हाइलाइट्स
- गैंगरेप पीड़िता ने मेरठ रेंज DIG से मिलकर लगाया बड़ा आरोप
- इंस्पेक्टर पंकज राय की टीम पर पीड़िता को रोकने की कोशिश का आरोप
- पीड़िता ने बताया, छह लोगों ने किया था सामूहिक दुष्कर्म, दो अब भी फरार
- चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
- DIG ने पीड़िता की बात सुनी, जांच तेज करने का आश्वासन दिया
गैंगरेप पीड़िता के आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल
मेरठ रेंज में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे पुलिस महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया। गैंगरेप पीड़िता सीधे मेरठ रेंज DIG कलानिधि नैथानी से मिलने पहुंची, लेकिन इससे पहले कि वह अपनी बात रख पाती, इंस्पेक्टर पंकज राय की टीम ने उसे हर संभव तरीके से रोकने की कोशिश की। यह आरोप खुद गैंगरेप पीड़िता ने लगाया है।
पीड़िता ने बताया कि कुछ समय पहले उसके साथ छह लोगों ने बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इनमें से चार आरोपी जेल में हैं, लेकिन दो अब भी फरार हैं। इसी फरारी और कार्रवाई की धीमी रफ्तार से परेशान होकर वह सीधे वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंची।
लेकिन रास्ते में जो कुछ हुआ उसने उसकी चिंता और बढ़ा दी।
DIG ऑफिस पहुंचने पर क्या हुआ?
पीड़िता का दावा: “मुझे रोकने के लिए गाड़ियों से रास्ता घेर लिया गया”
गैंगरेप पीड़िता का कहना है कि जैसे ही उसे DIG ऑफिस में एंट्री लेनी थी, पुलिसकर्मियों ने पहले उससे पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद अंदर जाने से रोकने की कोशिश हुई। उसका आरोप है कि इंस्पेक्टर पंकज राय की टीम ने न सिर्फ उसे रोकने की कोशिश की बल्कि कई सवाल पूछकर उसका मनोबल भी तोड़ने की कोशिश की।
“मैं किसी तरह अंदर पहुंची और सारी बात DIG साहब को बताई”
पीड़िता ने साफ कहा कि उसे लगा कि उसकी आवाज ऊपर तक नहीं पहुंचने दी जा रही। लेकिन वह जिद पर अड़ी रही और आखिरकार किसी तरह अंदर पहुंचकर उसने पूरी घटना DIG को बताई।
DIG ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उसे पूरा भरोसा दिया कि न सिर्फ बाकी फरार आरोपियों पर कार्रवाई तेज होगी, बल्कि यह भी जांच होगी कि उसे रोकने की कोशिश क्यों की गई।
चार आरोपी जेल में, दो अब भी फरार — जांच पर उठ रहे सवाल
फोकस कीवर्ड का प्राकृतिक प्रयोग
पहले ही दिन से यह मामला चर्चा में रहा है। गैंगरेप पीड़िता ने साफ कहा कि उसने शुरू से ही सभी छह आरोपियों के नाम बताए थे। चार को तो पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार भी कर लिया था, लेकिन बाकियों पर कार्रवाई सुस्त गति से चलती रही।
“फरार आरोपी धमका रहे हैं”, पीड़िता का आरोप
पीड़िता का यह दावा बेहद गंभीर है कि फरार आरोपी उसके परिवार से लगातार संपर्क कर रहे हैं और समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि यही वजह है कि वह DIG से मिलने पहुंची क्योंकि उसे अपनी सुरक्षा की चिंता है।
पुलिस पर सवाल: पीड़िता को मिलने से क्यों रोका गया?
अंदरूनी जांच की मांग तेज
गैंगरेप पीड़िता का आरोप है कि इंस्पेक्टर पंकज राय की टीम ने जानबूझकर उसे रोका, ताकि मामला वरिष्ठ अधिकारी तक न पहुंच सके।
इस आरोप ने जांच की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक गंभीर मामले में पीड़िता को वरिष्ठ अधिकारी से मिलने से रोकने की नौबत क्यों आई?
“सर, कुछ समय पहले 6 लोगों ने बुरी तरह से मेरा रेप किया। 4 लोग जेल गए, 2 फरार हैं”
मेरठ रेंज DIG कलानिधि नैथानी को अपना दर्द बताने वाली गैंगरेप पीड़िता है, जिसे आज इंस्पेक्टर पंकज राय की टीम ने हरसंभव रोकने का प्रयास किया, ताकि वो DIG से न मिल सके।#UttarPradesh https://t.co/q3d6CnGWyJ pic.twitter.com/Nu9tYsyxkP
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) November 13, 2025
क्या यह मामले को दबाने की कोशिश थी?
कुछ स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसे गंभीरता से लिया है। उनके अनुसार यह पहला ऐसा मामला नहीं है जब किसी गैंगरेप पीड़िता को इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ा हो। कई संगठनों ने इसे बड़े पैमाने पर जांचे जाने की मांग की है।
DIG का रुख: “पीड़िता की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी”
DIG कलानिधि नैथानी ने पीड़िता की सभी बातों को विस्तार से सुना और भरोसा दिलाया कि कानून अपना काम करेगा। DIG के आश्वासन के बाद पीड़िता थोड़ी शांत दिखाई दी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि
“अगर किसी पुलिसकर्मी ने नियमों का उल्लंघन किया है या मनमानी की है तो उस पर कार्रवाई होगी।”
DIG ने यह भी बताया कि फरार आरोपियों की तलाश तेज की जा चुकी है और अगले कुछ दिनों में महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ सकता है।
पीड़िता की हालत और मनोबल
गैंगरेप पीड़िता ने इस पूरे संघर्ष के बीच खुद को मजबूत बनाए रखा है। उसका कहना है कि लंबे समय तक उसने चुप रहने की कोशिश की क्योंकि वह डर में थी। लेकिन अब उसने तय कर लिया है कि चाहे जितना समय लगे, वह न्याय लेकर ही रहेगी।
उसके परिवार ने भी उसकी हिम्मत बढ़ाई है और कहा है कि वे अंतिम दम तक उसके साथ रहेंगे।
सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज
कई महिला अधिकार संगठन इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब एक गैंगरेप पीड़िता को ही पुलिस से संघर्ष करना पड़े, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है।
उन्हें लगता है कि यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की आवाज है जिन्होंने कभी न कभी न्याय पाने में कठिनाइयां झेली हैं।
लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी
पीड़िता अब कानूनी सलाहकारों की मदद लेकर अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। उसका स्पष्ट कहना है कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि हर उस महिला के लिए लड़ रही है जो चुपचाप सब कुछ सह लेती है।
संगठनों का मानना है कि अगर इस मामले में निष्पक्ष और तेज जांच होती है, तो यह अगले कई मामलों के लिए मिसाल बनेगा।
एक पीड़िता की आवाज जो दबाई नहीं जा सकी
यह घटना सिर्फ एक पुलिस स्टेशन के बाहर ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के भीतर उठ रहे सवालों की गूंज है। गैंगरेप पीड़िता ने जिस साहस के साथ बाधाओं को पार किया, उससे साफ है कि आज भी न्याय की उम्मीद जीवित है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस विभाग इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता दिखाता है और क्या फरार आरोपी जल्द ही पकड़ में आते हैं।