MYH लापरवाही: स्ट्रेचर पर तड़पता रहा 11 साल का बच्चा, मां दुपट्टे से बचाती रही जान, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
हाइलाइट्स
MYH लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप।
11 वर्षीय गंभीर बीमार बच्चे को परिजनों ने खुद स्ट्रेचर पर धक्का देकर दूसरे अस्पताल पहुंचाया।
गर्मी में मां पानी से भीगा दुपट्टा बच्चे के शरीर पर रखकर उसे होश में रखने की कोशिश करती रही।
जांच के बाद एक डॉक्टर की 7 दिन की सैलरी काटी गई, तीन नर्सों का वेतन रोका गया।
अस्पताल पहले भी चूहों के आतंक और नवजात का अंगूठा कटने जैसी घटनाओं को लेकर विवादों में रहा है।
MYH लापरवाही ने फिर उठाए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में गिने जाने वाले महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) से सामने आई एक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक 11 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार बच्चा स्ट्रेचर पर लेटा दिखाई देता है, जबकि उसके माता-पिता तपती गर्मी में खुद स्ट्रेचर धक्का देकर उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर MYH लापरवाही को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
बताया जा रहा है कि बच्चा रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित था और उसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर माता-पिता को ही स्ट्रेचर संभालना पड़ा और वे अपने बीमार बेटे को लेकर अस्पताल परिसर में भटकते रहे।
तपती धूप में मां का संघर्ष बना भावुक कर देने वाला दृश्य
दुपट्टे में पानी भिगोकर बचाने की कोशिश
वीडियो में सबसे मार्मिक दृश्य वह था जब बच्चे की मां अपने दुपट्टे को पानी में भिगोकर उसके शरीर पर रख रही थी। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच वह लगातार बेटे को होश में रखने की कोशिश करती दिखाई दी।
यह दृश्य देखने वाले हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जब अस्पताल में तमाम संसाधन मौजूद हैं, तब एक गंभीर मरीज के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।
यही वजह है कि MYH लापरवाही का मामला कुछ ही घंटों में पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया
भोपाल से इंदौर तक मचे फोन कॉल
जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हलचल शुरू हो गई। भोपाल से लेकर इंदौर तक अधिकारियों ने मामले की जानकारी ली और तत्काल जांच के आदेश दिए।
प्रारंभिक जांच में अस्पताल स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद कार्रवाई करते हुए एक डॉक्टर की सात दिन की सैलरी काट दी गई, तीन नर्सों का वेतन रोक दिया गया और सुरक्षा प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।
हालांकि कई लोगों का मानना है कि MYH लापरवाही जैसे गंभीर मामले में यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
अस्पताल प्रशासन की सफाई ने बढ़ाया विवाद
'मरीज नहीं, फाइल ले जानी थी'
जब इस पूरे विवाद पर अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा गया तो अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव का बयान और अधिक विवाद का कारण बन गया।
उनका कहना था कि बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की चिकित्सीय आवश्यकता नहीं थी। प्रशासन के अनुसार केवल मरीज की फाइल और दस्तावेज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भेजे जाने थे।
अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि बच्चे को स्ट्रेचर उपलब्ध कराना ही स्टाफ की सबसे बड़ी गलती थी क्योंकि इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
लेकिन इस स्पष्टीकरण ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल किया कि यदि मरीज को ले जाने की जरूरत नहीं थी तो परिजनों को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई।
मध्य प्रदेश में लगातार एयर एंबुलेंस की बात होती है प्रचार होता है। लेकिन हालत ये है कि इंदौर में एम वाय अस्पताल से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल 1 किमी तक माता-पिता अपने तड़पते बेटे को खुद स्ट्रेचर पर लेकर गए। और जिम्मेदारो का हर बार का जवाब दिखवा रहे हैं।
— SanjayGupta_Journalist (@sanjaygupta1304) June 7, 2026
शर्म है कि इनको आती नहीं pic.twitter.com/YWfBV90eV5
इस पूरे विवाद ने MYH लापरवाही को और गंभीर बना दिया।
क्या डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी थी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना में सबसे बड़ी समस्या संवाद की कमी दिखाई देती है।
यदि एक विभाग मरीज को रेफर कर रहा था और दूसरा विभाग उसकी आवश्यकता से इनकार कर रहा था, तो इसका सीधा मतलब है कि अस्पताल के भीतर समन्वय की समस्या मौजूद है।
ऐसी परिस्थितियों में सबसे अधिक नुकसान मरीज और उसके परिवार को उठाना पड़ता है। यही कारण है कि MYH लापरवाही केवल एंबुलेंस उपलब्ध न कराने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि यह प्रशासनिक अव्यवस्था की ओर भी इशारा करती है।
पहले भी विवादों में रहा है MYH
नवजात का अंगूठा कटने का मामला
यह पहली बार नहीं है जब MYH लापरवाही सुर्खियों में आई हो।
जनवरी में अस्पताल में एक नर्स द्वारा नवजात शिशु के हाथ से प्लास्टर हटाने के दौरान उसका अंगूठा कट जाने का मामला सामने आया था। उस घटना ने भी प्रदेशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था।
जांच के बाद अस्पताल प्रशासन को कई सवालों का सामना करना पड़ा था।
चूहों ने कुतरे थे नवजात बच्चे
इससे पहले अस्पताल के नवजात आईसीयू से बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई थी। आरोप था कि आईसीयू में भर्ती नवजात बच्चों को चूहों ने काट लिया था।
उस समय परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। कई बच्चों की हालत बिगड़ने की खबरों ने स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया था।
इन घटनाओं के बाद भी यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो यह चिंता का विषय है।
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर बड़ा सवाल
क्या केवल कार्रवाई काफी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वेतन काटने या निलंबन से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
जरूरत इस बात की है कि अस्पतालों में मरीजों के लिए स्पष्ट रेफरल सिस्टम, बेहतर समन्वय और त्वरित परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
यदि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है तो छोटे अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इसी वजह से MYH लापरवाही का यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
जनता जवाब चाहती है
इस घटना के बाद आम लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे को अस्पताल परिसर में इस तरह क्यों भटकना पड़ा।
जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, तब ऐसी घटनाएं उन दावों की वास्तविकता को सामने ला देती हैं।
फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई कर दी है, लेकिन MYH लापरवाही का यह मामला आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घटना से कोई सबक लिया जाएगा या फिर कुछ समय बाद यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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