भाई के गाल पर एक घंटे तक पड़ते रहे थप्पड़… वजह सामने आई तो हर कोई रह गया हैरान, सांप के जहर से जूझ रहा था युवक!
उत्तर प्रदेश के हरदोई से भाई-भाई के रिश्ते और मुश्किल वक्त में दिखाई गई हिम्मत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। खेत में काम करने के दौरान एक युवक को जहरीले सांप ने डस लिया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी और वह बार-बार बेहोशी जैसी स्थिति में जाने लगा। ऐसे वक्त में उसके बड़े भाई ने हिम्मत नहीं हारी और उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में डॉक्टरों की सलाह के बाद बड़े भाई ने करीब एक घंटे तक अपने छोटे भाई को जगाए रखने की कोशिश की। इसी दौरान उसने उसके गाल पर 150 से ज्यादा थप्पड़ मारे। परिवार और अस्पताल के कर्मचारियों की कोशिशों के बीच युवक को एंटी-वेनम दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत गंभीर थी और उसे 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए। इलाज के बाद युवक की हालत में सुधार आया और उसकी जान बच गई।
यह घटना हरदोई के देहात कोतवाली क्षेत्र के ज्योति नगर से जुड़ी बताई जा रही है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सांप के काटने की स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना कितना महत्वपूर्ण है।
खेत में पानी देने गया था युवक
बताया गया कि ज्योति नगर निवासी 21 वर्षीय अरुण अपने बड़े भाई आकाश के साथ खेत में पानी देने गया था। दोनों भाई सामान्य तरीके से खेत में काम कर रहे थे। दोपहर करीब दो बजे अरुण घास की एक बोरी उठाने लगा।
उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि बोरी के अंदर एक जहरीला सांप छिपा हुआ है। जैसे ही अरुण ने बोरी उठाई, सांप ने उसे डस लिया।
सांप के काटते ही अरुण को दर्द महसूस हुआ और उसकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई।
आकाश ने समय गंवाए बिना अपने भाई को इलाज के लिए ले जाने की कोशिश शुरू कर दी। ऐसे मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि जहरीले सांप के जहर का असर शरीर में तेजी से बढ़ सकता है।
मेडिकल स्टोर संचालक ने भी की मदद
अरुण की हालत देखकर परिवार के लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक शिवम शर्मा ने दोनों भाइयों की मदद की।
बताया गया कि शिवम ने दोनों को अपनी बाइक पर बैठाया और मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में मदद की। ग्रामीण इलाकों में कई बार अस्पताल तक पहुंचने में परिवहन की समस्या सामने आती है। ऐसे में समय पर किसी वाहन या मदद का मिल जाना मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
आखिरकार अरुण को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल इलाज शुरू किया।
अस्पताल पहुंचते ही बढ़ने लगा जहर का असर
अस्पताल में डॉक्टरों ने अरुण की जांच की। इस दौरान उसके शरीर में सांप के जहर का असर दिखाई देने लगा था। युवक को तेज नींद आने लगी और वह बार-बार आंखें बंद करने की कोशिश कर रहा था।
परिवार के अनुसार, डॉक्टरों ने उस समय उसे लगातार निगरानी में रखने और सो जाने से रोकने को कहा। इसके बाद आकाश अपने भाई के पास बैठ गया।
वह लगातार अरुण को जगाने की कोशिश करता रहा। करीब एक घंटे तक उसने उसके गाल पर थप्पड़ मारकर उसे प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया। अस्पताल के कर्मचारियों ने भी मरीज की निगरानी और उसे होश में रखने की कोशिश की।
यह दृश्य परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण था। एक तरफ भाई की हालत लगातार गंभीर हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ आकाश किसी भी तरह उसे होश में रखना चाहता था।
करीब 150 थप्पड़ मारने का दावा
परिवार के मुताबिक, आकाश ने करीब एक घंटे तक अरुण को जगाए रखा और इस दौरान उसके गाल पर 150 से अधिक थप्पड़ मारे।
हरदोई में एक युवक को सांप ने डस लिया। बड़े भाई ने लिफ्ट लेकर उसे हॉस्पिटल पहुंचाया। युवक की गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टर ने हिदायत दी कि उसे किसी भी कीमत पर सोने न दिया जाए। इसके बाद युवक के बड़े भाई ने उसके गाल पर लगातार 150 से ज्यादा थप्पड़ मारे, ताकि उसे नींद ना आए।
— Shivani Sahu (@askshivanisahu) August 16, 2026
बड़े भाई… pic.twitter.com/SNXemnt9CY
यह बात सुनने में भले ही बेहद चौंकाने वाली लगती है, लेकिन परिवार के अनुसार उस समय आकाश के सामने केवल अपने भाई की जान बचाने की चिंता थी। वह बार-बार उसे आवाज देता और प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर थप्पड़ मारकर जगाने की कोशिश करता रहा।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि सांप के काटने के बाद मरीज को थप्पड़ मारकर जगाए रखना सामान्य या सार्वभौमिक प्राथमिक उपचार नहीं है। सांप के काटने की स्थिति में चिकित्सा विशेषज्ञों की प्राथमिक सलाह मरीज को शांत रखने, शरीर और विशेषकर काटे गए अंग को स्थिर रखने तथा बिना देरी अस्पताल पहुंचाने की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मरीज को कम से कम हिलाने-डुलाने और जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की सलाह देता है।
इसलिए हर सांप काटने के मामले में इस घटना की तरह थप्पड़ मारना या मरीज को जबरदस्ती जगाए रखना इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
