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76 की उम्र में भी फिटनेस का राज क्या है? मोदी की थाली में छिपा है ये ‘सादा’ फॉर्मूला, मखाना से लेकर खिचड़ी तक का कनेक्शन जानकर चौंक जाएंगे!



नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर 2026 को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों, विदेश यात्राओं और लगातार व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण उनकी दिनचर्या अक्सर चर्चा में रहती है। इसी के साथ उनके खान-पान को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बनी रहती है। हालांकि, प्रधानमंत्री खुद कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी कोई ऐसी तय डाइट नहीं है जिसे वह हर दिन एक निश्चित चार्ट की तरह फॉलो करते हों।

2026 में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने प्रधानमंत्री से उनकी डाइट और ऊर्जा बनाए रखने के तरीके के बारे में सवाल किया था। इसके जवाब में मोदी ने कहा था कि उनकी कोई फिक्स डाइट नहीं है। उन्होंने बताया कि वह शाकाहारी हैं और अलग-अलग परिवारों में रहने के दौरान वहां उपलब्ध शाकाहारी भोजन ही खाते रहे हैं। उन्होंने अपने हाथ से खिचड़ी बनाने का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कहा कि भोजन व्यक्ति की पसंद के अनुसार होना चाहिए और उसे दवा की तरह जबरदस्ती नहीं खाना चाहिए।

यानी प्रधानमंत्री की बताई बातों से यह संकेत मिलता है कि उनके खान-पान का आधार किसी महंगे या बेहद जटिल डाइट प्लान से ज्यादा सादगी, स्थानीय खाद्य पदार्थ और संतुलित भोजन है। हालांकि, किसी व्यक्ति की डाइट को देखकर उसकी व्यक्तिगत सेहत के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत उम्र, गतिविधि, स्वास्थ्य और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

मखाना को प्रधानमंत्री ने बताया ‘सुपरफूड’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खान-पान में जिस चीज का सबसे ज्यादा जिक्र हाल के वर्षों में हुआ है, उनमें मखाना प्रमुख है। फरवरी 2025 में बिहार के भागलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने खुद बताया था कि वह साल में 365 में से कम से कम 300 दिन मखाना खाते हैं। उन्होंने मखाना को ‘सुपरफूड’ बताते हुए इसके उत्पादन और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत पर भी बात की थी।

मखाना यानी फॉक्सनट या कमल के बीज को आमतौर पर भूनकर स्नैक के तौर पर खाया जाता है। इसे कई भारतीय व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी लोकप्रियता केवल प्रधानमंत्री के बयान के बाद नहीं बढ़ी, बल्कि पारंपरिक भारतीय खान-पान में मखाने का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है।

मखाने को लेकर पोषण विशेषज्ञ इसके फाइबर, प्रोटीन और कुछ खनिजों की मौजूदगी का उल्लेख करते हैं। हालांकि, किसी भी एक खाद्य पदार्थ को ‘जादुई’ या हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य भोजन मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। मात्रा और तैयारी का तरीका भी महत्वपूर्ण होता है।

मिलेट्स को भी देते हैं खास महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से मिलेट्स यानी मोटे अनाज को भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते रहे हैं। इनमें बाजरा, रागी, ज्वार सहित कई अनाज शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने अलग-अलग कार्यक्रमों में इनके पोषण और पारंपरिक महत्व पर बात की है।

2025 में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भी उन्होंने बाजरा, रागी और ज्वार जैसे मिलेट्स का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय घरों में अलग-अलग रूपों में मिलेट्स का इस्तेमाल पहले से होता रहा है।

मिलेट्स को रोटी, खिचड़ी, उपमा, डोसा या दूसरे व्यंजनों के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार इनमें फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, किसी भी अनाज का सेवन व्यक्ति की कुल डाइट और जरूरत के हिसाब से होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने मिलेट्स को केवल व्यक्तिगत खान-पान से नहीं जोड़ा है, बल्कि भारतीय कृषि, पारंपरिक भोजन और पोषण के साथ भी इसका संबंध बताया है। भारत ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित कराने की पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर मिलेट्स से बने भोजन को बढ़ावा दिया है।

खिचड़ी का भी कर चुके हैं जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने खान-पान की चर्चा करते हुए खिचड़ी का जिक्र भी किया है। 2026 की परीक्षा पे चर्चा में उन्होंने बताया कि अलग-अलग परिवारों में रहने के दौरान उपलब्ध भोजन के अनुसार वह शाकाहारी खाना खाते थे और कई बार खुद खिचड़ी भी बनाते थे।

खिचड़ी भारतीय घरों में बनने वाला ऐसा भोजन है जिसमें चावल, दाल और जरूरत के अनुसार सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग क्षेत्र और परिवार अपनी पसंद के अनुसार तैयार करते हैं।

हालांकि, प्रधानमंत्री ने इसे किसी ‘विशेष डाइट’ के रूप में पेश नहीं किया। उनकी बात का मुख्य संदेश यह था कि भोजन व्यक्ति की पसंद और जरूरत के अनुसार होना चाहिए।

मोरिंगा यानी सहजन भी चर्चा में

प्रधानमंत्री के खान-पान से जुड़ी खबरों में मोरिंगा यानी सहजन का भी कई बार उल्लेख हुआ है। खास तौर पर मोरिंगा पराठे को लेकर चर्चा हुई है। 2023 में Indian Express ने विशेषज्ञों के हवाले से मोरिंगा के पोषण संबंधी पहलुओं पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि मोरिंगा में कई विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। हालांकि, इसके सेवन को सीधे वजन कम करने या किसी बीमारी का इलाज मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

