हाइलाइट्स
- नकली काजू से बाजार में बढ़ा मिलावटी खाद्य उत्पादों का खतरा
- खुले बाजारों में कम दाम पर मिलने वाले काजू पर बढ़ा संदेह
- फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
- उपभोक्ताओं में भ्रम कि उन्हें असली मिल रहा है या नकली
- त्योहारों और शादी-पार्टियों में नकली ड्राई फ्रूट की मांग बढ़ी
नकली काजू का खेल कितना बड़ा?
बाजारों में अचानक सस्ता काजू मिलना शुरू हो गया है और जांच में सामने आया कि यह असली नहीं बल्कि नकली काजू है। इस पूरे मामले ने फूड सेफ्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन्होंने यह कारोबार शुरू किया है, उनके लिए यह कमाई का तरीका बन चुका है। जिन लोगों को असली काजू की कीमत भारी लगती है, वे कम दाम देखकर इन नकली काजू को खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें पता भी नहीं चलता कि वे क्या खा रहे हैं।
यह नकली संस्करण एक खास प्रकार के आटे को काजू की शेप में ढालकर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे तेल में तलकर ऐसे पैक किया जाता है कि यह बिल्कुल असली काजू जैसा दिखे। कई दुकानों में इसे असली ब्रांडेड पैकेट में भरकर बेचा जा रहा है। यही वजह है कि उपभोक्ता इसे पहचान ही नहीं पाते।
मार्केट में अब काजू भी “मेड इन आटा” हो गया है !!
एक खास आटे को काजू की शेप देकर तेल में तलो और असली काजू के पैकेट में ठेल दो ।फूड सेफ्टी विभाग शायद “ड्राई फ्रूट इनोवेशन” पर रिसर्च कर रहा है।
ग्राहक काजू खाए या धोखा—सरकार को क्या फर्क पड़ता है? pic.twitter.com/qBKyyDc2ZO
— खुरपेंची स्वास्थ्य (@Khurpenchhealth) November 21, 2025
फूड सेफ्टी विभाग पर उठ रहे सवाल
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यह मामला नया नहीं है। बाजार में मिलावट पहले भी होती रही है, लेकिन नकली काजू जैसे ड्राई फ्रूट का बनकर इस तरह खुलेआम बेचना हैरान करने वाला है। सवाल यह भी है कि फूड सेफ्टी विभाग इस पर कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा। जिन बाजारों में नियमित जांच की जरूरत है, वहां महीनों तक निरीक्षण तक नहीं होता।
लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि विभाग “ड्राई फ्रूट इनोवेशन” के नाम पर ऐसे मामलों को अनदेखा कर रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक विभाग सक्रिय नहीं होगा।
असली और नकली काजू की पहचान मुश्किल
सबसे बड़ी समस्या यह है कि नकली काजू को पहचानना आसान नहीं। मिलावटखोर अब ऐसे तरीके अपनाते हैं कि टेक्सचर, रंग, और आकार तक लगभग समान हो जाता है।
पहचान के कुछ तरीके (H4)
- असली काजू में हल्की मिठास और नट्स वाला फ्लेवर होता है, जबकि नकली काजू में केवल तेल और आटे की गंध आती है।
- काटने पर असली काजू नरम होता है, जबकि नकली काजू थोड़े रबर जैसे महसूस होते हैं।
- तेल में तला होने के कारण नकली काजू हल्का कुरकुरापन दिखाते हैं, जो असली काजू में नहीं होता।
इन संकेतों के बावजूद कई लोग असली और नकली में फर्क ही नहीं कर पाते, क्योंकि दुकानदार इन्हें मिलाकर बेच देते हैं।
उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर खतरा
नकली काजू केवल धोखा नहीं है, यह स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है। जिन आटे और तेल का उपयोग इसमें किया जाता है, वे अक्सर निम्न गुणवत्ता के होते हैं। कई प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट बताती है कि ऐसे बनावटी ड्राई फ्रूट लंबे समय तक खाने से पेट संबंधी समस्याएं, एसिडिटी, और संक्रमण तक हो सकता है।
इसके अलावा, इन्हें सुगंधित बनाने के लिए मिलावटी फ्लेवर डाले जाते हैं जो शरीर में एलर्जी, सिर दर्द, और पाचन समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
क्यों बढ़ रहा है नकली काजू का कारोबार?
इस बढ़ते कारोबार के कई कारण हैं:
कम लागत और ज्यादा मुनाफा
आटा और तेल की तुलना में असली काजू काफी महंगा होता है। मिलावट करने वालों को समझ आता है कि थोड़ी लागत में वे नकली काजू तैयार कर सकते हैं और असली के नाम पर बेचकर दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं।
त्योहारों और शादियों में भारी मांग
त्योहार और शादी-पार्टियों में ड्राई फ्रूट की मांग बढ़ जाती है। इस समय दुकानदार जिनके पास कम लागत वाले विकल्प चाहिए होते हैं, वे अक्सर नकली काजू खरीद लेते हैं।
कमजोर निगरानी
फूड सेफ्टी विभाग की निगरानी कमजोर होने से मिलावटखोर निडर होकर काम करते हैं। कई बाजारों में महीनों तक निरीक्षण नहीं होता।
सरकार पर सवाल, लोगों में गुस्सा
उपभोक्ता यह सवाल उठाते हैं कि यदि इतने बड़े स्तर पर नकली काजू बिक रहे हैं, तो सरकार क्या कर रही है? बाजारों में असली और नकली की पहचान के लिए जागरूकता अभियान तक नहीं चलाए जा रहे। कई लोगों का कहना है कि उपभोक्ता कितना भी सतर्क हो जाए, जब तक सरकार सख्त कदम नहीं उठाती, इस खेल को रोका नहीं जा सकता।
लोगों की सोच बनती जा रही है—“ग्राहक काजू खाए या धोखा, सरकार को क्या फर्क पड़ता है?” यही विश्वास-घात उपभोक्ताओं को निराश कर रहा है।
क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ताओं को ब्रांडेड, प्रमाणित दुकानों से ही खरीदारी करनी चाहिए। बिना पैक का ड्राई फ्रूट विशेषकर नकली काजू का जोखिम बढ़ाता है। फूड सेफ्टी विभाग को भी नियमित छापे, प्रयोगशाला जांच, और मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिकायत की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए ताकि उपभोक्ता सीधे विभाग को सूचित कर सकें। इसके साथ ही दुकानदारों को भी अपने स्तर पर सावधानी और नैतिक व्यापार की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
बाजार में नकली काजू का यह खेल केवल मिलावट नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत और भरोसे पर सीधा हमला है। रोजाना इतने लोगों तक मिलावटी ड्राई फ्रूट पहुंच रहा है और विभागों की चुप्पी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। अब समय है कि सरकार सख्ती दिखाए और उपभोक्ता भी खरीदारी में जागरूकता बरतें। जब तक असली और नकली की पहचान नहीं होगी, मिलावटखोरों का यह धंधा चलता रहेगा।