हाइलाइट्स
- डायबिटीज़ के 10 करोड़ से अधिक मरीज भारत में, कई को लक्षणों का पता ही नहीं चलता
- एम्स के प्रो. डॉ. निखिल टंडन ने बताया कि टाइप-1 जेनेटिक जबकि टाइप-2 जीवनशैली से जुड़ी
- कम उम्र के किशोरों में तेजी से बढ़ रहे टाइप-2 डायबिटीज़ के मामले
- देर से पता चलने पर बढ़ जाता है बीमारी का जोखिम, शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी
- विशेषज्ञों के अनुसार सही खानपान और व्यायाम से डायबिटीज़ पर नियंत्रण संभव
भारत में डायबिटीज़ की बढ़ती चुनौती
आज दुनिया भर में विश्व डायबिटीज दिवस मनाया जा रहा है और इसी मौके पर भारत में डायबिटीज़ की चिंताजनक स्थिति पर गंभीर चर्चा हो रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट बताती है कि देश में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं। यह संख्या न केवल दुनिया में सबसे अधिक है बल्कि यह भी एक बड़ा संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत को बड़ी स्वास्थ्य चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकतर लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि वे डायबिटीज़ से पीड़ित हैं। बीमारी अक्सर किसी और जांच के दौरान पकड़ में आती है, जब तक स्थिति बिगड़ चुकी होती है। विशेषज्ञ इसी कारण इसकी शुरुआती पहचान और जागरूकता पर जोर दे रहे हैं।
एम्स के विशेषज्ञ ने बताई असली स्थिति
दिल्ली एम्स के एंडोक्रिनोलॉजी एवं मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. निखिल टंडन ने हमारी बातचीत में बताया कि अधिकांश मरीजों में डायबिटीज़ के लक्षण बेहद देरी से सामने आते हैं।
डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज़ के दो मुख्य प्रकार
टाइप-1 डायबिटीज़
- यह जेनेटिक होती है
- एक पीढ़ी से दूसरी में जा सकती है
- शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता
- अधिकतर मामलों में बच्चों या युवाओं में इसका निदान होता है
- रोज़ाना इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है
टाइप-2 डायबिटीज़
- सबसे आम प्रकार
- खराब खानपान, मोटापा और बिगड़ी जीवनशैली इसका बड़ा कारण
- शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता
- परिवार में किसी को डायबिटीज़ होने पर जोखिम बढ़ जाता है
डॉ. निखिल कहते हैं कि कई बार लोग महीनों तक अनजाने में शुगर बढ़ी हुई लेकर चलते रहते हैं। इसके चलते शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है।
कम उम्र में बढ़ रही टाइप-2 डायबिटीज़ की समस्या
एक समय था जब टाइप-2 डायबिटीज़ को 50 साल से अधिक उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। डॉ. निखिल बताते हैं कि अब 15 से 20 साल की उम्र वाले किशोरों में भी टाइप-2 डायबिटीज़ के केस तेजी से बढ़े हैं।
इसके कारण
- हाई-केलोरी आहार
- फास्ट फूड का अधिक सेवन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- लंबे समय तक बैठे रहना
- तनाव और अनियमित नींद
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इतनी कम उम्र में डायबिटीज़ होना बेहद खतरनाक है क्योंकि यह जीवन भर का रोग है। हालांकि नियंत्रित जीवनशैली अपनाने से इसे काफी हद तक काबू में रखा जा सकता है।
डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षण: डॉक्टर क्या कहते हैं
सामान्य से अधिक भूख लगना
जब शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलने के लिए इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो ग्लूकोज़ सेल्स तक नहीं पहुंचता। इससे व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है।
बार-बार पेशाब आना
ब्लड शुगर बढ़ने पर किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने की कोशिश करती है, जिसके कारण पेशाब अधिक बनता है।
मुंह का सूखना और डिहाइड्रेशन
बार-बार पेशाब होने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मुंह सूखने लगता है।
खुजली और रूखी स्किन
नमी कम होने से त्वचा पर खुजली और सूखापन बढ़ जाता है।
धुंधला दिखाई देना
शरीर में तरल स्तर में बदलाव आंखों के लेंस को प्रभावित करता है, जिससे चीजें धुंधली दिखने लगती हैं।
डॉ. निखिल के अनुसार, हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखना जरूरी नहीं है। किसी में दो या तीन लक्षण भी संकेत हो सकते हैं कि डायबिटीज़ बढ़ रही है।
कैसे बचें डायबिटीज़ से? विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. निखिल बताते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज़ को रोकना पूरी तरह जीवनशैली पर निर्भर है। खासकर उनके लिए जो प्रीडायबिटिक हैं या परिवार में किसी को डायबिटीज़ है।
क्या बदलाव जरूरी हैं?
- नियमित व्यायाम
- समय पर और संतुलित भोजन
- वजन नियंत्रण
- तनाव कम करना
- पर्याप्त पानी पीना
- सिगरेट और शराब से दूरी
प्रीडायबिटीज़ वाले लोग क्या करें?
अगर शुगर लेवल सामान्य से अधिक है लेकिन डायबिटीज़ की स्थिति तक नहीं पहुंचा है, तो समय रहते जीवनशैली बदलकर बीमारी को टाला जा सकता है।
समाज में जागरूकता ही असली सुरक्षा
विश्व डायबिटीज़ दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि यह याद दिलाना भी है कि यह रोग अब हर घर तक पहुंच चुका है। भारत में इसकी रफ्तार जिस तरह बढ़ रही है, अगर लोग समय पर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय में समय पर जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज़ को नियंत्रित किया जा सकता है। आज जरूरत इस बात की है कि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनें और शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें।