40 KM तक कार की छत पर चिपका रहा पुलिसकर्मी! आखिर बोरियों में क्या था, खुला तो सामने आया 300 किलो का बड़ा राज
तमिलनाडु के कोयंबटूर में पुलिस और तस्करों के बीच हुई एक बेहद खतरनाक पीछा कार्रवाई ने लोगों का ध्यान खींच लिया। सड़क पर तेज रफ्तार से भागती एक कार और उसकी छत पर जान जोखिम में डालकर चिपका हुआ पुलिसकर्मी देखकर राह चलते लोग हैरान रह गए। करीब 40 किलोमीटर तक चली इस कार्रवाई में पुलिसकर्मी ने कार को रोकने की कोशिश जारी रखी, जबकि कार में सवार लोग लगातार भागते रहे। आखिरकार पुलिस ने घेराबंदी कर कार को रुकवाया और उसमें सवार तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, कार की तलाशी के दौरान लगभग 300 किलोग्राम गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद बरामद किए गए। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों के बेंगलुरु से कोयंबटूर की ओर यह खेप ले जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि प्रतिबंधित तंबाकू की यह खेप कहां पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग काम कर रहे हैं।
बोरियों ने बढ़ाया पुलिस का शक
मामले की शुरुआत कोयंबटूर के कोविलपालयम इलाके में हुई, जहां पुलिस की टीम वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने एक कार को रोककर उसकी जांच शुरू की। कार के पीछे कई बोरियां रखी हुई थीं। बोरियों को देखकर पुलिसकर्मियों को संदेह हुआ और उन्होंने सामान की जांच करने का फैसला किया।
बताया गया कि सब-इंस्पेक्टर ने जैसे ही कार में रखी बोरियों की जांच करने की कोशिश की, वाहन में बैठे तीनों लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने कार के दरवाजे अंदर से लॉक कर लिए।
पुलिसकर्मियों को कुछ समझ में आता, उससे पहले ही चालक ने कार स्टार्ट कर दी और तेज रफ्तार से मौके से निकलने की कोशिश की। पुलिस को तुरंत अंदाजा हो गया कि कार में मौजूद सामान सामान्य नहीं हो सकता। इसके बाद पुलिस ने भागती कार का पीछा शुरू कर दिया।
चलती कार की छत पर कूद गए हेड कॉन्स्टेबल
भागती कार को रोकने की कोशिश के दौरान हेड कॉन्स्टेबल वेलमुरुगन ने बेहद जोखिम भरा कदम उठाया। उन्होंने चलती कार की छत पर छलांग लगा दी। इसके बाद वह कार की छत से चिपके रहे और वाहन के अंदर बैठे लोगों को कार रोकने के लिए मजबूर करने की कोशिश करते रहे।
लेकिन चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसकी रफ्तार बढ़ा दी। सड़क पर कार तेज गति से दौड़ती रही और पुलिसकर्मी छत पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करते रहे।
इस दौरान पीछे पुलिस की गाड़ियां भी कार का पीछा कर रही थीं। सड़क से गुजरने वाले कई लोगों ने इस असामान्य दृश्य को देखा। कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया। देखते ही देखते यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई।
करीब 40 किलोमीटर तक जारी रहा पीछा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कार कोयंबटूर के कई इलाकों से गुजरती हुई विलांकुरिची और कलापट्टी फोर रोड्स की ओर बढ़ी। इसके बाद वाहन चित्रा क्षेत्र की तरफ गया और अंततः कनियूर टोल प्लाजा तक पहुंच गया।
दिलचस्प बात यह रही कि कार चालक ने टोल प्लाजा पर भी वाहन नहीं रोका। रिपोर्टों के मुताबिक उसने FASTag के जरिए टोल का भुगतान किया और बैरियर पार करने के बाद फिर कार की रफ्तार बढ़ा दी।
इस दौरान कार की छत पर मौजूद पुलिसकर्मी लगातार वाहन को रोकने की कोशिश करते रहे। पीछे से पुलिस टीम भी लगातार पीछा कर रही थी। स्थिति को देखते हुए आसपास के पुलिस थानों को भी सूचना दे दी गई।
पुलिस ने एंबुलेंस को भी पीछा करने वाली टीम में शामिल किया
इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी चिंता कार की छत पर मौजूद पुलिसकर्मी की सुरक्षा को लेकर थी। तेज रफ्तार कार पर खड़े या चिपके व्यक्ति के साथ किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
इसी वजह से पुलिस ने एहतियात के तौर पर एंबुलेंस को भी कार्रवाई में शामिल किया। इसका उद्देश्य यह था कि अगर पुलिसकर्मी कार से गिरते हैं या किसी अन्य तरह की दुर्घटना होती है तो उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इसके साथ ही तिरुपुर जिले की पुलिस को भी अलर्ट किया गया। पुलिस टीमों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा गया और भाग रही कार को रोकने के लिए आगे घेराबंदी की तैयारी की गई।
अविनाशी के पास बिछाया गया जाल
करीब 40 किलोमीटर तक पीछा किए जाने के बाद कार अविनाशी इलाके में अन्नपूर्णा होटल के पास पहुंची। यहां पुलिस ने कार को रोकने के लिए रणनीति तैयार कर ली।
