कौन सा देश है जहां सेनेटरी पैड्स पूरी तरह गैरकानूनी? वहां पीरियड्स में महिलाएं कैसे संभालती हैं खुद को?

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हाइलाइट्स 

  • नॉर्थ कोरिया में अजीब कानून महिलाओं के बुनियादी अधिकारों तक सीमित पहुंच बनाते हैं
  • देश में सेनेटरी पैड्स, टैम्पून्स और पीरियड प्रोडक्ट्स पूरी तरह गैरकानूनी
  • बाजारों में खाने के सामान से लेकर घरेलू जरूरतों तक सब कुछ मिलता है, पर पीरियड प्रोडक्ट नहीं
  • महिलाएं मजबूरी में कपड़े के पैड बनाकर बार-बार इस्तेमाल करती हैं
  • सरकार मासिक धर्म को प्राइवेट जिम्मेदारी मानती है, कोई सहायता या जागरूकता नहीं

 दुनिया के सबसे अजीब कानूनों में से एक, जो महिलाओं की जिंदगी रोक देता है

दुनिया में कई देशों के नियम सुनकर लोग हंस देते हैं, कई पर हैरानी होती है और कई अजीब कानून सिर्फ पढ़कर ही चौंका देते हैं। लेकिन नॉर्थ कोरिया की कहानी कुछ अलग है। यहां के अजीब कानून सिर्फ अनोखे नहीं हैं, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन को एक ऐसी जंजीर में बांध देते हैं जिसकी कल्पना आधुनिक दुनिया में मुश्किल है।

नॉर्थ कोरिया को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर एक रहस्यमय, बंद और कठोर शासन वाले देश के रूप में देखा जाता है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि यहां महिलाओं के लिए ऐसा अजीब कानून मौजूद है, जिसे दुनिया का कोई आधुनिक देश स्वीकार भी नहीं कर सकता। यह कानून है—सेनेटरी पैड्स पर प्रतिबंध।

 सेनेटरी पैड्स पर प्रतिबंध: आखिर किस तरह का अजीब कानून है यह?

 दुकानों पर भी नजर नहीं आएंगे पीरियड प्रोडक्ट्स

नॉर्थ कोरिया में महिलाएं जिस सबसे गंभीर और अनकही समस्या से जूझती हैं, वह है पीरियड प्रोडक्ट्स की अनुपलब्धता। यहां सेनेटरी नैपकिन और टैम्पून्स न सिर्फ दुकानों में नहीं मिलते, बल्कि इनके इस्तेमाल तक को हतोत्साहित किया जाता है। सरकार इन्हें विदेशी सुख-सुविधाओं की श्रेणी में रखती है, इसलिए इन पर पूरा प्रतिबंध है।

यह अजीब कानून लोगों को हैरान कर देता है, क्योंकि यह किसी भी देश की आधी आबादी की बुनियादी जरूरत को पूरी तरह रोक देता है। बाजार में खाने का सामान, कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें तो मिल जाती हैं, लेकिन पीरियड से जुड़ी एक भी चीज उपलब्ध नहीं होती।

 महिलाएं आखिर करती क्या हैं?

 कपड़े के पैड फिर बने ‘नई मजबूरी’

इस अजीब कानून के चलते नॉर्थ कोरिया की महिलाएं पुराने तरीके अपनाने को मजबूर हैं। यहां महिलाएं कपड़े के पैड तैयार करती हैं जिन्हें धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। यह तरीका दशकों पहले आम था, लेकिन अब मजबूरी में फिर लौट आया है।

 धूप में सुखाना भी चुनौती बन जाता है

सिर्फ कपड़े के पैड बनाना ही नहीं, उन्हें सुखाना भी सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जाता। कई महिलाएं घर की दीवारों के पीछे या कम दिखाई देने वाले हिस्सों में इन्हें छिपाकर सुखाती हैं, ताकि कोई देख न ले। पीरियड को लेकर बात करना या जागरूकता फैलाना यहां मानो प्रतिबंधित विषय हो।

