कानून से ऊपर मानते हैं, वहीं दूसरी ओर जनता के प्रतिनिधियों को भी बार-बार अपमान का सामना करना पड़ता है।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर लोग दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं:
- कुछ लोग ADM Santosh Bahadur Singh को ‘साहसी अधिकारी’ कह रहे हैं, जो राजनेताओं की दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं करता।
- वहीं दूसरी ओर, लोग यह भी पूछ रहे हैं कि— “क्या यही लोकतंत्र है जहाँ एक महिला सांसद को बेइज्जती झेलनी पड़े?”
अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सांसद इकरा हसन ने पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से करने की बात कही है।
राजनीतिक हलकों में भी यह मामला जोर पकड़ रहा है और आगामी विधानमंडल सत्र में इसे उठाए जाने की संभावना है।
ADM का यह रवैया लोकतंत्र की सेहत के लिए कितना खतरनाक?
ADM Santosh Bahadur Singh का यह व्यवहार एक गंभीर चेतावनी है कि सत्ता का केंद्रीकरण और “मैं ही कानून हूं” जैसी सोच लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर सकती है।
सांसद इकरा हसन के साथ जो हुआ, वह किसी एक दल की नहीं, बल्कि हर भारतीय जनप्रतिनिधि की अस्मिता से जुड़ा मामला है।
लोकतंत्र में प्रशासन और राजनीति को संतुलन के साथ चलना होता है, न कि टकराव के साथ।