बैंक के बाहर सोया भारतीय मजदूर… पर मलेशिया में उसके साथ जो क्रूरता हुई, उसे जानकर रूह कांप जाए, वायरल वीडिओ

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हाइलाइट्स

  • मलेशिया में भारतीय मजदूर के साथ अमानवीय व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
  • बैंक के बाहर सोते हुए सिक्योरिटी गार्ड द्वारा पानी से भिगोया गया, मोची ने भी मारपीट की
  • पीड़ित सफीउद्दीन का आरोप, पुराने मालिक ने पासपोर्ट और महीनों की सैलरी रोक ली
  • बेघर, भूखे और तनाव में रहने को मजबूर हुए, छह महीने से काम भी नहीं मिल रहा
  • वायरल वीडियो के बाद स्थानीय सोशल वर्कर ने दिया सहारा, पासपोर्ट वापस दिलाने की कोशिश

मलेशिया में पिछले कई दिनों से एक वीडियो सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है, जिसमें मलेशिया में भारतीय मजदूर सफीउद्दीन पक्कीर मोहम्मद के साथ ऐसा बर्ताव किया गया कि हर देखने वाला सन्न रह गया। वीडियो में साफ दिखता है कि एक सिक्योरिटी गार्ड और एक स्थानीय शख्स मिलकर उन्हें बैंक के बाहर से भगाने के लिए पानी से भिगोते हैं, धक्का देते हैं और अपमानित करते हैं।

इस वीडियो ने न सिर्फ मलेशिया बल्कि भारत में भी बड़ी बहस छेड़ दी है कि आखिर मलेशिया में भारतीय मजदूर किस हालात में काम कर रहे हैं और उन्हें किस तरह के शोषण का सामना करना पड़ता है।

 भारत से रोज़गार की उम्मीद में मलेशिया पहुंचे थे सफीउद्दीन

 परिवार को सपोर्ट करने निकले थे विदेश

39 वर्षीय सफीउद्दीन तमिलनाडु के रहने वाले हैं। 2024 में वे भारत से नौकरी की तलाश में मलेशिया गए थे। उनकी उम्मीदें साधारण थीं—इतना कमा लिया जाए कि पत्नी और दो बेटों के लिए बेहतर जिंदगी बनाई जा सके। एक परिचित के जरिए उन्हें कुआलालंपुर के श्री गोम्बक इलाके में एक रेस्टोरेंट में कुक की नौकरी मिली।

लेकिन उनकी कहानी उन हजारों मामलों में से एक बन गई, जहां मलेशिया में भारतीय मजदूर सपनों को लेकर जाते हैं लेकिन शोषण, बकाया वेतन और अवैध रोक-टोक में फंस जाते हैं।

 नौकरी मिलते ही मुश्किलें शुरू, सैलरी रोकना और पासपोर्ट जब्त करना बना दिनचर्या

 वर्क परमिट और हेल्थकेयर के नाम पर वसूली

मोहम्मद ने FMT को बताया कि उन्होंने अपने मालिक को वर्क परमिट के लिए RM3,500 और हेल्थकेयर शुल्क के तौर पर RM1,200 दिए। यह रकम भारतीय मुद्रा में मिलाकर लगभग एक लाख रुपये से ज्यादा होती है।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

 बिना वेतन के महीनों काटने पड़े

नए एम्प्लॉयर ने सैलरी देना समय पर बंद कर दिया। कभी दो महीने की देरी, कभी तीन, और कभी बिल्कुल नहीं। ऐसे में परिवार को पैसा भेजना तो दूर, वे अपना गुजारा ही नहीं चला पा रहे थे।

यह समस्या केवल सफीउद्दीन तक सीमित नहीं है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि मलेशिया में भारतीय मजदूर अक्सर इसी तरह के वेतन शोषण का सामना करते हैं।

