हाइलाइट्स
- मारबर्ग वायरस के पहले प्रकोप की इथियोपिया ने आधिकारिक पुष्टि की
- दक्षिण सूडान सीमा से सटे क्षेत्र में नौ संदिग्ध मामले मिले
- WHO ने कहा कि यह वही स्ट्रेन है, जो पहले पूर्वी अफ्रीका को झकझोर चुका है
- वैक्सीन उपलब्ध नहीं, शुरुआती पहचान ही संक्रमण रोकने का सबसे प्रभावी तरीका
- अफ्रीका CDC ने निगरानी, टेस्टिंग और नियंत्रण प्रयासों की सराहना की
इथियोपिया में मारबर्ग वायरस के पहले प्रकोप से वैश्विक स्तर पर चिंता गहराई
इथियोपिया ने पहली बार मारबर्ग वायरस रोग (MVD) के प्रकोप की घोषणा की है। दक्षिणी हिस्से में दक्षिण सूडान की सीमा के पास मिले नौ संदिग्ध मरीजों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत आपात निगरानी शुरू कर दी और उन इलाकों में नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए, जहां मरीज पाए गए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि यह वही स्ट्रेन है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में पूर्वी अफ्रीका के कई देशों में गंभीर असर छोड़ा था। मारबर्ग वायरस को दुनिया के सबसे घातक रोगजनकों में गिना जाता है और इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत मानी जाती है।
संक्रमण की पुष्टि के बाद बढ़ी सतर्कता
इथियोपिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि संभावित मरीजों के सैंपल को तेजी से परीक्षण के लिए भेजा गया। शुरुआती रिपोर्ट में मारबर्ग वायरस के लक्षणों से मिलते-जुलते संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों के संपर्क में आए परिवारों और स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत क्वारंटीन किया गया है ताकि संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके।
सरकार ने उन गांवों को भी सील कर दिया है जहां मरीजों की आवाजाही हुई थी। यह कदम वायरस को समुदाय के भीतर फैलने से रोकने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
WHO और Africa CDC की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहले से हाई अलर्ट पर
WHO ने कहा कि सैंपल में मिले स्ट्रेन पूरी तरह वही हैं, जो इससे पहले युगांडा, तंजानिया और घाना में देखे गए थे। संगठन ने इथियोपिया को त्वरित कार्रवाई के लिए सराहा, लेकिन चेतावनी भी दी कि मारबर्ग वायरस के प्रकोप को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
Africa CDC ने भी बयान जारी कर कहा कि इथियोपिया ने समय रहते परीक्षण, निगरानी और संक्रमित क्षेत्रों को सील करने जैसे कदम उठाए हैं। एजेंसी के विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती पहचान और निगरानी ही इस तरह की बीमारियों के प्रसार को रोकने की कुंजी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मारबर्ग वायरस इंसानों में जिस तेजी से फैलता है, उसे देखते हुए किसी भी देश में यह संक्रमण एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
मारबर्ग वायरस कैसे फैलता है?
प्राकृतिक स्रोत और संक्रमण का तरीका
WHO के अनुसार, मारबर्ग वायरस का प्राकृतिक स्रोत Rousettus aegyptiacus नामक फलचमगादड़ है। यह चमगादड़ आमतौर पर उष्णकटिबंधीय अफ्रीका में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। संक्रमित चमगादड़ के संपर्क में आने के बाद यह वायरस इंसानों तक पहुंचता है।
एक बार जब कोई व्यक्ति संक्रमित होता है, तो मारबर्ग वायरस शरीर द्रवों, सतहों और वस्तुओं के संपर्क से इंसान से इंसान में फैल सकता है। यह वायरस स्वास्थ्य कर्मियों और परिवार के सदस्यों के लिए विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है, क्योंकि संक्रमण बहुत नज़दीकी संपर्क में फैलता है।
शुरुआती लक्षण
- अचानक तेज बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- कमजोरी
कई मामलों में बीमारी एक सप्ताह के भीतर गंभीर रूप ले लेती है। इस दौरान मरीजों में भीतरी रक्तस्राव शुरू हो सकता है, जो इसे अत्यंत घातक बनाता है।
लक्षण और इलाज
बिना वैक्सीन वाले इस वायरस की चुनौती
अभी तक मारबर्ग वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीजों को सहायक उपचार के माध्यम से संभालते हैं, जिसमें शामिल हैं:
- शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना
- ऑक्सीजन सपोर्ट
- दर्द और बुखार का उपचार
- रक्तस्राव की निगरानी
WHO ने कहा कि शुरुआती इलाज मिलने से कुछ मरीजों की जान बच सकती है, लेकिन देर से पहचाने गए मामलों में मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
मारबर्ग वायरस का इतिहास
1967 से अब तक का सफर
मारबर्ग वायरस का पहला प्रकोप 1967 में जर्मनी के मारबर्ग और फ्रैंकफर्ट शहरों के साथ सर्बिया के बेलग्रेड में सामने आया था। यह प्रकोप अफ्रीकी ग्रीन बंदरों पर किए जा रहे वैज्ञानिक शोध के दौरान शुरू हुआ।
इसके बाद से यह वायरस कई देशों में बार-बार देखा गया:
- अंगोला
- घाना
- गिनी
- केन्या
- दक्षिण अफ्रीका
- तंजानिया
- युगांडा
2008 में दो यूरोपीय पर्यटक युगांडा की एक चमगादड़-आबाद गुफा में जाने के बाद संक्रमित पाए गए थे।
2024 में रवांडा और 2025 में तंजानिया ने भी अपने पहले प्रकोप की पुष्टि की, जिससे पता चलता है कि मारबर्ग वायरस अभी भी अफ्रीका के कई क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
इथियोपिया में आगे की रणनीति
इथियोपिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि वे WHO और Africa CDC के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि प्रकोप को सीमित किया जा सके। सभी अस्पतालों को सतर्क रहने और तेज बुखार या रक्तस्राव वाले मरीजों की तुरंत रिपोर्टिंग का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने उन क्षेत्रों में मेडिकल टीमें भेजी हैं जो जोखिम में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच और निगरानी सख्त रखी गई, तो मारबर्ग वायरस के प्रसार को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।
इथियोपिया में मारबर्ग वायरस के पहले प्रकोप की पुष्टि ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। यह वायरस बेहद घातक है और तेजी से फैल सकता है। इसलिए शुरुआती पहचान, निगरानी और त्वरित नियंत्रण प्रयास ही स्थिति को बिगड़ने से रोक सकते हैं। अफ्रीका में हालिया प्रकोपों को देखते हुए विशेषज्ञ इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में देख रहे हैं।