हाइलाइट्स
- मुंबई के IITian ने ₹1 लाख महीने की सैलरी पर होम मैनेजर रखी, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
- महिला पहले होटल इंडस्ट्री में ऑपरेशन हेड थीं
- दंपति ने बताया कि बिजी शेड्यूल और स्टार्टअप जिम्मेदारियों के कारण यह फैसला जरूरी था
- माता-पिता पर घरेलू बोझ न डालने के लिए पेशेवर मदद ली
- फैसले पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया, कई लोगों ने इसे स्मार्ट कदम कहा
अमन और हर्षिता का अनोखा फैसला क्यों बन गया बहस का विषय
मुंबई के IIT स्नातक और GreyLabs AI के CEO अमन गोयल इन दिनों सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। वजह है उनका एक ऐसा कदम, जिसने लोगों को चौंकाया भी और सोचने पर मजबूर भी किया। अमन गोयल और उनकी पत्नी हर्षिता श्रीवास्तव ने अपने घर के लिए एक फुल-टाइम होम मैनेजर नियुक्त की है, जिसकी सैलरी ₹1 लाख प्रति माह है। यह रकम उतनी ही है, जितनी कई कॉरपोरेट नौकरियों में एक प्रोफेशनल को मिलती है।
लेकिन दंपति का कहना है कि यह सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि समय खरीदने जैसा है। और यही वजह है कि उनके फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है।
आखिर कौन हैं यह होम मैनेजर
अमन ने बताया कि उनकी होम मैनेजर पहले एक प्रतिष्ठित होटल चेन में ऑपरेशन हेड के पद पर काम कर चुकी थीं। यानी वे सिर्फ घर की ‘मदद’ करने वाली नहीं, बल्कि trained operations professional हैं।
यह होम मैनेजर घर के सभी कामों की प्लानिंग से लेकर माइक्रो-मैनेजमेंट तक की जिम्मेदारी संभालती हैं। इसमें शामिल है:
होम मैनेजर की मुख्य जिम्मेदारियाँ
- पूरे सप्ताह का खाना और मेन्यू तय करना
- ग्रोसरी की प्लानिंग और खरीद
- कपड़े धुलाई और लॉन्ड्री मैनेजमेंट
- घर में होने वाली मरम्मत की निगरानी
- कुक और अन्य घरेलू स्टाफ की सुपरविजन
- मासिक बिल समय पर भरना
- घर को व्यवस्थित और सुचारू रूप से चलाना
यानी एक तरह से यह होम मैनेजर अमन और हर्षिता के घर को एक छोटे, सिस्टमैटिक ‘ऑपरेशंस यूनिट’ की तरह चलाती हैं। अमन का कहना है कि इस भूमिका के लिए प्रोफेशनल अनुभव महत्वपूर्ण था, और इसी वजह से उन्होंने अनुभवी व्यक्ति को चुना।
दंपति का तर्क: समय ज्यादा मूल्यवान है
अमन और हर्षिता दोनों टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इंडस्ट्री से आते हैं। रोज़ 10 से 12 घंटे काम, मीटिंग्स, और बिजनेस स्केल-अप के बीच घर संभालना उनके लिए मुश्किल हो रहा था।
अमन कहते हैं कि जब वे एक होम मैनेजर को रखते हैं, तो वे अपने समय को खाली कर पाते हैं—वह समय जिसे वे बिजनेस बढ़ाने, रिसर्च करने, और परिवार के साथ बिताने में लगा सकते हैं। उनका कहना था कि 1 लाख रुपये हर महीने देने का मतलब समय खरीदना है, और वे इसे किफायती समझते हैं।
माता-पिता को बोझ नहीं देना चाहते थे
अमन और हर्षिता, अमन के माता-पिता के साथ रहते हैं। उनका कहना है कि:
- वे बुजुर्गों पर घरेलू जिम्मेदारियाँ डालना नहीं चाहते थे
- माता-पिता आराम की उम्र में हैं
- होने वाले छोटे-मोटे काम उनकी दिनचर्या पर अतिरिक्त बोझ डालते
ऐसे में एक होम मैनेजर रखना उन्हें सबसे उचित निर्णय लगा।
सोशल मीडिया पर क्यों मची हलचल
जैसे ही यह जानकारी वायरल हुई, सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया।
There’s a huge opportunity in solving this problem:
The friction of home ownership vs. renting.