15 एंटी-वेनम देकर किया गया इलाज
अरुण की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने एंटी-वेनम उपचार शुरू किया। परिवार के अनुसार युवक को कुल 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए।
एंटी-वेनम सांप के जहर के गंभीर प्रभाव को रोकने या उलटने के लिए सबसे महत्वपूर्ण विशिष्ट उपचार माना जाता है। WHO के अनुसार जहरीले सांप के काटने के मामलों में उचित एंटी-वेनम समय पर उपलब्ध होना गंभीर परिणामों और मौत के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अरुण के मामले में भी समय पर अस्पताल पहुंचना और चिकित्सकीय उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
डॉक्टरों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी। इलाज के दौरान परिवार के लोग भी अस्पताल में मौजूद रहे और अरुण की हालत में सुधार का इंतजार करते रहे।
धीरे-धीरे सुधरने लगी हालत
इलाज के बाद अरुण की हालत में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। जिस युवक की हालत सांप के जहर के कारण गंभीर हो गई थी, वह उपचार के बाद खतरे से बाहर आने लगा।
परिवार के लिए यह राहत की सबसे बड़ी खबर थी। खेत में सामान्य तरीके से काम करने गया अरुण कुछ ही समय में जिंदगी और मौत के बीच पहुंच गया था। लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचने और उपचार मिलने के बाद उसकी जान बच गई।
आकाश की कोशिशों ने भी परिवार के लिए इस घटना को हमेशा याद रहने वाली कहानी बना दिया।
सांप के काटने पर क्या करना चाहिए?
इस घटना के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि सांप के काटने पर घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाया जाए। WHO की सलाह के मुताबिक, व्यक्ति को सांप वाली जगह से दूर करके शांत रखना चाहिए और शरीर को अनावश्यक रूप से हिलाने-डुलाने से बचाना चाहिए। काटे गए अंग को स्थिर रखना और मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
अगर शरीर पर अंगूठी, कड़ा, पायल या कोई दूसरी कसी हुई चीज हो तो सूजन आने से पहले उसे निकाल देना चाहिए। मरीज को खुद चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय संभव हो तो उसे सहारा देकर या स्ट्रेचर जैसे साधन से ले जाना बेहतर होता है।
इन घरेलू उपायों से बचना जरूरी
सांप काटने के बाद कई जगहों पर लोग आज भी घरेलू उपचार या पुराने नुस्खों का सहारा लेते हैं। लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है और अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है।
भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों में भी सांप के काटे स्थान पर चीरा लगाने, जहर चूसने, कसकर पट्टी या टॉर्निकेट बांधने और अन्य अप्रमाणित उपायों से बचने की सलाह दी गई है।
मरीज को शराब, कोई उत्तेजक पदार्थ या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देना भी उचित नहीं है। सांप को पकड़ने या मारने के चक्कर में समय गंवाना भी जोखिम भरा हो सकता है। यदि सुरक्षित हो तो सांप की तस्वीर दूर से ली जा सकती है, जिससे विशेषज्ञ उसकी पहचान में मदद ले सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा सतर्कता जरूरी
हरदोई जैसे ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग खेतों में काम करते हैं। घास, लकड़ी, फसल के ढेर, बोरी और झाड़ियों जैसी जगहों पर सांप छिपे हो सकते हैं।
इसलिए खेत में काम करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। हाथ डालने या बोरी उठाने से पहले उसे डंडे से जांच लेना, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करना और घर के आसपास घास-कचरा साफ रखना सांपों के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
WHO भी घरों के आसपास घास छोटी रखने, कचरे और पुराने सामान को हटाने तथा रात में बाहर निकलते समय रोशनी का इस्तेमाल करने जैसी सावधानियों की सलाह देता है।
भाई की हिम्मत ने जीत ली जिंदगी की जंग
हरदोई की यह घटना सिर्फ सांप के काटने की कहानी नहीं है। यह उस वक्त एक परिवार की घबराहट और संघर्ष की कहानी भी है, जब कुछ ही मिनटों में जिंदगी खतरे में पड़ गई थी।
आकाश ने अपने छोटे भाई को बचाने के लिए समय गंवाए बिना अस्पताल पहुंचाने में मदद की और वहां भी उसके साथ बना रहा। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने जो निर्देश दिए, परिवार ने उनका पालन किया और अरुण को लगातार निगरानी में रखा।
हालांकि इस मामले में 15 एंटी-वेनम दिए जाने और थप्पड़ मारकर जगाए रखने की जानकारी परिवार के बयान पर आधारित है; ऐसे उपचार की जरूरत हर मरीज में अलग हो सकती है और एंटी-वेनम की मात्रा केवल डॉक्टर मरीज की स्थिति और जहर के प्रभाव के आधार पर तय करते हैं।
इस घटना से सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांप के काटने पर समय बर्बाद किए बिना मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए। घरेलू नुस्खों और अफवाहों के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टरों की मदद लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अरुण के मामले में भी समय पर चिकित्सा सहायता और एंटी-वेनम उपचार ने उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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