हाइलाइट्स
- • मेंस्ट्रुअल मास्किंग ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल, लेकिन विशेषज्ञ इसे पूरी तरह गलत बता रहे हैं
- • पीरियड ब्लड को चेहरे पर लगाने के दावों में वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव
- • डर्मटोलॉजिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि यह त्वचा पर संक्रमण और जलन का कारण बन सकता है
- • मासिक धर्म के दौरान निकलने वाला रक्त वास्तव में क्या होता है और इसमें क्या मिश्रित होता है
- • सुरक्षित स्किनकेयर के लिए डॉक्टरों ने बताई वैज्ञानिक रूप से साबित विधियां
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है मेंस्ट्रुअल मास्किंग ट्रेंड?
सोशल मीडिया पर हर दिन कोई नया ट्रेंड जन्म लेता है। कुछ ट्रेंड harmless होते हैं, तो कुछ सीधे सेहत पर असर डालने लगते हैं। हाल ही में ऐसा ही एक ट्रेंड दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है, जिसे मेंस्ट्रुअल मास्किंग कहा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि पीरियड्स के दौरान निकलने वाले रक्त को चेहरे पर लगाने से स्किन चमकदार और हेल्दी हो जाती है। इस दावे ने कई युवाओं को आकर्षित किया और देखते ही देखते यह मेंस्ट्रुअल मास्किंग ट्रेंड भारत में भी वायरल होने लगा।
टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर कई विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स ने खुद को यह करते हुए दिखाया। भारत में भी कुछ इन्फ्लूएंसर्स ने इस प्रयोग को ग्लो बढ़ाने वाला घरेलू नुस्खा बताकर प्रमोट करना शुरू कर दिया। लेकिन वास्तव में मेंस्ट्रुअल मास्किंग ट्रेंड की सच्चाई क्या है? क्या यह सुरक्षित है या ट्रेंड के नाम पर बड़ा जोखिम?
विशेषज्ञों ने मेंस्ट्रुअल मास्किंग को क्यों बताया खतरनाक
स्किन एक्सपर्ट और डर्मटोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि मेंस्ट्रुअल मास्किंग न सिर्फ बेकार है, बल्कि इससे गंभीर नुकसान भी हो सकता है। उनके अनुसार, पीरियड ब्लड को चेहरे पर लगाने के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
वे बताते हैं:
- इसमें कोई पोषक तत्व नहीं जो स्किन को फायदा दे सके
- यह स्वच्छ प्रक्रिया नहीं होती
- ब्लड में बैक्टीरिया, जर्म्स और माइक्रोऑर्गेनिज्म पाए जाते हैं
- चेहरे पर मौजूद घाव, दाने या खुले pores में लगाने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है
- किसी भी शोध में यह साबित नहीं हुआ कि मेंस्ट्रुअल मास्किंग स्किन के लिए मददगार होती है
डॉ. दिनेश कहते हैं कि सोशल मीडिया पर जो दिखता है वह सच नहीं होता। केवल views और engagement के लिए कई इन्फ्लूएंसर्स ऐसे जोखिम भरे प्रयोग करते हैं और दर्शक बिना सोचे-समझे उन्हें फॉलो करने लगते हैं।
पीरियड ब्लड में क्या होता है और यह त्वचा के लिए असुरक्षित क्यों है
मेंस्ट्रुअल मास्किंग को सही साबित करने वालों का दावा है कि पीरियड ब्लड में रेटिनॉल जैसे तत्व पाए जाते हैं। लेकिन वैज्ञानिक रूप से इस बात का कोई सबूत नहीं है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार पीरियड ब्लड में शामिल होते हैं:
- निष्क्रिय ऊतक
- गर्भाशय की झड़ चुकी परत
- वजाइना से निकला म्यूकस
- विभिन्न तरल पदार्थ
- लगभग 300 प्रकार के प्रोटीन और एंजाइम
- और सबसे महत्वपूर्ण, वजाइना में पाए जाने वाले बैक्टीरिया, जिनमें लैक्टोबैसिलस प्रमुख है
