ये 5 चीज़ें मर्दों को बना रही हैं नपुंसक! पुरुष प्रजनन क्षमता बचानी है तो आज से शुरू करें ये 4 ज़रूरी काम

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Table of Contents

हाइलाइट्स

  • Male fertility पर बुरा असर डाल रही हैं ये 5 आम आदतें, जिनसे पुरुष अनजाने में खुद को कर रहे हैं नुकसान
  • तेज़ी से घट रही पुरुषों की शुक्राणु गुणवत्ता, ICMR और WHO की रिपोर्ट में जताई गई चिंता
  • मोबाइल, तंग कपड़े, और शराब जैसे कारकों का सीधा संबंध male fertility से
  • विशेषज्ञों ने सुझाए 4 आसान उपाय जिससे प्रजनन क्षमता को किया जा सकता है पुनर्जीवित
  • male fertility पर जागरूकता बढ़ाना अब समय की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुका है

इन 5 कारणों से पुरुष बन रहे हैं नपुंसक, Male Fertility बचानी है तो आज से ही करें ये 4 काम

नई दिल्ली। वर्तमान समय में पुरुषों की प्रजनन क्षमता यानी male fertility एक गंभीर संकट से गुजर रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान  परिषद (ICMR) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 40 वर्षों में पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में लगभग 50% की गिरावट आई है।

इस समस्या का प्रमुख कारण बदलती जीवनशैली, खान-पान की खराब आदतें, और तकनीक का अंधाधुंध उपयोग है। यदि समय रहते चेतावनी न ली जाए, तो आने वाले वर्षों में यह संकट जनसंख्या असंतुलन तक पहुंच सकता है।

क्या है Male Fertility और क्यों हो रही है इसकी गिरावट?

Male Fertility की परिभाषा

Male fertility उस क्षमता को कहते हैं जिसके द्वारा कोई पुरुष सफलतापूर्वक संतान उत्पन्न कर सकता है। यह मुख्यतः शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

गिरावट के पीछे कारण

  • हार्मोनल असंतुलन
  • शुक्राणु निर्माण में बाधा
  • ऑक्सीडेटिव तनाव
  • DNA डैमेज
  • जीवनशैली संबंधी विकल्प

ये 5 चीजें सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं Male Fertility को

1. मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली रेडिएशन

आजकल अधिकतर पुरुष घंटों तक मोबाइल या लैपटॉप गोद में रखकर उपयोग करते हैं। इससे निकलने वाली हीट और रेडिएशन शुक्राणुओं को नष्ट कर सकती है।

विशेषज्ञ चेतावनी: मोबाइल को जेब में न रखें और लैपटॉप को गोद में रखकर इस्तेमाल करने से बचें।

2. तंग कपड़े पहनना

टाइट अंडरगारमेंट्स या जीन्स पहनने से अंडकोष में तापमान बढ़ जाता है, जो male fertility को प्रभावित करता है।

उपाय: ढीले और सांस लेने योग्य कपड़े पहनना बेहतर होता है।

3. अत्यधिक शराब और धूम्रपान

शराब और सिगरेट दोनों ही टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर को गिराते हैं और शुक्राणुओं की संख्या में कमी लाते हैं।

ध्यान दें: नियमित सेवन से शुक्राणु विकृत हो सकते हैं जिससे गर्भधारण की संभावना घटती है।

4. तनाव और नींद की कमी

तनाव सीधे तौर पर हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ता है। नींद की कमी से भी मेल हार्मोन घट सकते हैं, जिससे male fertility पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

5. जंक फूड और पोषण की कमी

पैकेज्ड, तेलीय और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाते हैं जिससे शुक्राणु गुणवत्ता घटती है।

अगर Male Fertility को बचाना है तो तुरंत अपनाएं ये 4 उपाय

1. एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार

शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने के लिए विटामिन C, विटामिन E, जिंक, और सेलेनियम युक्त भोजन लें।

शामिल करें: अमरूद, अनार, पालक, बादाम, अखरोट, अंडे और साबुत अनाज।

2. नियमित व्यायाम और योग

शारीरिक सक्रियता से टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ता है और शुक्राणु गुणवत्ता में सुधार होता है।

योगासन: भुजंगासन, शीर्षासन और सर्वांगासन male fertility के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

3. डिजिटल डिटॉक्स और स्क्रीन टाइम सीमित करें

मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाएं, खासकर सोते समय। रेडिएशन से शरीर और हार्मोन दोनों प्रभावित होते हैं।

4. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें

ध्यान, प्राणायाम और समय पर नींद लेने से तनाव कम होता है। बेहतर मानसिक स्वास्थ्य = बेहतर प्रजनन क्षमता।

विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?

डॉ. रितेश मेहता, एंड्रोलॉजिस्ट

“अब male fertility सिर्फ प्राइवेट चिंता नहीं रही, यह एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बन चुकी है। यदि हम अभी नहीं चेते, तो भविष्य में बांझपन सामान्य बात हो जाएगी।”

डॉ. सुषमा शर्मा, गायनोकोलॉजिस्ट

“अक्सर महिलाएं ही जांच करवाती हैं, जबकि 40% मामलों में समस्या पुरुषों की होती है। male fertility पर खुलकर बातचीत जरूरी है।”

भारत में बढ़ रहा है बांझपन: आंकड़े क्या कहते हैं?

  • हर 6 में से 1 दंपति को संतान होने में कठिनाई
  • पुरुष बांझपन के मामले पिछले दशक में दोगुने
  • महानगरों में male fertility से जुड़ी समस्याएं अधिक
  • अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है

अब चुप रहना नहीं, चेतना है ज़रूरी

Male fertility अब केवल चिकित्सा क्षेत्र का मुद्दा नहीं रह गया है, यह सामाजिक और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा मामला बन चुका है। आज का युवा वर्ग अगर अपनी आदतों में बदलाव नहीं करता, तो कल की पीढ़ी संकट में पड़ सकती है।

समय आ गया है कि हम नपुंसकता को केवल शर्म और संकोच का विषय मानने की बजाय, उसे समझें और उस पर खुलकर चर्चा करें।

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