हाइलाइट्स
- Missionary School Controversy ने झारखंड के लातेहार जिले को झकझोर कर रख दिया है
- हिंदू छात्राओं ने स्कूल के शिक्षक (फादर) पर अश्लील हरकतों का लगाया गंभीर आरोप
- शिक्षिकाओं ने शिकायत के बावजूद छात्राओं से मांगे सबूत, कार्रवाई नहीं की
- ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला पहुंचा पुलिस और जिला प्रशासन तक
- बच्चियों की सुरक्षा पर उठे सवाल, मिशनरी स्कूलों की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में
लातेहार, झारखंड — एक मिशनरी स्कूल से जुड़ी Missionary School Controversy ने पूरे झारखंड को सकते में डाल दिया है। लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित एक प्रतिष्ठित मिशनरी स्कूल की हिंदू छात्राओं ने अपने शिक्षक, जोकि “फादर” के रूप में वहां कार्यरत हैं, पर अश्लील हरकतें करने और आपत्तिजनक तरीके से छूने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस घटना ने केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की सामाजिक और धार्मिक चेतना को हिला दिया है। शिकायत करने पर शिक्षकों ने उल्टे छात्राओं से ही सबूत मांगने की मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी, जिससे मामला और गहराता चला गया।
घटना का खुलासा कैसे हुआ?
बच्चियों ने हिम्मत दिखाई, किया खुलकर विरोध
लातेहार के इस मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाली आठवीं और नौवीं कक्षा की कई छात्राओं ने बताया कि फादर लंबे समय से उन्हें अकेले में बुलाकर छूने की कोशिश करते थे और कई बार दोहरे अर्थ वाले अश्लील इशारे करते थे। जब इन छात्राओं ने अपनी आपबीती अन्य शिक्षकों से साझा की, तो बजाय कार्रवाई करने के, शिक्षिकाओं ने उनसे कहा—”सबूत है तो दो, वरना हम कुछ नहीं कर सकते।”
माता-पिता और ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
छात्राओं की आपबीती सुनकर अभिभावकों और ग्रामीणों में रोष फैल गया। बड़ी संख्या में लोग स्कूल के बाहर इकट्ठा हो गए और Missionary School Controversy पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। पुलिस और जिला प्रशासन को बुलाया गया।
क्या कहते हैं स्थानीय अधिकारी?
प्रशासन ने शुरू की जांच
महुआडांड़ थाने के प्रभारी ने मीडिया को जानकारी दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी फादर से पूछताछ जारी है और छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई नहीं होगी।
Hindu girls alleged that a father (teacher) at a missionary school in Latehar, Jharkhand, engaged in obscene acts and inappropriate touching with students.
When they complained to other teachers, the teachers asked for proof from the Hindu girls instead of taking any action. pic.twitter.com/U64FJeb4Sh
— Treeni (@TheTreeni) July 13, 2025
बाल संरक्षण आयोग की भी एंट्री
Missionary School Controversy के मीडिया में आने के बाद बाल संरक्षण आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए स्थानीय अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मिशनरी स्कूलों में बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल
धार्मिक भेदभाव का भी आरोप
हिंदू छात्राओं के परिजनों ने यह आरोप लगाया है कि मिशनरी स्कूलों में धर्म विशेष के बच्चों के साथ भेदभाव किया जाता है। यहां तक कि कई बार जबरन ईसाई प्रार्थनाएं करने और क्रॉस पहनने का दबाव भी डाला जाता है।
Missionary School Controversy के बहाने एक बार फिर इन संस्थानों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
स्कूल प्रशासन का पक्ष
आरोपी शिक्षक को ‘प्रतीक्षा’ पर रखा गया
स्कूल की प्रधानाचार्या ने कहा कि शिकायत गंभीर है, लेकिन उन्हें फादर की ऐसी किसी हरकत पर पहले कभी संदेह नहीं हुआ। फिलहाल आरोपी शिक्षक को छुट्टी पर भेज दिया गया है और जब तक जांच पूरी नहीं होती, वह स्कूल में उपस्थित नहीं रहेंगे।
छात्राओं की मानसिक स्थिति बेहद खराब
मनोवैज्ञानिक सहायता की मांग
Missionary School Controversy में सामने आई बच्चियों ने बताया कि उन्हें स्कूल जाने से डर लगने लगा है। परिवारजन चाहते हैं कि उन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट मिले ताकि वे किसी और स्कूल में पढ़ाई कर सकें। विशेषज्ञों ने कहा कि पीड़ित बच्चियों को काउंसलिंग और उचित मानसिक सहयोग की सख्त ज़रूरत है।
मिशनरी स्कूलों पर सरकार की निगरानी जरूरी
क्या कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ?
शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना के बाद मांग की है कि झारखंड सहित देशभर के मिशनरी स्कूलों पर नियमित रूप से निगरानी रखी जाए।
Missionary School Controversy कोई पहला मामला नहीं है—इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें बच्चियों की शिकायतों को अनदेखा किया गया या दबा दिया गया।
जनता की मांग: आरोपी की गिरफ्तारी और स्कूल की मान्यता रद्द हो
सोशल मीडिया पर छाया आक्रोश
सोशल मीडिया पर Missionary School Controversy टॉप ट्रेंड में आ गया है। लोग मिशनरी स्कूल के लाइसेंस रद्द करने और आरोपी शिक्षक को कठोर दंड देने की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि इस मामले को यूं ही जाने नहीं देंगे। अगर न्याय नहीं मिला, तो पूरे जिले में आंदोलन छेड़ा जाएगा।
Missionary School Controversy ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल जैसे पवित्र स्थान भी अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहे। बच्चियों की सुरक्षा के नाम पर केवल दिशा-निर्देश बनाना पर्याप्त नहीं है, जब तक उन पर गंभीरता से अमल न हो। यह घटना सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की चेतावनी है। अब वक्त आ गया है कि बच्चियों की आवाज़ को “सबूत” की मांग के बजाय “सुनवाई” दी जाए।