डॉक्टर या दुश्मन? सहारनपुर के अस्पताल से निकला देशभर में फैला खतरनाक आतंक कनेक्शन

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हाइलाइट्स

  • Terror Connection मामले में सहारनपुर के डॉक्टर आदिल अहमद की गिरफ्तारी से हड़कंप
  • श्रीनगर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाने के आरोप में की कार्रवाई
  • आरोपी के पास से AK-47, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध चैट रिकॉर्ड बरामद
  • जांच में सामने आया कई राज्यों में फैला नेटवर्क
  • देवबंद स्थित ATS सेंटर बना आतंक विरोधी रणनीति का केंद्र

सहारनपुर का Terror Connection: डॉक्टर की गिरफ्तारी ने खोले कई राज़

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का नाम एक बार फिर Terror Connection के कारण सुर्खियों में है। श्रीनगर पुलिस ने हाल ही में सहारनपुर के एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉ आदिल अहमद राठर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने श्रीनगर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रचार वाले पोस्टर लगाए थे। गिरफ्तारी के समय पुलिस को उसके पास से AK-47 राइफल, कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध चैट रिकॉर्ड मिले।

इस कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है क्योंकि शुरुआती जांच से पता चला है कि डॉक्टर आदिल का संबंध एक बड़े अंतरराज्यीय Terror Connection नेटवर्क से हो सकता है, जो हरियाणा, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है।

सहारनपुर और आतंक का पुराना रिश्ता

यह पहली बार नहीं है जब सहारनपुर किसी Terror Connection के कारण चर्चा में आया हो। पिछले कुछ वर्षों में यहां से जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, इंडियन मुजाहिदीन और AQIS जैसे संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

2018 में शुरू हुआ सिलसिला

साल 2018 में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा नदीम गंगोह इलाके से गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था और जम्मू-कश्मीर में जैश मॉड्यूल के लिए काम करता था। यही वह घटना थी जिसने सहारनपुर के Terror Connection की पहली परत खोली।

इसके बाद देवबंद से जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का सदस्य तल्हा पकड़ा गया, जो भारत में कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों को फैलाने में सक्रिय था।

लश्कर और हिजबुल के नेटवर्क में भी सहारनपुर

सहारनपुर का Terror Connection सिर्फ जैश तक सीमित नहीं रहा। लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी इनामुल और हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य उल्फत हुसैन उर्फ सैफुल भी यहीं से पकड़े गए। फरवरी 2019 में जैश से जुड़े शाहनवाज तेली और आकिब की गिरफ्तारी ने पूरे देश का ध्यान इस इलाके की ओर खींचा। दोनों कश्मीरी युवक देवबंद में किराए पर रह रहे थे और उनके पास से कई संदिग्ध दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत मिले थे।

इन गिरफ्तारियों ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी यूपी का यह इलाका लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक “सेफ ज़ोन” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

NIA और ATS की संयुक्त मुहिम

कई मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने मिलकर कार्रवाई की। सहारनपुर के Terror Connection को तोड़ने के लिए नजीर अहमद, एजाज शेख और बिलाल खान जैसे संदिग्धों की गिरफ्तारी की गई।

सितंबर 2025 में तितरों-नकुड़ निवासी बिलाल खान की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता माना गया। वह अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़ा था और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क में था। जांच में पता चला कि पश्चिमी यूपी के कई हिस्सों में स्लीपर सेल सक्रिय हैं जो सोशल मीडिया और फंडिंग चैनल के माध्यम से आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं।

देवबंद का ATS सेंटर: सुरक्षा की नई दीवार

2022 में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने देवबंद में ATS कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बना यह सेंटर अब पश्चिमी यूपी का सुरक्षा नर्व हब बन चुका है।

यहां की टीम सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और हरिद्वार में सक्रिय Terror Connection नेटवर्क पर नजर रखती है। यह सेंटर स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और NIA के साथ मिलकर सूचना साझा करता है और त्वरित कार्रवाई करता है।

देवबंद का यह सेंटर न केवल संभावित आतंकी गतिविधियों को रोकने में मदद कर रहा है, बल्कि संदिग्ध फंडिंग और डिजिटल कम्युनिकेशन ट्रैकिंग में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

डॉ आदिल की गिरफ्तारी से नई जांच दिशा में

बीते गुरुवार रात डॉक्टर आदिल अहमद की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि आदिल श्रीनगर और सहारनपुर के बीच कई बार यात्रा कर चुका था। वह सोशल मीडिया पर Terror Connection से जुड़े ग्रुप्स में सक्रिय था और जैश के प्रचार तंत्र के लिए कंटेंट तैयार करता था।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या दिल्ली में लाल किला के पास हुए बम धमाकों से भी उसका कोई संबंध था। उसके मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा को साइबर फोरेंसिक टीम ने जब्त कर लिया है और कई विदेशी नंबरों की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं।

स्थानीय लोगों में चिंता और सख्त निगरानी

सहारनपुर में डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। पुलिस ने शहर के कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया है। अस्पतालों, छात्रावासों और किराये के मकानों में रह रहे बाहरी लोगों की सख्त जांच की जा रही है ताकि किसी और Terror Connection का पता लगाया जा सके।

स्थानीय प्रशासन ने यह भी निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी मकान मालिक किरायेदार की पुलिस वेरिफिकेशन के बिना घर किराए पर न दे।

क्या कहती है सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट

गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ कट्टरपंथी तत्व युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए गुमराह कर रहे हैं। इन्हें विदेश से फंडिंग मिलती है और यह Terror Connection के जरिए भर्ती और प्रोपेगैंडा फैलाने का काम करते हैं।

इसी वजह से ATS और NIA ने सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ को “हाई सर्विलांस जोन” में रखा है।

सहारनपुर में Terror Connection की ताज़ा कड़ी यानी डॉ आदिल अहमद की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि आतंक का नेटवर्क अभी खत्म नहीं हुआ। हालांकि ATS और NIA की लगातार कार्रवाई से हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।

अब यह देखना होगा कि इस गिरफ्तारी से निकले सूत्र क्या किसी बड़े आतंकी नेटवर्क को उजागर कर पाते हैं या नहीं।

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