पत्नी के मायके जाने के बाद टूटा संतुलन, शराब के नशे में पिता ने उठाया घिनौना कदम, मासूम बेटी बनी हैवानियत की शिकार

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हाइलाइट्स

– बलात्कार के मामले में उत्तर प्रदेश की अदालत ने आरोपी पिता को 20 साल की कठोर सजा सुनाई।

– अदालत ने आरोपी पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, अन्यथा 6 महीने की अतिरिक्त सजा होगी।

– पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न, गाली-गलौज और धमकाने के आरोप साबित हुए।

– आरोपी नशे की हालत में था जब उसने अपनी ही 13 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया।

– पीड़िता ने अपनी मौसी को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला सामने आया।

 पिता को 20 साल की सजा: मामले की पूरी जानकारी

 अदालत का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक बलात्कार मामले में आरोपी पिता को 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में पिता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसे 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अगर आरोपी जुर्माना नहीं भर पाता है, तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

 क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी अनुराग (नाम बदला हुआ) की पहली पत्नी की 2010 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली। उसकी पहली पत्नी से एक 13 वर्षीय बेटी थी, जिसे उसकी मौसी ने पाल-पोसकर बड़ा किया ताकि उसके साथ कोई दुर्व्यवहार न हो। हालाँकि, बाद में आरोपी ने जबरदस्ती अपनी बेटी को वापस अपने घर ले आया।

 नशे में धुत पिता ने किया बलात्कार

2019 में, आरोपी की अपनी दूसरी पत्नी से तीखी लड़ाई हुई, जिसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर मायके चली गई। उसी रात, आरोपी नशे में घर लौटा और अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ करने लगा। जब लड़की ने विरोध किया और चिल्लाई, तो उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था। नशे की हालत में आरोपी ने अपनी ही बेटी के साथ बलात्कार किया।

 मौसी ने कराया केस दर्ज

घटना के बाद पीड़िता ने अपनी मौसी को सारी बात बताई। मौसी ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोपी के खिलाफ मुकदमा चला। पुलिस ने जाँच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

 अदालत का सख्त रुख: कानून की मजबूती

 POCSO एक्ट के तहत सजा

यह मामला बलात्कार और यौन शोषण के अंतर्गत आता है, जिसमें पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धाराएँ लागू होती हैं। अदालत ने आरोपी को धारा 376 (बलात्कार), 506 (धमकी) और POCSO एक्ट के तहत दोषी करार दिया। इस फैसले से समाज में एक स्पष्ट संदेश गया है कि नाबालिगों के साथ यौन हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

 समाज के लिए चेतावनी

यह मामला न केवल एक पिता की क्रूरता को उजागर करता है, बल्कि समाज में बढ़ रहे बलात्कार और यौन हिंसा के मामलों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और कड़ी सजा ही अपराधियों को रोक सकती है।

न्याय की जीत

इस मामले में अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। चाहे अपना हो या पराया, बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वालों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। पीड़िता को न्याय मिला है, लेकिन समाज को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूक होना होगा।

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