 सरकार का रुख: मासिक धर्म को ‘निजी जिम्मेदारी’ मानने वाला अजीब कानून

सरकार मासिक धर्म को निजी जिम्मेदारी मानती है, जिसका मतलब है कि न तो कोई हेल्थ प्रोडक्ट उपलब्ध कराया जाता है और न कोई सरकारी सहायता। न शिक्षण सामग्री, न स्वास्थ्य दिशानिर्देश, न ही जागरूकता अभियान।

यह अजीब कानून न सिर्फ महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों में धकेलता है बल्कि स्वास्थ्य जोखिमों को भी कई गुना बढ़ा देता है। कई विशेषज्ञ इस बात पर चिंता जताते हैं कि बार-बार कपड़े का उपयोग संक्रमण का कारण बन सकता है, पर नॉर्थ कोरिया में यह मुद्दा उठाना भी संभव नहीं।

 नॉर्थ कोरिया में जीवन कितना कठिन है

नॉर्थ कोरिया के अजीब कानून केवल पीरियड प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं हैं। यहां:

  • टीवी चैनल तय हैं
  • विदेशी संगीत सुनना अपराध है
  • विदेशी फैशन पहनना प्रतिबंधित है
  • इंटरनेट लगभग न के बराबर
  • यात्रा की स्वतंत्रता नहीं
  • यहां तक कि किस दिन हंसना है, उसका भी नियम है

किम जोंग उन के शासन में यह माना जाता है कि जनता के जीवन का हर छोटा फैसला सरकार तय करेगी। जब एक देश में जीवन इतना नियंत्रित हो, तो पीरियड जैसे विषय पर अजीब कानून होना शायद उसी कठोर व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है।

 दूसरे देशों के अजीब कानून बनाम नॉर्थ कोरिया का अजीब कानून

दुनिया में कई देशों के अजीब कानून मशहूर हैं। कहीं च्यूइंग गम पर प्रतिबंध है, कहीं सप्ताह के तय दिन पर ही कार धोने की अनुमति होती है, कहीं जानवरों से जुड़े अजीब नियम प्रचलित हैं।

लेकिन नॉर्थ कोरिया का यह नियम उन सभी अजीब कानूनों से आगे निकल जाता है, क्योंकि यह सीधे महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और अधिकारों को प्रभावित करता है। बाकी देश विचित्र नियम रखते हैं, लेकिन वे जीवन के इतने निजी और जरूरी हिस्से पर इस तरह का दबाव नहीं डालते।

 ऐसे हालात में महिलाएं कैसे जीती हैं?

पीरियड्स के बारे में बात करना यहां दुर्लभ है। महिलाओं की असल जिंदगी कैसी है, इस पर बाहरी दुनिया बहुत कम जान पाती है। वहां की कहानियां सीमित रूप से दुनिया तक पहुंचती हैं, और जो भी सामने आता है, वह नॉर्थ कोरिया के अजीब कानूनों की गंभीर झलक पेश करता है।

कई रिपोर्ट बताती हैं कि:

  • महिलाओं को पीरियड प्रोडक्ट्स के लिए दूसरे घरेलू कपड़ों का बलिदान देना पड़ता है
  • संक्रमण की समस्या आम है
  • युवा लड़कियों को स्कूल में परेशानी होती है
  • सरकारी सहायता न होने से गरीब परिवार और कठिनाई में रहते हैं

सवाल यही है… कब बदलेगी यह सच्चाई?

दुनिया आधुनिक हो रही है, तकनीक बढ़ रही है, जागरूकता फैल रही है। लेकिन नॉर्थ कोरिया के अजीब कानून महिलाओं की जिंदगी को आज भी कई दशक पीछे रोके हुए हैं। सवाल यह है कि क्या कभी इन नियमों में बदलाव आएगा? क्या महिलाओं को वह सहजता मिल पाएगी, जो हर देश की महिलाओं को मिलनी चाहिए?

अभी इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह हकीकत दुनिया को सोचने पर मजबूर कर देती है कि आज भी एक देश ऐसा है, जहां एक प्राकृतिक प्रक्रिया पर भी रोक लगी हुई है

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