पुलिस की कई गाड़ियों और एंबुलेंस की मदद से कार को चारों तरफ से घेर लिया गया। रास्ता बंद होने के बाद चालक के सामने वाहन रोकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
आखिरकार कार रुक गई। लेकिन पुलिस के लिए मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई।
कार रुकते ही उसमें बैठे तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर भागने की कोशिश की। पुलिस ने एक आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि दो अन्य वहां से भाग निकले। इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया।
कुछ समय बाद दोनों फरार आरोपियों को भी पकड़ लिया गया। पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर उसकी तलाशी शुरू की।
कार से बरामद हुआ करीब 300 किलो गुटखा
कार की तलाशी के दौरान पुलिस को जो सामान मिला, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। वाहन से लगभग 300 किलोग्राम गुटखा और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद बरामद किए गए।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान बाबू धारा, 27 वर्ष, राजेश, 23 वर्ष और सुरेश, 20 वर्ष के रूप में बताई गई है। पुलिस के मुताबिक तीनों राजस्थान के रहने वाले हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की खेप बेंगलुरु से कोयंबटूर लेकर आ रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कोयंबटूर में यह सामान किसे सौंपा जाना था।
क्या किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं आरोपी?
लगभग 300 किलोग्राम प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद की बरामदगी के बाद जांच अब केवल गिरफ्तार किए गए तीन लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल हैं। आखिर यह खेप बेंगलुरु से किसने भेजी? इसे कोयंबटूर में किस व्यक्ति या कारोबारी तक पहुंचाया जाना था? क्या इससे पहले भी इसी नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की सप्लाई की गई थी? कार में इतनी बड़ी मात्रा में सामान ले जाने के बावजूद आरोपियों ने पुलिस जांच से बचने की कोशिश क्यों की?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच से सामने आ सकते हैं।
पुलिसकर्मी की बहादुरी बनी चर्चा का विषय
इस पूरे घटनाक्रम में हेड कॉन्स्टेबल वेलमुरुगन की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही। चलती कार को रोकने के लिए वाहन की छत पर छलांग लगाना बेहद जोखिम भरा कदम था। करीब 40 किलोमीटर तक कार के साथ बने रहना भी आसान नहीं था।
हालांकि ऐसी कार्रवाई में जोखिम काफी अधिक होता है और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। इस घटना ने यह भी दिखाया कि संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश के दौरान पुलिस को किस तरह अचानक बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
मोबाइल कैमरों में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम
कार की छत पर पुलिसकर्मी को देखकर सड़क पर मौजूद कई लोग हैरान रह गए। किसी को शुरुआत में समझ नहीं आया कि आखिर चलती कार के ऊपर पुलिसकर्मी क्यों मौजूद है। बाद में जब पुलिस की कई गाड़ियां उसके पीछे दिखाई दीं तो लोगों को अंदाजा हुआ कि कोई गंभीर पीछा चल रहा है।
कई राहगीरों ने इस घटनाक्रम को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया। इस तरह सड़क पर हुआ यह पीछा सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चा में भी सामने आया।
प्रतिबंधित तंबाकू की तस्करी पर पुलिस की नजर
तमिलनाडु में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री और तस्करी के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही है। गुटखा और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों को लेकर अलग-अलग जिलों में समय-समय पर छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई सामने आती रही है।
कोयंबटूर की इस कार्रवाई में इतनी बड़ी मात्रा में सामान बरामद होने के बाद पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो नहीं है। बेंगलुरु से कोयंबटूर तक खेप पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी जांच करेगी कि बरामद सामान की वास्तविक मात्रा कितनी थी, उसका स्रोत क्या था और इसे कहां सप्लाई किया जाना था।
कोयंबटूर की इस घटना में सबसे चौंकाने वाला दृश्य भले ही 40 किलोमीटर तक कार की छत पर चिपके पुलिसकर्मी का रहा हो, लेकिन मामले का असली केंद्र अब कार से बरामद लगभग 300 किलो प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद हैं। पुलिस की आगे की जांच यह तय करेगी कि यह केवल एक खेप थी या इसके पीछे किसी बड़े तस्करी नेटवर्क की पूरी श्रृंखला काम कर रही थी।

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