घर पहुंचने के लिए जिस स्कॉर्पियो में बैठी छात्रा, उसी गाड़ी में हो गई दरिंदगी! कोचिंग से लौटते वक्त हुआ खौफनाक खेल, 12 घंटे में पुलिस ने आरोपी को ऐसे दबोचा
शेखपुरा। बिहार के शेखपुरा जिले से महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कोचिंग से पढ़ाई कर घर लौटने के लिए वाहन का इंतजार कर रही एक नाबालिग छात्रा को लिफ्ट देने के बहाने स्कॉर्पियो में बैठाया गया और बाद में उसे सुनसान रास्ते की ओर ले जाकर दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। पुलिस का दावा है कि तकनीकी जांच और लगातार छापेमारी के आधार पर आरोपी को घटना के करीब 12 घंटे के भीतर लखीसराय से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपी की पहचान शेखपुरा शहर के जखराज स्थान निवासी शशिभूषण सिंह के पुत्र अमृत कुमार उर्फ अमित कुमार के रूप में बताई है। पुलिस के अनुसार, घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो को भी बरामद कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस ने जल्द चार्जशीट दाखिल करने की बात कही है।
आरडी कॉलेज मोड़ पर छात्रा से हुई मुलाकात
पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार शाम शेखपुरा शहर के आरडी कॉलेज मोड़ के पास हुई। नाबालिग छात्रा कोचिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने घर जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोपी कथित तौर पर स्कॉर्पियो लेकर वहां पहुंचा।
बताया गया है कि आरोपी ने छात्रा से लखीसराय जाने का रास्ता पूछा। चूंकि लखीसराय की दिशा छात्रा के घर जाने वाले रास्ते से जुड़ी हुई थी, इसलिए आरोपी ने उसे घर तक छोड़ने की पेशकश की। शुरुआत में छात्रा ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपी ने अपने मोबाइल फोन से छात्रा के परिजनों को फोन लगाने का प्रयास किया। हालांकि, कथित तौर पर फोन रिसीव नहीं हुआ। पुलिस का कहना है कि परिजनों से संपर्क करने का प्रयास दिखाकर आरोपी ने छात्रा का भरोसा जीतने की कोशिश की और उसे सुरक्षित घर पहुंचाने का भरोसा दिलाया।
इसके बाद छात्रा कथित रूप से स्कॉर्पियो में बैठ गई।
घर पहुंचाने के बजाय सुनसान रास्ते की ओर ले जाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, छात्रा को घर पहुंचाने के बजाय वाहन को दूसरे रास्ते की ओर ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, स्कॉर्पियो भदौस के आगे मदारी रोड की तरफ पहुंची, जहां आसपास अपेक्षाकृत सुनसान इलाका था।
आरोप है कि इसी दौरान चलती गाड़ी में छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद आरोपी ने कथित तौर पर छात्रा को पचना गांव स्थित झारखंड मंदिर मोड़ के पास छोड़ दिया और वहां से फरार हो गया।
पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच के दौरान घटनास्थल, वाहन, मोबाइल फोन और अन्य संभावित साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के दौरान आरोपी की गतिविधियां क्या थीं और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
डरी-सहमी हालत में घर पहुंची छात्रा
घटना के बाद छात्रा किसी तरह अपने घर पहुंची। परिजनों के अनुसार, वह काफी डरी और परेशान थी। उसने परिवार के सदस्यों को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। इसके बाद परिजन उसे लेकर महिला थाना पहुंचे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने जांच में संवेदनशीलता बरतने की बात कही है।
पुलिस की ओर से पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। नाबालिग पीड़िता की पहचान कानून के तहत गोपनीय रखी जाती है।
पुलिस ने बनाई विशेष जांच टीम
मामला दर्ज होने के बाद शेखपुरा पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया। पुलिस के अनुसार, टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और संभावित ठिकानों की जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी घटना के बाद शेखपुरा से बाहर निकल गया था। उसकी तलाश में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के लखीसराय में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने वहां कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, घटना के करीब 12 घंटे के भीतर आरोपी अमृत कुमार उर्फ अमित कुमार को लखीसराय से गिरफ्तार कर लिया गया। वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।
15 दिनों में चार्जशीट दाखिल करने का दावा
शेखपुरा के एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार ने प्रेस वार्ता में मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस इस मामले की जांच को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार, पुलिस की तकनीकी टीम और एसआईटी ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है।
एसडीपीओ के मुताबिक, पुलिस का प्रयास है कि मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी कर करीब 15 दिनों के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जाए। इसके बाद मामले में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस द्वारा की जा रही जांच और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
घटना ने एक बार फिर छोटे शहरों और कस्बाई इलाकों में पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलने वाली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में छात्राएं रोजाना कोचिंग, स्कूल और कॉलेज के लिए अकेले या सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से आवागमन करती हैं। ऐसे में सुरक्षित परिवहन और रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस घटना में भी छात्रा कथित तौर पर कोचिंग खत्म होने के बाद घर लौटने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उसे लिफ्ट देने की पेशकश की गई। परिजनों को फोन लगाने का प्रयास दिखाकर भरोसा हासिल करने का आरोप भी मामले को गंभीर बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों और किशोरियों को अनजान लोगों से लिफ्ट लेने से बचने, किसी संदिग्ध स्थिति में तुरंत परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को सूचना देने और आपात स्थिति में पुलिस की मदद लेने के बारे में जागरूक करना जरूरी है। साथ ही, अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी ऐसे मामलों में सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकता है।
पुलिस की कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिस ने कथित तौर पर घटना में इस्तेमाल वाहन को भी जब्त कर लिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों को सुरक्षित करने, उनका वैज्ञानिक परीक्षण कराने और अदालत के समक्ष मजबूत केस प्रस्तुत करने की चुनौती है।
पुलिस ने जल्द चार्जशीट दाखिल करने और स्पीडी ट्रायल के जरिए दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा दिलाने की बात कही है। वहीं, पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलने तथा उसकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी इस मामले का महत्वपूर्ण पक्ष है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी पर लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत का क्या निष्कर्ष सामने आता है।

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