शाम होते ही बदल जाती थी डॉ. शाहिदा की दुनिया… जांच में सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई

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 हाइलाइट्स

  • सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल के तार दिल्ली के लाल किला कार धमाके से जुड़े पाए गए
  • मुख्य आरोपी डॉ. शाहीना सईद के मेडिकल कॉलेज रिकॉर्ड और गतिविधियों की जांच जारी
  • मॉड्यूल ने 32 कारों के नेटवर्क के जरिए देश में बड़े हमलों की योजना बनाई थी
  • फोरेंसिक रिपोर्ट में कई वाहनों में विस्फोटक रसायनों के निशान मिले
  • सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि समय रहते कार्रवाई न होती तो तबाही कई गुना बड़ी होती

लाल किला धमाके में उजागर हुआ सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल: डॉक्टरों और 32 कारों पर आधारित खतरनाक नेटवर्क

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए हालिया कार विस्फोट ने देश को हिला दिया। शुरुआती जांच में यह घटना एक साधारण आतंकी हमला लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, सुरक्षा एजेंसियों को एक ऐसे सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल का पता चला जिसने कई बड़े नामों और संस्थानों का इस्तेमाल करके नेटवर्क खड़ा किया था। इस मॉड्यूल की शैली, संचालन और योजना ने जांच टीमों को भी हैरान कर दिया।

डॉ. शाहीना सईद: दिन में डॉक्टर, शाम को नेटवर्क की संचालक?

जांच में सामने आया कि इस सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल का केंद्र फरीदाबाद का अल-फ़लाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज था। यहां से जुड़ी डॉ. शाहीना सईद इस नेटवर्क की सबसे प्रमुख कड़ी थीं।
सहकर्मियों के मुताबिक, वह दिन में शांत स्वभाव और अनुशासित डॉक्टर की तरह काम करती थीं, लेकिन जैसे ही शाम 4 बजे के बाद समय होता, उनका व्यवहार बदल जाता। वह कई बार बिना बताए चली जातीं और किसी को भी अपने काम या स्थान की जानकारी नहीं देती थीं।

अधिकारियों ने उनके पास से मिस्बाहा (माला) और कई धार्मिक किताबें बरामद कीं। जांच टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि यह सामग्री धार्मिक अभ्यास के लिए थी या फिर इस सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल की गतिविधियों का कोई संकेत देती थी।

 महिला शाखा की प्रमुख थीं?

खुफिया एजेंसियों का दावा है कि डॉ. सईद जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा का संचालन करती थीं। इस शाखा का नाम कई ऐतिहासिक हमलों से जुड़ा हुआ है, जिनमें 2001 का संसद हमला और 2019 का पुलवामा हमला शामिल है।
डॉ. सईद को लखनऊ के लाल बाग से गिरफ्तार किया गया, और उनकी गिरफ्तारी के कुछ ही घंटे बाद उनके सहयोगी उमर मोहम्मद ने i20 कार में विस्फोट कर दिया, जिसमें 13 लोग मारे गए।

इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल का संबंध दो अन्य डॉक्टरों, डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. आदिल अहमद राथर से भी था, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

32 कारों का चौंकाने वाला तंत्र

क्या एक धमाका ही लक्ष्य था?

जांच के अनुसार, यह सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल केवल एक विस्फोट की योजना नहीं बना रहा था। नेटवर्क की योजना इतनी विस्तृत थी कि इसमें 32 कारों का इस्तेमाल किया जाना था।
इन कारों का उद्देश्य अलग-अलग था—कुछ में विस्फोटक ले जाए जाने थे, कुछ का काम रेकी करना था, जबकि बाकी का इस्तेमाल भागने के मार्गों और समन्वय के लिए किया जाना था।

प्रमुख बरामद कारें

  • हुंडई i20: वही वाहन जिसमें लाल किले के पास विस्फोट हुआ
  • मारुति स्विफ्ट डिज़ायर: डॉ. शकील के कब्जे में, जिसमें हथियार और गोला-बारूद मिले
  • मारुति ब्रेज़ा: डॉ. सईद द्वारा चलाई जाने वाली, जिसे भागने के लिए तैयार रखा गया था
  • फोर्ड EcoSport: मीटिंग और विस्फोटक ले जाने के लिए इस्तेमाल

EcoSport से क्या मिला?

फोरेंसिक टीम ने जब लाल रंग की फोर्ड EcoSport की जांच की, तो अमोनियम नाइट्रेट और ईंधन तेल के अंश मिले। यह वही मिश्रण था जो i20 कार में विस्फोट के लिए इस्तेमाल हुआ था। यह इस सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल की कार्यप्रणाली और योजना की गंभीरता को दर्शाता है।

कितनी गहराई तक फैला था यह सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल?

 मेडिकल संस्थानों के भीतर नेटवर्क

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल डॉक्टरों और मेडिकल संस्थानों के भीतर से संचालित हो रहा था।
सामान्यत: आतंकी मॉड्यूल निचले या मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों से भरे होते हैं, लेकिन इस मॉड्यूल में उच्च शिक्षित, पेशेवर और सामाजिक रूप से असरदार व्यक्तियों की भूमिका थी।

क्यों इतने वाहन?

जांच टीम के अनुसार, 32 कारों की योजना इसलिए बनाई गई थी ताकि

  • निगरानी
  • समन्वय
  • विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति
  • भागने के रास्ते
  • और फर्जी पहचान के साथ आवाजाही

सभी को एक साथ संचालित किया जा सके।
यह किसी साधारण समूह का काम नहीं था, बल्कि एक बेहद योजनाबद्ध सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल का संकेत देता है।

राष्ट्रीय राजधानी के लिए बड़ा खतरा

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल समय रहते पकड़ा न जाता तो दिल्ली और आसपास के शहरों में सिलसिलेवार धमाकों की संभावना थी।
माना जा रहा है कि i20 कार का विस्फोट केवल एक “टेस्ट” या “ड्राई रन” जैसा था, जिसके बाद बड़े हमलों को अंजाम दिया जाना था।

संभावित लक्ष्य

जांच एजेंसियों ने कई हाई-फुटफॉल स्थानों की सूची तैयार की है, जिनकी रेकी इस मॉड्यूल ने की थी। इसमें शामिल हैं

  • प्रमुख मेट्रो स्टेशन
  • मार्केट क्षेत्र
  • सरकारी भवन
  • विश्वविद्यालय
  • भीड़भाड़ वाले सांस्कृतिक स्थल

दिल्ली का लाल किला विस्फोट किसी एक कार की घटना नहीं थी। यह एक गहरे, जटिल और खतरनाक सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में बड़े स्तर पर हिंसा फैलाना था।
इस मॉड्यूल की सबसे खास बात यह थी कि इसमें डॉक्टर और पेशेवर शामिल थे, जो अपनी सामाजिक पहचान का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए कर रहे थे।
समय रहते हुई कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया, लेकिन जांच एजेंसियां अभी भी इसकी जड़ों को खंगालने में जुटी हैं।

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