हाइलाइट्स
- दिल्ली ब्लास्ट मामला में जांच एजेंसियों ने किया बड़ा खुलासा
- तीन डॉक्टर निकले धमाके के मुख्य साजिशकर्ता, दो गिरफ्तार
- 26 जनवरी पर लाल किले पर हमले की थी पूरी प्लानिंग
- फरीदाबाद से बरामद हुआ 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट
- अब तक 12 की मौत, 21 घायल, कई की हालत गंभीर
दिल्ली ब्लास्ट मामला: राजधानी को दहला देने वाली साजिश
सोमवार को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। जिस जगह यह विस्फोट हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर हजारों लोग रोजाना गुजरते हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध आतंकी साजिश थी। अब जब दिल्ली ब्लास्ट मामला की गुत्थी सुलझने लगी है, तो जांच एजेंसियां एक-एक कर ऐसे चौंकाने वाले खुलासे कर रही हैं जो राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करते हैं।
मुख्य संदिग्धों में तीन डॉक्टरों के नाम सामने
इस दिल्ली ब्लास्ट मामला में तीन प्रमुख संदिग्धों के नाम सामने आए हैं—डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील अहमद डार और डॉ. उमर। इन तीनों को पुलिस ने आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा पाया है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर धमाके के वक्त ही मारा गया, जबकि डॉ. मुजम्मिल और डॉ. अदील अहमद डार को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपी डॉक्टर जम्मू-कश्मीर से पढ़े-लिखे और समाज में सम्मानित माने जाते थे, लेकिन धीरे-धीरे ये आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के संपर्क में आए और फिर उनकी सोच कट्टरता की ओर मुड़ गई।
26 जनवरी को लाल किले पर हमला था असली लक्ष्य
पूछताछ में डॉ. मुजम्मिल ने स्वीकार किया कि उन्होंने और डॉ. उमर ने जनवरी के पहले हफ्ते में लाल किले की रेकी की थी। उनका उद्देश्य 26 जनवरी के दिन लाल किले पर बड़ा धमाका करने का था। जांच एजेंसियों ने बताया कि मोबाइल डाटा डंप से मिले सबूतों में दोनों की लोकेशन लाल किले और उसके आस-पास के क्षेत्रों में पाई गई है।
दिल्ली ब्लास्ट मामला से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस समूह ने दीवाली के समय भी भीड़भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन किसी तकनीकी कारण से वह योजना टल गई।
फरीदाबाद से बरामद हुआ 2,900 किलो विस्फोटक
इसी दिल्ली ब्लास्ट मामला से जुड़े एक और पहलू ने जांच को और गहराई दी है। हरियाणा पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में फरीदाबाद से 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया। यह बरामदगी धमाके के कुछ घंटे पहले की गई थी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह विस्फोटक हाफिज इश्तियाक नामक व्यक्ति के घर से मिला, जिसे डॉ. मुजम्मिल ने किराए पर लिया था। कमरे की तलाशी में कुल 2,563 किलो विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई। यह वही घर था जिसे गिरोह ने दिल्ली में विस्फोट के लिए बेस पॉइंट बनाया था।
डॉ. मुजम्मिल से पूछताछ में खुलासा
दिल्ली ब्लास्ट मामला की जांच कर रही एजेंसियों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल ने पूछताछ में कई अहम बातें कबूल की हैं। उसने माना कि वह और डॉ. उमर पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मुहम्मद के संपर्क में थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्हें निर्देश मिलते थे और फंडिंग क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से की जाती थी।
मुजम्मिल ने यह भी बताया कि दिल्ली में विस्फोट का उद्देश्य सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं था, बल्कि देश की राजधानी में डर और अस्थिरता फैलाना था।
12 लोगों की मौत, कई घायल अभी भी अस्पताल में
अब तक इस दिल्ली ब्लास्ट मामला में मरने वालों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। 21 लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कई मरीजों को बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया है। दिल्ली पुलिस ने आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच
दिल्ली ब्लास्ट मामला को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अब औपचारिक रूप से केस अपने हाथ में ले लिया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और NIA मिलकर जांच कर रही हैं। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक अत्याधुनिक और सैन्य-स्तर का था। यह साफ संकेत देता है कि हमले के पीछे पेशेवर आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था।
NIA अधिकारियों ने बताया कि हाफिज इश्तियाक को पूछताछ के लिए श्रीनगर ले जाया गया है। जांच में उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
दिल्ली ब्लास्ट मामला: सोशल मीडिया से मिला सुराग
एजेंसियों को सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध चैट्स मिली हैं जिनमें दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों का जिक्र है। यह चैट्स संभवतः पाकिस्तान के नंबरों से की गई थीं। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दिल्ली ब्लास्ट के अलावा देश के अन्य शहरों को भी निशाना बनाया जाना था।
राजधानी में सुरक्षा कड़ी, अलर्ट जारी
दिल्ली ब्लास्ट मामला के बाद राजधानी दिल्ली में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और प्रमुख बाजारों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। लाल किले और इंडिया गेट के आस-पास पुलिस की तैनाती दोगुनी कर दी गई है।
गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है। दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे के भीतर 7 संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
आतंक की नई रणनीति: पढ़े-लिखे पेशेवरों का नेटवर्क
दिल्ली ब्लास्ट मामला ने यह भी दिखा दिया कि अब आतंकी संगठन अपनी रणनीति बदल चुके हैं। वे अशिक्षित युवाओं के बजाय पढ़े-लिखे पेशेवरों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। डॉक्टरों, इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स को वैचारिक रूप से प्रभावित करके उन्हें अपनी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह एक नई चुनौती है, क्योंकि इन लोगों के पास तकनीकी ज्ञान और संसाधनों की पहुंच होती है, जिससे वे आसानी से बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी
दिल्ली ब्लास्ट मामला न केवल एक आतंकी वारदात है, बल्कि यह इस बात की चेतावनी भी है कि आतंकी नेटवर्क लगातार अपनी रणनीति और तकनीक को अपग्रेड कर रहे हैं। अब जरूरत है कि जांच एजेंसियां साइबर ट्रैकिंग और सोशल मीडिया इंटेलिजेंस पर और अधिक ध्यान दें ताकि ऐसे हमलों को पहले ही रोका जा सके।
दिल्ली ब्लास्ट मामला देश की राजधानी पर एक ऐसा घाव छोड़ गया है जिसे भरने में वक्त लगेगा। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आतंक का रूप बदल चुका है और अब वह आम जिंदगी के करीब पहुंच गया है। जांच एजेंसियां इस केस को देश के सबसे संगठित आतंकी मामलों में से एक मान रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही साजिश के सभी परतें खुल जाएंगी और दोषियों को सजा मिलेगी।