हाइलाइट्स
- Kanwar Yatra Violence को लेकर मेरठ पुलिस की FIR सोशल मीडिया पर बनी चर्चा का विषय
- पुलिस ने अज्ञात कांवड़ियों पर दर्ज किया मामला, जबकि घटनास्थल पर मौजूद थे अधिकारी
- वायरल वीडियो में SI गौरव कुमार घायलों को मरहम-पट्टी कराते दिख रहे हैं
- स्थानीय लोग बोले- “सब कुछ कैमरे में है, फिर भी ‘अज्ञात’ क्यों?”
- FIR की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर खड़े हुए कई सवाल
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में कांवड़ यात्रा के दौरान Kanwar Yatra Violence का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दीवान पब्लिक स्कूल की बस पर हुए हमले में जब पुलिस ने FIR दर्ज की तो पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन एफआईआर के विवरण ने सबको चौंका दिया।
दरअसल, घटना के बाद जो एफआईआर दर्ज की गई, उसमें पुलिस ने हमलावरों को ‘अज्ञात’ बताया है। जबकि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी खुद हमलावर युवकों को मरहम-पट्टी कराते नजर आ रहे हैं।
क्या है पूरी घटना?
पिछले सप्ताह मेरठ के दीवान पब्लिक स्कूल की एक बस छात्रों को लेकर स्कूल जा रही थी। तभी कांवड़ यात्रा मार्ग पर कुछ युवकों ने अचानक बस को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवकों ने यह आरोप लगाया कि बस का हॉर्न उनके धार्मिक जुलूस में बाधा पहुंचा रहा है। मामला इतना बढ़ गया कि कांवड़ियों ने बस पर पथराव कर दिया और तोड़फोड़ की।
इस Kanwar Yatra Violence की वजह से बस में बैठे बच्चों और शिक्षकों में डर का माहौल बन गया। कई बच्चे बुरी तरह सहम गए, और दो स्टाफ को हल्की चोटें भी आईं।
पुलिस की प्रतिक्रिया और FIR पर सवाल
घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस अधिकारी SI गौरव कुमार खुद ही कुछ युवकों को मेडिकल सहायता दिलवाते हुए दिख रहे हैं। लेकिन जब FIR की प्रति सामने आई, तो उसमें अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
इससे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि जब पुलिस खुद घटनास्थल पर मौजूद थी और घायल युवकों को पहचान भी रही थी, तो FIR में उन्हें ‘अज्ञात’ क्यों लिखा गया?
UP क़े मेरठ में दीवान पब्लिक स्कूल की बस में कांवडियो द्वारा की गई तोड़फोड़ क़े मामले में पुलिस ने ज़ो FIR दर्ज की है … वह सोशल मीडिया की सुर्खिया बन गई है।
दरअसल पुलिस विभाग क़े SI गौरव कुमार ने अज्ञात लोगो पर FIR लिखाई है। जबकि मौक़े पर खुद पुलिस अधिकारी इस युवको को मरहम… pic.twitter.com/rFnHrDtvup
— TRUE STORY (@TrueStoryUP) July 15, 2025
सोशल मीडिया पर बवाल
Kanwar Yatra Violence की यह FIR अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या धार्मिक कारणों से FIR में जानबूझकर ढील दी जा रही है? ट्विटर पर कई यूजर्स ने लिखा, “अगर यही काम किसी दूसरे समुदाय ने किया होता तो अब तक गिरफ्तारी हो चुकी होती।”
फेसबुक पर भी वीडियो वायरल है, जिसमें SI गौरव कुमार युवकों को मरहम लगवाते दिखते हैं। लोगों का कहना है कि अगर आरोपी ‘अज्ञात’ थे, तो SI उन्हें पहचानकर क्यों इलाज करवा रहे थे?
FIR की भाषा और तथ्यों में विसंगति
FIR में यह दर्ज है कि कुछ अज्ञात कांवड़ियों ने बस पर हमला किया। लेकिन FIR दर्ज करने वाले अधिकारी खुद घटनास्थल पर थे। यह विरोधाभास पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
Kanwar Yatra Violence जैसे संवेदनशील मुद्दे पर यदि पुलिस तथ्यों को दबा रही है या गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है, तो यह कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
प्रशासन की चुप्पी और लोगों का गुस्सा
मेरठ प्रशासन अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दे पाया है। स्कूल प्रबंधन ने भी मीडिया से दूरी बना रखी है, शायद प्रशासन के दबाव में। लेकिन स्थानीय लोगों में रोष है। वे बार-बार पूछ रहे हैं कि CCTV फुटेज और वीडियो के बावजूद FIR में ‘अज्ञात’ कैसे?
कई अभिभावकों ने स्कूल बस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है।
क्या है कानून का पक्ष?
भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 427 और 336 जैसी धाराएं इस घटना पर लागू हो सकती थीं। लेकिन FIR में केवल 147 और 427 का जिक्र है। इसका अर्थ यह हुआ कि पुलिस ने जानबूझकर गंभीर धाराएं नहीं लगाईं।
Kanwar Yatra Violence जैसे मामलों में अगर निष्पक्ष जांच नहीं होगी तो इससे कानून व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास कमजोर पड़ेगा।
क्या न्याय मिलेगा?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा? क्या ‘अज्ञात’ का खेल हमेशा की तरह इस बार भी जिम्मेदारी से बच निकलने का रास्ता बन जाएगा?
यह मामला सिर्फ मेरठ का नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि अगर कानून को आस्था या दबाव के आगे कमजोर किया जाएगा तो न्याय की अवधारणा ही खोखली हो जाएगी।