 पासपोर्ट रोककर भारत लौटने का रास्ता भी बंद

सबसे गंभीर आरोप यह है कि एम्प्लॉयर ने उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया। सफीउद्दीन के अनुसार, उनके मालिक का साफ कहना था—
“जब तक पैसे पूरे नहीं दे देते, न तुम नौकरी छोड़ोगे, न यहां से बाहर जाओगे।”

 बेघर होने पर मजबूर, भूख और तनाव से टूटी हिम्मत

करीब छह महीने पहले सफीउद्दीन ने काम छोड़ दिया, लेकिन पासपोर्ट और पैसे न मिलने की वजह से उनके पास आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं था। रहने की जगह न थी, खाने को कुछ नहीं, और जेब में एक पैसा नहीं।

 फुटपाथ ही बना ठिकाना

वे कुआलालंपुर की सड़कों पर भटकते रहे और कुछ दिनों से AmBank की तमन मलूरी ब्रांच के बाहर सो रहे थे। यहीं से वह दर्दनाक वीडियो शूट हुआ जो बाद में वायरल हो गया।

 वायरल वीडियो में दिखा अमानवीय व्यवहार, पूरे समुदाय में आक्रोश

वीडियो में एक महिला सिक्योरिटी गार्ड उन्हें पानी से भिगोकर भगाती दिखती है। कुछ ही मिनटों में एक अधेड़ उम्र का मोची भी वहां आता है और उन्हें लात मारकर जाने के लिए कहता है।

 सफीउद्दीन की दिल छू लेने वाली बात

उन्होंने बताया:
“अगर वे मुझे सिर्फ जाकर बोल देते, तो भी मैं चुपचाप चला जाता। मैं कमजोर था, भूखा था, तनाव में था और बहुत ज्यादा डिप्रेस्ड था।”

यह बात सुनकर कई लोग टूट गए, क्योंकि मलेशिया में भारतीय मजदूर अक्सर ऐसी स्थितियों से गुजरते हैं लेकिन आवाज नहीं उठा पाते।

मदद को आगे आए सामाजिक कार्यकर्ता, अब शुरू हुई लड़ाई पासपोर्ट वापस पाने की

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता टोनी लियान ने उन्हें अपने शेल्टर में जगह दी। NST की रिपोर्ट के अनुसार, लियान अब सफीउद्दीन का पासपोर्ट वापस दिलाने और उनका बकाया वेतन पाने के लिए कानूनी प्रयास कर रहे हैं।

 कर्ज़ चुकाने के लिए भी चल रही मदद

सफीउद्दीन पर मलेशिया पहुंचने के बाद से कई कर्ज़ चढ़ गए थे। अब स्थानीय कम्युनिटी भी उनकी मदद कर रही है ताकि वे भारत वापस लौट सकें।

 मलेशिया में भारतीय मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि आखिर मलेशिया में भारतीय मजदूर कितने सुरक्षित हैं। पासपोर्ट रोकना, सैलरी रोकना और दुर्व्यवहार जैसी समस्याएं नई नहीं हैं।

भारत से हर साल हजारों मजदूर मलेशिया, सिंगापुर और खाड़ी देशों में कमाई की उम्मीद लेकर जाते हैं, लेकिन कई बार वे एजेंट्स और मालिकों के शोषण का शिकार बन जाते हैं।

इस घटना ने सरकारों, दूतावासों और मानवाधिकार संगठनों का ध्यान एक बार फिर उसी दिशा में खींचा है।

सफीउद्दीन के लिए अगला कदम उनके पासपोर्ट की वापसी और भारत लौटना है। सामाजिक संगठनों की कोशिश जारी है। भारत में भी इस मामले की चर्चा हो रही है और कई लोग सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

जो भी हो, इस घटना ने साफ कर दिया है कि मलेशिया में भारतीय मजदूर की समस्याएं सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़ी प्रणालीगत खामी की ओर इशारा करती हैं।

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