मोरिंगा को सब्जी, पत्तियों या अन्य व्यंजनों के रूप में भारतीय भोजन में शामिल किया जाता है। प्रधानमंत्री ने भी विभिन्न मौकों पर मोरिंगा से जुड़े खाद्य पदार्थों का उल्लेख किया है।

यहां भी यह समझना जरूरी है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति द्वारा किसी खाद्य पदार्थ का सेवन किए जाने का मतलब यह नहीं है कि वही चीज हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लाभकारी होगी।

मौसमी फल और प्राकृतिक भोजन

प्रधानमंत्री ने छात्रों से बातचीत के दौरान मौसमी फल खाने और प्रकृति से जुड़े भोजन को महत्व देने की बात भी कही है। फलों में फाइबर, विटामिन, खनिज और प्राकृतिक शर्करा होती है। अलग-अलग रंग और प्रकार के फल खाने से भोजन में पोषक विविधता बढ़ सकती है।

हालांकि, फल खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर साबुत फल जूस की तुलना में अधिक फाइबर प्रदान करते हैं। वहीं किसी व्यक्ति को मधुमेह या अन्य चिकित्सकीय समस्या हो तो उसके लिए फल की मात्रा और प्रकार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

जंक और बहुत तले भोजन से दूरी की सलाह

स्वस्थ खान-पान को लेकर प्रधानमंत्री कई बार बच्चों और युवाओं को जंक फूड और अत्यधिक तले-भुने भोजन से बचने की सलाह दे चुके हैं। यह सलाह केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक अत्यधिक प्रोसेस्ड, ज्यादा नमक, चीनी या अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन संतुलित आहार का विकल्प नहीं माना जाता।

इसका मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपने पसंदीदा भोजन को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। संतुलित आहार का मूल विचार मात्रा, विविधता और नियमितता से जुड़ा है।

क्या यही डाइट हर व्यक्ति अपना सकता है?

प्रधानमंत्री की डाइट की चर्चा के बीच सबसे जरूरी सवाल यही है कि क्या आम व्यक्ति भी बिल्कुल वही खान-पान अपना सकता है? इसका जवाब सीधा नहीं है।

प्रधानमंत्री खुद भी 2026 की परीक्षा पे चर्चा में कह चुके हैं कि उनकी कोई निश्चित डाइट नहीं है और भोजन व्यक्ति की पसंद के अनुसार होना चाहिए।

हर व्यक्ति की कैलोरी और पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है। किसी व्यक्ति का काम शारीरिक है तो उसकी ऊर्जा जरूरत अलग हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, खिलाड़ियों और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों की डाइट भी अलग हो सकती है।

इसलिए किसी सेलिब्रिटी या सार्वजनिक व्यक्ति की डाइट की हूबहू नकल करने के बजाय उसके पीछे मौजूद सामान्य सिद्धांतों—संतुलित भोजन, पर्याप्त विविधता, कम प्रोसेस्ड भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि—को समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

डाइट के साथ जीवनशैली भी जरूरी

प्रधानमंत्री ने परीक्षा पे चर्चा के दौरान केवल भोजन की बात नहीं की थी। उन्होंने छात्रों से कहा कि शरीर को प्राथमिकता देनी चाहिए और सूर्योदय देखने जैसी आदतों को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। उन्होंने गहरी सांस लेने और शरीर को पर्याप्त ध्यान देने की बात भी कही।

वास्तव में स्वस्थ जीवनशैली केवल खाने तक सीमित नहीं होती। पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी, तनाव को संभालना और संतुलित भोजन—ये सभी एक स्वस्थ दिनचर्या के हिस्से हैं।

प्रधानमंत्री के खान-पान से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी में भी एक बात बार-बार सामने आती है—सादगी। मखाना, मिलेट्स, खिचड़ी, सब्जियां और मौसमी फल जैसे खाद्य पदार्थ भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध होते हैं। लेकिन इन खाद्य पदार्थों को किसी चमत्कारी स्वास्थ्य उपाय के रूप में देखने के बजाय संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर देखना अधिक उचित है।

76 साल की उम्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खान-पान को लेकर लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों के मुताबिक वह शाकाहारी भोजन लेते हैं और उन्होंने अपनी कोई फिक्स डाइट होने से इनकार किया है। मखाना को लेकर वह बता चुके हैं कि साल में करीब 300 दिन इसका सेवन करते हैं। मिलेट्स, खिचड़ी, मौसमी फल और मोरिंगा जैसे भारतीय खाद्य पदार्थ भी उनके सार्वजनिक खान-पान संबंधी बयानों में सामने आए हैं।

लेकिन इस पूरी चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश शायद यही है कि किसी एक व्यक्ति की डाइट को सभी के लिए आदर्श नहीं माना जा सकता। अपनी उम्र, स्वास्थ्य, काम और शरीर की जरूरत के अनुसार भोजन का चुनाव करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी, एलर्जी या विशेष पोषण संबंधी जरूरत है, तो व्यक्तिगत डाइट के लिए योग्य डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।

प्रधानमंत्री द्वारा बताई गई डाइट की सबसे सामान्य विशेषता महंगे या असामान्य खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि भारतीय भोजन की सादगी और विविधता है। यही वजह है कि मखाना से लेकर मिलेट्स तक उनके खान-पान की चर्चा आज भी लोगों के बीच बनी हुई है।

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