इसी वजह से यह ब्लड स्किन पर लगाने लायक नहीं होता। इसे medical waste माना जाता है, न कि स्किन ट्रीटमेंट का साधन। मेंस्ट्रुअल मास्किंग इस वैज्ञानिक तथ्य को पूरी तरह अनदेखा करता है।
पीआरपी थेरेपी और मेंस्ट्रुअल मास्किंग में क्या अंतर है
अक्सर मेंस्ट्रुअल मास्किंग को सही ठहराने के लिए लोग PRP (Platelet Rich Plasma) थेरेपी का उदाहरण देते हैं। लेकिन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है।
पीआरपी थेरेपी में:
- मरीज के ब्लड को मशीनों द्वारा प्रोसेस किया जाता है
- बैक्टीरिया और अशुद्धियां हटाई जाती हैं
- इसे trained experts द्वारा क्लिनिक में किया जाता है
- कोलेजन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष तकनीक इस्तेमाल होती है
इसके विपरीत मेंस्ट्रुअल मास्किंग प्राकृतिक रक्त को बिना किसी प्रोसेस के सीधे चेहरे पर लगाने की सलाह देता है। डॉ. दिनेश के अनुसार यह तरीका बेहद असुरक्षित है।
क्या मेंस्ट्रुअल मास्किंग से त्वचा को नुकसान हो सकता है?
हां, और विशेषज्ञों की मानें तो काफी गंभीर नुकसान। मेंस्ट्रुअल मास्किंग से संभावित दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं:
- त्वचा पर इरिटेशन
- लालपन या सूजन
- बैक्टीरियल इंफेक्शन
- फंगल इंफेक्शन
- रेडनेस और एलर्जी
- स्किन की प्राकृतिक बैरियर को नुकसान
स्किन पर किसी भी असुरक्षित चीज को लगाने से चेहरे की नाजुक परत जल्दी प्रभावित हो जाती है। इसलिए मेंस्ट्रुअल मास्किंग ट्रेंड को डॉक्टर पूरी तरह नकारते हैं।
सोशल मीडिया का बढ़ता खतरा: ट्रेंड के पीछे तथ्य नहीं
सोशल मीडिया पर हर वायरल वीडियो या reel किसी शोध पर आधारित नहीं होती। मेंस्ट्रुअल मास्किंग इसी गलत सूचना का हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अपनी त्वचा पर किसी भी नए तरीके का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। इंटरनेट पर दिखने वाले हर प्रयोग को अपनाना समझदारी नहीं है।
स्वस्थ और सुरक्षित स्किन केयर कैसे करें
डर्मटोलॉजिस्ट बताते हैं कि अच्छी स्किन के लिए मेंस्ट्रुअल मास्किंग जैसी तकनीक की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सही दिनचर्या ही स्वस्थ त्वचा के लिए पर्याप्त होती है।
डॉक्टरों की सुझाई सुरक्षित स्किनकेयर रूटीन:
- हल्का फेस वॉश
- स्किन के प्रकार के अनुसार मॉइस्चराइजर
- सनस्क्रीन SPF 30+
- पर्याप्त नींद
- हेल्दी आहार
- पानी की पर्याप्त मात्रा
इस रूटीन में कहीं भी मेंस्ट्रुअल मास्किंग जैसी तकनीक की कोई जगह नहीं है।
मेंस्ट्रुअल मास्किंग का सच: ट्रेंड नहीं, खतरा
पिछले कुछ महीनों में इस ट्रेंड पर लाखों वीडियो बने और बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे अपनाने की कोशिश भी की। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रेंड जितना तेजी से फैला है, उतना ही तेजी से इसे रोका भी जाना चाहिए। क्योंकि मेंस्ट्रुअल मास्किंग किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसके फायदे सिर्फ सोशल मीडिया की कल्पना हैं।
सोशल मीडिया ट्रेंड्स हमेशा जानकारी पर आधारित नहीं होते। त्वचा जैसी संवेदनशील चीज पर बिना वैज्ञानिक आधार वाले प्रयोग करना खतरे को बुलावा है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मेंस्ट्रुअल मास्किंग एक झूठा ट्रेंड है और इससे बचना ही समझदारी है।