When you rent, you have a single point-of-contact for all problems. When you own, you have to somehow stay on top of the long list of recurring and one-off maintenance things.
I’d…
— Sahil Bloom (@SahilBloom) November 14, 2025
आलोचना का पक्ष
कई लोगों ने इसे पैसे की बर्बादी बताया। कुछ ने कहा कि:
- इतनी बड़ी सैलरी देना दिखावा है
- यह निवेशकों के पैसों की उड़ाई जा रही रकम है
- आम लोग ऐसा नहीं कर सकते, इसलिए यह निर्णय ‘अमीरों वाली सोच’ है
अमन ने इन आरोपों का जवाब भी दिया। उन्होंने साफ कहा कि होम मैनेजर की सैलरी उनकी निजी बचत से दी जाती है। उन्होंने पिछले बिजनेस को बेचकर अच्छी आय प्राप्त की थी, और यह खर्च पूरी तरह उन्हीं पैसों से होता है।
समर्थन करने वाले लोग भी कम नहीं
दूसरी तरफ, बड़ी संख्या में लोगों ने अमन के फैसले का समर्थन किया। उनका कहना था:
- यह आधुनिक शहरी परिवारों की असल जरूरत है
- घर के काम भी एक प्रोफेशनल की तरह मैनेज किए जा सकते हैं
- समय वाकई पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुका है
- अगर कोई व्यक्ति अफोर्ड कर सकता है, तो प्रोफेशनल होम मैनेजर रखना समझदारी है
कई लोगों ने तो यह भी लिखा कि आने वाले वर्षों में होम मैनेजर एक नया ‘अर्बन जॉब ट्रेंड’ बन सकता है।
कैसे बदल रहा है शहरी परिवारों का घरेलू ढांचा
बड़े शहरों में नौकरी, बिजनेस, और स्टार्टअप कल्चर लगातार तेज हो रहा है। युवा जोड़े काम, यात्रा, और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त होते हैं कि घर के कामों के लिए समय या ऊर्जा नहीं बचती।
ऐसे में होम मैनेजर का कॉन्सेप्ट सिर्फ अमीरों का नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ शहरी मॉडल माना जा रहा है। विशेष रूप से मेट्रो शहरों में:
- प्रोफेशनल कुक
- डेकेयर असिस्टेंट
- एल्डरली केयर विशेषज्ञ
- पर्सनल अडमिन मैनेजर
और अब होम मैनेजर की मांग बढ़ रही है।
क्यों यह ट्रेंड और तेज हो सकता है
- दोहरी नौकरी वाले परिवार बढ़ रहे हैं
- प्रोफेशनल लाइफ में प्रतिस्पर्धा अधिक है
- समय बचाने वाले समाधान तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं
- घरेलू प्रबंधन अब भी कई लोगों के लिए तनाव का कारण है
अमन गोयल का फैसला शायद आने वाले समय की तस्वीर दिखाता है, जहां हर घर में एक प्रोफेशनल होम मैनेजर होना सामान्य माना जाएगा।
बुद्धिमानी या बर्बादी? बहस जारी है
अमन और हर्षिता ने अपने अनुभव के आधार पर यह कदम उठाया है। उनका मानना है कि एक प्रशिक्षित होम मैनेजर घर की अव्यवस्था और मानसिक तनाव को कम करती है, जिससे वे अपने काम में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
लेकिन सोशल मीडिया की बहस थमने का नाम नहीं ले रही। कई लोग कहते हैं कि यह जीवनशैली ‘अत्यधिक सुविधाएँ’ पैदा करती है, जबकि समर्थक कहते हैं कि आधुनिक जीवन में पेशेवर मदद जरूरी है।
सच यह है कि इस बहस के केंद्र में सिर्फ एक सवाल है:
क्या समय बचाने के लिए एक प्रोफेशनल होम मैनेजर रखना समझदारी है?
हर व्यक्ति का जवाब अलग हो सकता है, लेकिन मुंबई में रहने वाले इस IT दंपति ने अपना जवाब साफ कर दिया है।