हाइलाइट्स
- Climate Change in Pakistan अब राष्ट्रीय सुरक्षा से भी बड़ा संकट बन चुका है, लेकिन सरकार और सेना बेखबर
- पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को देश के अस्तित्व के लिए ‘सबसे बड़ा खतरा’ बताया
- लाहौर और कराची जैसे शहरों में मौसम के पैटर्न में असामान्य बदलाव
- कृषि, जल आपूर्ति और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है जलवायु संकट का सीधा असर
- विशेषज्ञों ने चेताया, ‘अब नहीं चेते तो पाकिस्तान एक जलवायु आपदा बन सकता है’
पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन: अस्तित्व पर संकट के बादल
पाकिस्तान एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां Climate Change in Pakistan किसी भी युद्ध या आतंकवाद से कहीं बड़ा खतरा बन चुका है। इस्लामाबाद से लेकर लाहौर और कराची तक, मौसम की अनिश्चितता और तापमान में हो रहे असामान्य उतार-चढ़ाव ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान की सत्ता और सैन्य व्यवस्था वर्षों से भारत को सबसे बड़ा खतरा मानती रही है, लेकिन अब विशेषज्ञों की मानें तो Climate Change in Pakistan असली दुश्मन बन चुका है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: भारत नहीं, जलवायु परिवर्तन है असली दुश्मन
इस्लामाबाद के पत्रकार फ़रहान बुखारी ने हाल ही में कहा कि, “पाकिस्तानी सेना और सरकार ने दशकों तक भारत को एक सैन्य खतरे के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन अब सच्चाई यह है कि Climate Change in Pakistan उस खतरे से कहीं बड़ा है।”
उन्होंने पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब के बयान का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि, “जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या वृद्धि हमारे देश के लिए अस्तित्व का संकट है।” उनका यह बयान भारत से झड़प के दो महीने बाद आया, जिससे स्पष्ट है कि अब भी देश का ध्यान सही दिशा में केंद्रित नहीं हो पा रहा है।
मौसम में दिख रहे खतरनाक बदलाव
सर्दियों में गर्मी और मानसून का समय से पहले आना
पाकिस्तान के कई हिस्सों में सर्दियों के मौसम में गर्मी देखी गई। लाहौर जैसे शहर में मानसून की बारिश सामान्य समय से पहले शुरू हो गई, जिससे Climate Change in Pakistan के गंभीर प्रभाव सामने आए।
इस परिवर्तन का असर कृषि पर भी देखा गया है। गेहूं और चावल जैसी फसलों की बुवाई और कटाई के समय में बदलाव हुआ है, जिससे उत्पादन में गिरावट आई है।
जल संकट और बाढ़ का बढ़ता खतरा
Climate Change in Pakistan के कारण देश को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है—एक ओर सूखा और दूसरी ओर विनाशकारी बाढ़। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में जलस्रोत तेजी से सूखते जा रहे हैं, वहीं पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में अचानक आने वाली बाढ़ें जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण ने खोली पोल
पाकिस्तान को गिनाया गया सबसे संवेदनशील देशों में
वर्ष 2024-25 के पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि Climate Change in Pakistan देश के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सर्वेक्षण के अनुसार:
- पाकिस्तान वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 1% से भी कम योगदान देता है
- फिर भी जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित शीर्ष 10 देशों में शामिल है
- मौसम की चरम घटनाएं – जैसे लू, बाढ़, सूखा – आम हो गई हैं
यह रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि अगर पाकिस्तान ने अब भी कदम नहीं उठाए, तो आगे चलकर यह संकट विकराल रूप ले सकता है।
सरकार और सेना का लापरवाह रवैया
जहां दुनिया के देश जलवायु संकट से लड़ने के लिए ठोस नीति बना रहे हैं, वहीं पाकिस्तान की सरकार और सेना अब भी इस मसले पर चुप हैं। प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ और जनरल असीम मुनीर की टीम इस मुद्दे पर ज़्यादा गंभीर नहीं दिख रही।
पाकिस्तान में Climate Change in Pakistan को लेकर कोई स्पष्ट दीर्घकालिक रणनीति या ठोस नीतिगत ढांचा सामने नहीं आया है। न ही जलवायु अनुकूलन के लिए कोई वित्तीय संसाधन पर्याप्त रूप से आवंटित किए गए हैं।
आम लोगों पर सीधा असर
किसान हो रहे प्रभावित
पंजाब और सिंध के हजारों किसान मौसम की मार से त्रस्त हैं। अनियमित बारिश और तापमान में असामान्यता के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान कर्ज़ में डूब रहे हैं और आत्महत्या के मामले भी बढ़े हैं।
पानी और स्वास्थ्य सेवाएं संकट में
जलवायु परिवर्तन के कारण पेयजल स्रोत सूख रहे हैं, जिससे जनस्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है। दूषित पानी और गर्मी से संबंधित बीमारियां जैसे दस्त, डेंगू और हीट स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ी हैं।
क्या है समाधान?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नीति की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, Climate Change in Pakistan से लड़ने के लिए निम्नलिखित कदम अनिवार्य हैं:
- राष्ट्रीय जलवायु नीति को प्रभावी बनाना
- कृषि में जलवायु अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देना
- जनजागरूकता अभियान चलाना
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना
- जलवायु आपदाओं से बचाव के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण
अब नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी
Climate Change in Pakistan अब सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, यह एक सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संकट बन चुका है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह देश को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर ले जाएगा।
भारत, बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देश इस दिशा में पहले ही कई सकारात्मक पहल कर चुके हैं। अब पाकिस्तान के लिए भी यह आवश्यक है कि वह जलवायु परिवर्तन को ‘भारत से बड़ा खतरा’ मानते हुए उस पर त्वरित और ठोस कार्यवाही करे।