हाइलाइट्स
- साइबर ठगी के इस मामले में 57 वर्षीय महिला से 32 करोड़ रुपये लुटे गए
- ठगों ने DHL, CBI, RBI और साइबर क्राइम विभाग के अधिकारी बनकर एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा
- महिला से 187 ट्रांजैक्शन कराकर कुल 31.83 करोड़ रुपये ठग लिए
- स्काइप पर 24×7 निगरानी रखते हुए परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं
- पीड़िता ने मानसिक तनाव और बेटे की शादी के कारण देरी से FIR दर्ज कराई
बेंगलुरु में साइबर ठगी का अब तक का सबसे बड़ा केस
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आया यह मामला देश में साइबर ठगी के तेजी से बदलते स्वरूप की एक खतरनाक तस्वीर पेश करता है। आईटी हब कहे जाने वाले इस शहर में एक 57 वर्षीय महिला को जिस तरह डिजिटल अरेस्ट में रखकर 32 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया, उसने पुलिस और साइबर विशेषज्ञों दोनों को हैरान कर दिया है।
14 नवंबर को दर्ज की गई FIR में महिला ने बताया कि उसे 15 सितंबर 2024 से लगातार मानसिक दबाव, धमकी और डिजिटल निगरानी के बीच रखा गया। यह साइबर ठगी इतनी योजनाबद्ध थी कि पीड़िता को लंबे समय तक यह समझ ही नहीं आया कि वह एक व्यापक आपराधिक जाल में फंस चुकी है।
कैसे शुरू हुई साइबर ठगी? DHL कॉल ने बदला पूरा जीवन
इस साइबर ठगी की शुरुआत एक फोन कॉल से हुई, जिसने पीड़िता की दुनिया उलट दी। कॉल करने वाले ने खुद को DHL कर्मचारी बताया और दावा किया कि अंधेरी से उसके नाम पर भेजे गए एक पैकेज में प्रतिबंधित सामान मिला है। कॉल में कहा गया कि पैकेज में:
- चार पासपोर्ट
- तीन क्रेडिट कार्ड
- और एमडीएमए जैसे ड्रग्स शामिल हैं
हालांकि महिला ने साफ कहा कि वह कभी मुंबई नहीं गई, लेकिन कॉलर ने जोर दिया कि उसकी पहचान का दुरुपयोग हुआ है और मामला गंभीर है।
CBI अधिकारी बनकर दबाव, गिरफ्तारी का डर और डिजिटल अरेस्ट
जैसे ही महिला ने बात आगे बढ़ाई, कॉल एक “सीबीआई अधिकारी” के पास ट्रांसफर कर दी गई। यहीं से साइबर ठगी का असली खेल शुरू हुआ। ठगों ने:
- गिरफ्तारी की धमकी दी
- कहा कि उसके खिलाफ मजबूत सबूत हैं
- यह दावा किया कि उसके घर के बाहर अपराधी नजर रख रहे हैं
- और यह चेतावनी दी कि स्थानीय पुलिस से संपर्क न करे
डर, भ्रम और लगातार दबाव के बीच महिला इस साइबर ठगी के जाल में गहराती चली गई।
स्काइप पर 24×7 निगरानी, घर से बाहर निकलने तक पर रोक
ठगों ने पीड़िता को दो अलग-अलग स्काइप आईडी इंस्टॉल करने को कहा।
इसके बाद “मोहित हांडा” नाम का शख्स स्काइप कैमरे के जरिए महिला की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने लगा।
यह निगरानी दो दिनों की नहीं बल्कि एक महीने तक चली, जो इस साइबर ठगी को और भी भयावह बनाती है।
एक अन्य फर्जी CBI अधिकारी “प्रीत सिंह” ने महिला को अपमानजनक भाषा में बात करते हुए बार-बार धमकाया और कहा कि अपनी बेगुनाही साबित करने का यही तरीका है।
आरबीआई और साइबर क्राइम विभाग का फर्जी इस्तेमाल
साइबर ठगी की योजना इतनी बारीक थी कि ठगों ने महिला को विश्वास दिलाने के लिए RBI के वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) का नाम लिया। उन्होंने महिला से कहा कि अगर वह पूरे मामले से मुक्त होना चाहती है तो:
- अपनी सभी बैंक जानकारी साझा करे
- अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण दे
- और अपनी 90% संपत्ति सत्यापन हेतु जमा करे
नितिन पटेल नाम के व्यक्ति ने खुद को साइबर अपराध विभाग का अधिकारी बताया और महिला को नकली पहचान पत्र भी दिखाए।
भय, गुमराह और मानसिक दबाव के चलते महिला ने 24 सितंबर से 22 अक्टूबर 2024 तक अपनी लगभग सारी वित्तीय जानकारी ठगों को दे दी।
187 लेनदेन में उड़ाए गए 31.83 करोड़ रुपये
इस साइबर ठगी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि महिला ने:
- कुल 187 लेनदेन किए
- जिनकी राशि 31.83 करोड़ रुपये थी
- ठगों ने उसे जमानत, टैक्स और क्लियरेंस जैसे बहाने बनाकर रकम जमा करवाते रहे
1 दिसंबर 2024 को उसे एक नकली “निकासी पत्र” भेजा गया, जिसने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि उसका पैसा सुरक्षित है।
लेकिन असल में वह इस साइबर ठगी का सबसे बड़ा धोखा था।
मानसिक तनाव, बीमारी और महीनों तक चुप्पी
लगातार एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट, धमकियों और आर्थिक नुकसान ने पीड़िता को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
- वह एक महीने से ज्यादा समय तक बीमार रही
- 6 दिसंबर को बेटे की सगाई हुई
- परिवार पर असर न पड़े, इसलिए उसने FIR दर्ज कराने में देरी की
2025 की शुरुआत तक ठग लगातार पैसे मांगते रहे, लेकिन 26 मार्च 2025 को अचानक सभी संपर्क बंद कर दिए।
पुलिस ने शुरू की जांच, साइबर ठगी के नए पैटर्न पर चिंता
FIR दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
यह घटना न सिर्फ बेंगलुरु बल्कि पूरे देश में साइबर ठगी के बढ़ते खतरे की एक गंभीर चेतावनी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह साइबर ठगी:
- मल्टी-लेयर कॉलिंग सिस्टम
- सरकारी संस्थाओं की नकली पहचान
- डिजिटल निगरानी
- और मनोवैज्ञानिक दबाव
का उपयोग करते हुए किया गया एक अत्यधिक जटिल ऑपरेशन है।
आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण सबक
इस साइबर ठगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि:
- कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर केस नहीं चलाती
- कोई भी अधिकारी स्काइप या व्हाट्सएप से जांच नहीं करता
- और कोई भी संस्था संपत्ति का 90% सत्यापन के लिए नहीं मांगती
यदि समय रहते जागरूकता और सतर्कता दिखाई जाए तो ऐसी साइबर ठगी से बचा जा सकता है